ग्लास्गो 'हैंडओवर' समारोह में अहमदाबाद को सौंपी जाएगी मेजबानी, भारत में खेला जाएगा कॉमनवेल्थ गेम्स का 24वां सीजन

कॉमनवेल्थ गेम्स के 23वां सीजन अपने आखिरी दौर में है. चार साल बाद 24वां सीजन भारत के अहमदाबाद में खेला जाएगा. रविवार को आधिकारिक तौर पर 2030 राष्ट्रमंडल खेलों के लिए भारत को बैटन और राष्ट्रमंडल खेलों का ध्वज सौंपा जाएगा.

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ग्लास्गो 'हैंडओवर' समारोह में अहमदाबाद को सौंपी जाएगी मेजबानी

अहमदाबाद रविवार को आधिकारिक रूप से 2030 राष्ट्रमंडल खेलों के मेजबान शहर के रूप में अपने सफर की शुरुआत करेगा जब ग्लास्गो में 2026 राष्ट्रमंडल खेलों के समापन समारोह के दौरान मेजबान ‘बैटन' और राष्ट्रमंडल खेलों का ध्वज अहमदाबाद को सौंपा जाएगा. अधिकारियों ने शनिवार (एक अगस्त 2026) को यह जानकारी दी. एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया, 'रविवार को ग्लास्गो में राष्ट्रमंडल खेल 2026 के समापन समारोह के दौरान मेजबान ‘बैटन' और राष्ट्रमंडल खेलों का ध्वज औपचारिक रूप से अहमदाबाद को सौंपा जाएगा.'

अहमदाबाद में 2030 में आयोजित होने वाले राष्ट्रमंडल खेल इस प्रतियोगिता के शताब्दी खेल भी होंगे. राष्ट्रमंडल खेलों का पहला चरण 1930 में कनाडा के हैमिल्टन में आयोजित हुआ था. गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी इन दिनों ग्लास्गो में चल रहे राष्ट्रमंडल खेलों में मौजूद हैं और समापन समारोह में भी शामिल होंगे. इस दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुति के जरिए अहमदाबाद का अगले मेजबान शहर के रूप में स्वागत किया जाएगा. विज्ञप्ति के अनुसार ‘हैंडओवर' समारोह को तीन भागों में प्रस्तुत किया जाएगा. 

पहले भाग में ‘वंदे मातरम्' की 150वीं वर्षगांठ को समर्पित प्रस्तुति होगी. इसके बाद भारतीय सितार वादक ऋषभ रिखीराम शर्मा और स्कॉटलैंड के बैगपाइप वादक रॉस ऐसंली के बीच शास्त्रीय जुगलबंदी होगी. अंतिम प्रस्तुति में गुजरात पर विशेष फोकस के साथ भारत की सांस्कृतिक विविधता की झलक दिखाई जाएगी.

राष्ट्रमंडल खेलों की प्रमुख परंपराओं में शामिल ‘किंग्स बैटन रिले' 74 राष्ट्रमंडल देशों और क्षेत्रों की विविधता का उत्सव मनाती है. पहली बार प्रत्येक राष्ट्रमंडल देश और क्षेत्र को अपना अलग ‘बैटन' दी गई है, ताकि वे उसे अपनी संस्कृति और रचनात्मकता के अनुरूप डिजाइन कर सकें.

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प्रत्येक बैटन में ब्रिटेन के महाराजा चार्ल्स तृतीय के संदेश का एक हिस्सा शामिल है. बैटन लेकर चलने के लिए उन लोगों का चयन किया जाता है जिन्होंने समाज में उल्लेखनीय योगदान दिया हो. बैटन रिले की परंपरा 1958 में कार्डिफ से शुरू हुई थी.

ग्लास्गो 2026 की मुख्य मार्केंटिंग और समारोह अधिकारी लुइसा माहोन ने कहा, 'यह ‘हैंडओवर' केवल औपचारिकता नहीं है. यह कार्यक्रम एक ही मंच पर दो देशों की भावना को अभिव्यक्त करेगा. सितार और बैगपाइप की अनूठी जुगलबंदी होगी जिसमें ‘वंदे मातरम'का उत्सव भी शामिल रहेगा.'

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उन्होंने कहा कि ग्लास्गो के दर्शकों को अहमदाबाद 2030 की पहली झलक भी देखने को मिलेगी. भारत के ‘हैंडओवर' समारोह की निदेशक चंदा सिंह ने कहा कि इस कार्यक्रम को ऐसे भारत की झलक दिखाने के लिए तैयार किया गया है जो आत्मविश्वासी होने के साथ-साथ अपनी परंपराओं से भी गहराई से जुड़ा हुआ है.

उन्होंने कहा कि अहमदाबाद 2030 राष्ट्रमंडल खेलों के 100 वर्ष पूरे होने का उत्सव होगा और यह ‘हैंडओवर' समारोह उसी ऐतिहासिक यात्रा का पहला अध्याय है.

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