Vinesh Phogat's coach Woller Akos in tears: विनेश फोगाट (Vinesh Phogat in Paris Olympics 2024) कुश्ती के मैट पर भी जीवट और जुझारूपन की नयी कहानी लिखते हुए ओलंपिक के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बन गई. हरियाणा की 29 वर्ष की विनेश ने क्यूबा की युसनेलिस गुजमैन लोपेज को 5 . 0 से हराकर पेरिस ओलंपिक में महिला कुश्ती स्पर्धा के 50 किलोवर्ग में स्वर्ण पदक जीतने की ओर कदम रख दिया. विनेश रियो ओलंपिक में चोटिल होकर स्ट्रेचर पर बाहर हुई थी और टोक्यो ओलंपिक में प्रदर्शन निराशाजनक रहा था. बता दें कि जैसे ही फोगाट ने सेमीफाइनल में जीत हासिल की वैसे, ही उनके कोच वोलर अकोस काफी इमोशनल हो गए. उनके आंखों से भी आंसू निकते हुए नजर आए. उनके चेहरे पर जो भाव नजर आए उसने भारतीयों का दिल जीत लिया. एक ओर जहां फोगाट जीत के बाद काफी इमोशनल दिखी तो उनके कोच भी अपने आंसू नहीं रोक पाए.
जीत के बाद फोगाट ने सबसे पहले कोच को गले से लगाया. दोनों की जज्बात देखने लायक होंगे. एक ओऱ जहां फोगाट ने भारत के लोगों का दिल जीत लिया तो वहीं, उनके कोच के इमोशनल ने भी भारतीयों के दिल में उनके लिए जगह बना ली. बता दें कि फोगाट के कोच हंगरी से ताल्लुक रखते हैं.
कोच वोलर अकोस कौन हैं (Who is Vinesh Phogat's coach Woller Akos)
साल 2018 से विनेश कोच वोलर अकोस से ट्रेनिंग ले रही थी. अकोस के ट्रेनिंग कैंप में जाकर विनेश ने काफी समय बिताया. बता दें कि फोगाट से पहले उन्होंने साल 2011 में अपनी वाइफ को विश्व चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल दिलाने में मदद की थी और जब वो फोगाट के संपर्क में आए तो उन्होंने सबसे पहले फोगाट के साथ उनकी मानसिकता पर काम किया. उनमें चैंपियन मानसिकता भरने के बाद उन्होंने एक ऐसी ट्रेनिंग रूटीन बनाने पर ध्यान केंद्रित किया, जो उन्हें सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने में मदद करे. हर छोटी-छोटी बात का ध्यान रखा गया और प्रतियोगिता को देखते हुए उसके हिसाब से ही ट्रेनिंग कराई गई. 2019 में विश्व चैंपियनशिप से पहले, उनके कोच ने उन्हें पूरे छह मिनट तक अपनी एकाग्रता के स्तर को कम न करने के लिए कहा था, क्योंकि उनका ध्यान लगातार बदलता रहता था. उन्होंने कोच के आदेश का पालन किया औरजिसका फायदा उन्हें पेरिस ओलंपिक में मिला.
अपनी तैयारियों के अंतिम चरण में, उन्होंने यूक्रेन और हंगरी के स्पैरिंग पार्टनर्स के साथ ट्रेनिंग किया था. जिसमें इरीना हुस्याक (यूरोपीय चैंपियन), सोफिया बोदनार (कैडेट यूरोपीय चैंपियन और यूक्रेनी राष्ट्रीय टीम के सदस्य), मर्सेडेज़ डेनेस (कैडेट यूरोपीय चैंपियन, जूनियर विश्व रजत पदक विजेता, यू 23 यूरोपीय पदक विजेता) शामिल थे.
साल 2021 में, वह शानदार फॉर्म में रही हैं, जहां उन्होंने माटेओ पेलिकोन रैंकिंग सीरीज़ इवेंट और पोलैंड ओपन में गोल्ड मेडल जीता. अब जिस अंदाज में फोगाट ने परफॉर्मेंस किया है उसे देखकर उम्मीद यही है कि वह ओलंपिक में इतिहास रचने में सफल रहेंगी और भारत को महिला पहलवानी में पहली बार गोल्ड मेडल दिलाने में सफल रहेंगी. अगर वो ऐसा करने में सफल रहती है तो यकीनन एक नया इतिहास लिखा जाएगा.
व्हाट्सएप के माध्यम से सिखाते थे बारीकियां
अकोस के मार्गदर्शन में, विनेश ने अपनी तकनीकों को निखारा, खास तौर पर अपने कम वजन वर्ग के कारण तेज़ हमलों के प्रति अपनी कमज़ोरी को दूर किया. अकोस का प्रभाव उनके अंदाज में स्पष्ट नजर आया था. विनेश के प्रदर्शन में नाटकीय रूप से सुधार हुआ, जिसके कारण मैड्रिड में स्पेनिश ग्रैंड प्रिक्स में उन्होंने गोल्ड मेडल जीतने में सफलता हासिल की थी. उनका यह कमाल एशियाई खेलों में भी जारी रहा, जहां उन्होंने एक और गोल्ड मेडल जीता था. यही नहीं अकोस शारीरिक रूप से विनेश के साथ मौजूद नहीं होने के बाद भी, उन्होंने व्हाट्सएप के माध्यम से फोगाट के साथ हमेशा संपर्क में रहे और उन्हें उनकी तकनीक को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दिए, जिसका फायदा उन्हें लगातार मिलता रहा .