पापा करते थे दिहाड़ी मजदूरी और सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी, बेटा बना देश का गौरव, जानें कौन हैं प्रवीण चित्रवेल

प्रवीण चित्रवेल का जन्म पांच जून साल 2001 में हुआ था. वह तमिलनाडु के तंजावुर जिले में स्थित एक छोटे से गांव से आते हैं. शुरू-शुरू में उनके पिता दिहाड़ी मजदूरी करते थे. मगर परिवार का पालन पोषण फिर भी अच्छे से नहीं हो पाता था.

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प्रवीण चित्रवेल

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का रोमांच अपने चरम पर है. टूर्नामेंट का 10वां दिन जारी है. आज भी भारत की झोली में कई मेडल आए हैं जिसमें गोल्ड के साथ-साथ कई सिल्वर मेडल भी शामिल हैं. ट्रिपल जंप में आज भारतीय एथलीट प्रवीण चित्रवेल (Praveen Chithravel) के पास गोल्ड मेडल हासिल करने का सुनहरा मौका था. मगर वह सिल्वर मेडल तक ही पहुंच पाए. मगर यह उपलब्धि भी काफी बड़ी है. प्रवीण ने चौथे प्रयास में 16.58 मीटर का सर्वश्रेष्ठ जंप किया, जो उनका टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ जंप भी रहा. वहीं सेल्वा प्रभु थिरुमारन को ब्रॉन्ज मेडल से संतोष करना पड़ा. उनका टूर्नामेंट में सर्वश्रेष्ठ जंप 16.52 मीटर का रहा. 

शुरुआती तीन राउंड में पांचवें स्थान पर थे चित्रवेल 

शुरुआती तीन राउंड के समापन के बाद प्रवीण चित्रवेल पांचवें स्थान पर थे. बहुत कम उम्मीदें नजर आ रही थी कि वह मेडल जीत पाएंगे. पहले प्रयास में उन्होंने 16.05 मीटर की जंप लगाई थी. मगर तीसरे राउंड के बाद उन्होंने पूरा खेल ही बदल दिया. एक पल के लिए तो लग रहा था कि वह गोल्ड मेडल अपने नाम कर लेंगे. चौथे प्रयास में उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दिया और कुछ समय के लिए बढ़त बना ली थी. 

प्रवीण चित्रवेल के संघर्ष की कहानी 

प्रवीण चित्रवेल का जन्म पांच जून साल 2001 में हुआ था. वह तमिलनाडु के तंजावुर जिले में स्थित एक छोटे से गांव से आते हैं. शुरू-शुरू में उनके पिता दिहाड़ी मजदूरी करते थे. मगर परिवार का पालन पोषण फिर भी अच्छे से नहीं हो पाता था. जिसके बाद उन्होंने घर का खर्चा चलाने के लिए सुरक्षा गार्ड की नौकरी कर ली, लेकिन फिर भी परिवार की स्थिति जस की तस बनी रही. जिससे प्रवीण को भी करियर के शुरुआती दौर में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. 

कोच ने बदली प्रवीण की जिंदगी

प्रवीण की प्रतिभा को सबसे पहले चेन्नई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में उनके कोच इंदिरा सुरेश ने पहचाना. उनके खेल को देखते हुए उन्होंने ना केवल उनको प्रशिक्षण दिया, बल्कि व्यक्तिगत रूप से भी उन्हें सहायता प्रदान की. शुरूआत में प्रवीण को घुटने में बुरी तरह से चोट लग गई थी. इस दौरान उनके कोच ने उन्हें चोट से उबरने में काफी मदद की थी. 

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