- पंजाब के संगरूर जिले की 62 वर्षीय भूर कौर का ब्लड शुगर अचानक 550 mg/dL तक पहुंच गया और वह बेहोश हो गईं.
- कौर को डायबिटिक, गंभीर संक्रमण और एक्यूट रेस्पिरेटरी फेल्योर जैसी जानलेवा स्थितियों में भर्ती किया गया.
- ICU में ऑक्सीजन सपोर्ट, इंसुलिन, एंटीबायोटिक्स और फ्लूइड्स के जरिए उनका तुरंत और प्रभावी इलाज शुरू किया गया.
पंजाब के संगरूर जिले की 62 वर्षीय भूर कौर का ब्लड शुगर अचानक 550 mg/dL तक पहुंच गया और वह बेहोश होकर गिर पड़ीं. वर्षों से डायबिटीज और हाइपरटेंशन से जूझ रहीं भूर कौर की हालत कुछ ही पलों में बेहद गंभीर हो गई. परिवार के पास सोचने का समय नहीं था, वे तुरंत उन्हें सुनाम के कश्मीरी हार्ट केयर सेंटर लेकर पहुंचे.
डॉक्टरों के अनुसार, भूर कौर को डायबिटिक कीटोएसिडोसिस, गंभीर संक्रमण, सेप्सिस और एक्यूट रेस्पिरेटरी फेल्योर जैसी जानलेवा स्थितियों में भर्ती किया गया था. आईसीयू में लगातार ऑक्सीजन सपोर्ट, इंसुलिन, एंटीबायोटिक्स और फ्लूइड्स के जरिए उनका इलाज शुरू किया गया. शुरुआती घंटे बेहद अहम थे, जहां हर मिनट उनकी जिंदगी पर भारी पड़ सकता था. तीन दिन बाद उनकी स्थिति में धीरे-धीरे सुधार दिखने लगा और आखिरकार उन्हें होश आ गया. डॉक्टरों ने इसे सबसे बड़ी राहत बताया, क्योंकि वे मौत के मुहाने से लौट आई थीं.
इस पूरे इलाज में ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना' ने अहम भूमिका निभाई. इस योजना के तहत बिना किसी आर्थिक बाधा के तुरंत इलाज शुरू हो सका, जिससे उनकी जान बचाने में देरी नहीं हुई. अब स्वस्थ हो रहीं भूर कौर ने कहा कि उन्हें जैसे दूसरा जीवन मिला है. यह घटना न सिर्फ एक मेडिकल इमरजेंसी की कहानी है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि समय पर इलाज और सरकारी सहयोग किस तरह जिंदगी बचा सकता है.
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