Who is Asmita Dey: गाजियाबाद की दरोगा अस्मिता डे ने जीता गोल्ड, बोलीं- CM योगी ने नौकरी दी, तभी यहां तक पहुंच पाई

Who is Asmita Dey: अस्मिता डे कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय बनीं, उन्होंने फ़ाइनल में कनाडा की हेइडी क्वाच को हराया.

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Asmita Dey wins gold in CWG 2026

Ghaziabad Sub-Inspector Asmita Dey interview: गाजियाबाद की दरोगा अस्मिता डे ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में गोल्ड मेडल जीता. उन्होंने जूडो में कनाडा की खिलाड़ी को मात दी. अस्मिता डे त्रिपुरा की रहने वाली हैं, यूपी पुलिस में सब-इंस्पेक्टर हैं. गोल्ड जीतने के बाद अस्मिता डे ने कहा- "मैं यूपी पुलिस में हूं,  मैं सीएम योगी जी का धन्यवाद करना चाहती हूं, क्योंकि उन्होंने मुझे यूपी पुलिस में नौकरी दी. इस नौकरी से मुझे सहारा मिला. इसी की बदौलत मैं यहां तक पहुंची और गोल्ड मेडल जीत सकी".

"अपने पिता की साइकिल रिपेयर की दुकान से लेकर ग्लासगो में पोडियम के टॉप तक, अस्मिता डे का सफर तेजी से और उम्मीद से कहीं ज्यादा प्रेरणादायक रहा है. अभी वह 20 साल की उम्र के शुरुआती दौर में हैं और उनका साफ मकसद ओलंपिक मेडल जीतना है, ऐसा लगता है कि उनका सफर तो बस अभी शुरू ही हुआ है. जिस लड़की ने कभी कॉम्बैट स्पोर्ट्स के बारे में सोचे बिना 800 मीटर की दौड़ लगाई थी, उसी लड़की ने जूडो मैट पर भारतीय खेल इतिहास का एक नया अध्याय लिखा है".

दरअसल, कुछ कहानियां सिर्फ मेडल जीतने की नहीं होतीं, बल्कि उन सपनों की होती हैं जो तमाम मुश्किलों के बावजूद हार नहीं मानते. ऐसी ही कहानी है अस्मिता डे की.  अस्मिता डे ने कभी जूडोका बनने की योजना नहीं बनाई थी. यह खेल उन्हें लगभग संयोग से मिला. आज, त्रिपुरा की रहने वाली 23 वर्षीय अस्मिता, ग्लासगो 2026 में अपनी ऐतिहासिक जीत के बाद जूडो में कॉमनवेल्थ गेम्स का गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय बन गई हैं.

रनिंग ट्रैक से जूडो मैट तक

22 मार्च 2003 को त्रिपुरा के बेलोनिया में जन्मीं अस्मिता तीन भाई-बहनों के साथ एक साधारण परिवार में पली-बढ़ीं. उनके पिता, अर्जुन कुमार डे, साइकिल ठीक करके गुजारा करते थे. खेल की दुनिया में उनकी एंट्री दौड़ने से हुई. उन्होंने 800 मीटर दौड़ में हिस्सा लिया और जिला-स्तर के ट्रायल्स तक पहुंचीं. एक कोच के जरिए जूडो से हुई मुलाकात ने सब कुछ बदल दिया. जो चीज एक ट्रायल सेशन के तौर पर शुरू हुई थी, वह धीरे-धीरे उनका मुख्य रास्ता बन गई. 

उनकी शुरुआती ट्रेनिंग बेलोनिया विद्यापीठ कोचिंग सेंटर में कोच बीना देबनाथ की देखरेख में हुई. बाद में वह माणिक लाल देब के अंडर त्रिपुरा स्पोर्ट्स स्कूल चली गईं. स्कूल प्रतियोगिताओं और खेलो इंडिया सर्किट में शानदार प्रदर्शन की वजह से उन्हें 2018 में भोपाल स्थित स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया के रीजनल सेंटर में जगह मिली. वहां, अनुभवी कोच यशपाल सोलंकी ने उन्हें नेशनल सेटअप और 'टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम' के डेवलपमेंट ग्रुप तक पहुंचने में मदद की. 

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इंटरनेशनल लेवल पर लगातार आगे बढ़ना

अस्मिता डे भारतीय जूडो खिलाड़ी अवतार सिंह और जापानी स्टार उटा आबे को अपना आदर्श मानती हैं,  इन खिलाड़ियों ने उनके खेल के नजरिए को आकार देने में मदद की. साल 2022 में, वह थाईलैंड में हुई एशियन कैडेट और जूनियर जूडो प्रतियोगिता में इंटरनेशनल मेडल जीतने वाली त्रिपुरा की पहली जूडो खिलाड़ी बनीं. अगले साल उन्होंने मकाऊ में जूनियर एशिया कप में महिलाओं के -48 किग्रा कैटेगरी में गोल्ड और कुवैत में एशियन ओपन में सिल्वर मेडल जीता. 2025 में मोरक्को में कैसाब्लांका अफ्रीकन ओपन में गोल्ड जीतकर उन्होंने अपना पहला सीनियर इंटरनेशनल खिताब जीता. 2026 एशियन सीनियर चैंपियनशिप में पांचवें स्थान पर रहने से यह साबित हुआ कि वह एशिया के बेहतरीन खिलाड़ियों का मुकाबला कर सकती हैं.

देश में, उन्होंने खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में कई गोल्ड मेडल जीते और 2023-24 में जूनियर नेशनल चैंपियन बनीं. हर जीत ने उनमें बिना किसी दिखावे के एक शांत आत्मविश्वास भरा.

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ग्लासगो में ऐतिहासिक गोल्ड

ग्लासगो की उस रात का कोई मुकाबला नहीं था. महिलाओं के -48 किग्रा डिवीन में खेलते हुए, अस्मिता डे क्वार्टर-फ़ाइनल में स्कॉटलैंड की ईवा इविंग को 'इप्पोन' से हराकर और सेमी-फाइनल में एक और घरेलू खिलाड़ी समर शॉ को हराकर फ़ाइनल में पहुंचीं. गोल्ड-मेडल मुकाबले में उनका सामना कनाडा की हेइडी क्वाच से हुआ. एक समय पीछे रहने के बावजूद वह शांत रहीं, मुकाबले को 'गोल्डन स्कोर' तक ले गईं और निर्णायक 'थ्रो' करके भारत के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स जूडो का पहला गोल्ड मेडल जीता.

अस्मिता डे को सीएम योगी आदित्यनाथ ने दी बधाई

गोल्ड मेडल जीतने पर अस्मिता डे  को यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर बधाई दी है. उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, "ग्लासगो  राष्ट्रमंडल खेलों 2026 में महिलाओं के 48 किलोग्राम भारवर्ग की जूडो प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक अर्जित कर वैश्विक पटल पर मां भारती को गौरवभूषित करने वाली उत्तर प्रदेश में उप निरीक्षक सुश्री अस्मिता डे को हार्दिक बधाई. देश की बेटियों के अदम्य साहस, अनुशासन, संकल्प और परिश्रम की प्रेरक प्रतीक इस स्वर्णिम उपलब्धि पर प्रत्येक भारत वासी को गर्व है. अस्मिता डे की स्वर्णिम सफलता की यह यात्रा अविराम चलती रहे, यही मंगलकामना है."

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