Olympic Games Paris 2024: भारत की निशानेबाज मनु भाकर (Manu Bhaker) ने ओलंपिक शूटिंग में भारत का 12 साल का पदक का सूखा समाप्त करते हुए महिला 10 मीटर एयर पिस्टल शूटिंग में कांस्य पदक जीत लिया है. यह पेरिस ओलंपिक में भारत के लिए पहला पदक भी है. मनु भाकर ने 27 जुलाई को इस इवेंट में फाइनल में क्वालीफाई किया था. रविवार को उन्होंने फाइनल मैच में 221.7 अंक जुटाए. इस इवेंट का स्वर्ण और रजत पदक कोरिया के नाम रहा. कोरियाई खिलाड़ी ओह ये जिन ने 243.2 अंकों के साथ स्वर्ण पदक जीता. कोरिया की दूसरी खिलाड़ी किम येजी 241.3 अंकों के साथ रजत पदक अपने नाम करने में कामयाब रहीं. बता दें कि कांस्य पदक जीतने पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट शेयर किया, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बधाई देते हुए मनु भाकर के इस पदक को ऐतिहासिक करार दिया है.
प्रधानमंत्री ने अपने पोस्ट में लिखा, "एक ऐतिहासिक पदक! पेरिस ओलंपिक में भारत के लिए पहला पदक जीतने के लिए मनु भाकर को बधाई.. कांस्य पदक के लिए बधाई. यह सफलता और भी खास है क्योंकि वह भारत के लिए निशानेबाजी में पदक जीतने वाली पहली महिला बन गई हैं."
वहीं, हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने भी मनु को कांस्य पदक जीतने पर बधाई दी है. मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने अपने पोस्ट में लिखा, " आखिरकार वो सपना सच हुआ जिसकी उम्मीद पूरे देश को हरियाणा की धाकड़ बेटी मनु से थी. देश की नाज़ महिला शूटर मनु भाकर ने पेरिस में अपना दम दिखा दिया है।मनु भाकर ने पेरिस ओलंपिक में 10 मीटर महिला एयर पिस्टल इवेंट में देश के लिए कांस्य पदक जीता. 22 साल की मनु भाकर ने आज वो कर दिखाया है, जिस पर पूरे देश और हरियाणा प्रदेश को गर्व है। हर हरियाणवी का सीना आज गर्व से चौड़ा हो गया है।हरियाणा की दमदार और साहसी बेटी को बहुत-बहुत बधाई."
मनु ने आठ निशानेबाजों के फाइनल में 221.7 अंक के साथ तीसरे स्थान पर रहते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया. भारतीय निशानेबाज जब बाहर हुईं तो दक्षिण कोरिया की येजी किम से सिर्फ 0.1 अंक पीछे थीं जिन्होंने अंतत: 241.3 अंक के साथ रजत पदक जीता. किम की हमवतन ये जिन ओह ने 243.2 अंक के फाइनल के ओलंपिक रिकॉर्ड स्कोर के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया. लंदन ओलंपिक 2012 के बाद भारत का निशानेबाजी में यह पहला ओलंपिक पदक है। रियो ओलंपिक 2016 और तोक्यो ओलंपिक से भारतीय निशानेबाज खाली हाथ लौटे थे.














