- मुंबई में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की गंभीर कमी ने हॉस्पिटलिटी सेक्टर को प्रभावित कर आर्थिक संकट पैदा किया है
- बांद्रा और माटुंगा के होटल गैस की भारी कमी के कारण कामकाज बंद करने की स्थिति में पहुंच गए हैं
- मुंबई के हॉस्पिटलिटी सेक्टर के हजारों कर्मचारी रोजगार संकट का सामना कर रहे हैं और फूड कल्चर खतरे में है
मुंबई, जिसे हम 'कभी न सोने वाला शहर' कहते हैं, आज एक ऐसे संकट से जूझ रहा है जिसने यहाँ के स्वाद और रफ़्तार दोनों को रोक दिया है. यह संकट मांग की कमी का नहीं, बल्कि ईंधन का है. कमर्शियल एलपीजी (LPG) सिलेंडरों की भारी किल्लत ने शहर के हॉस्पिटलिटी सेक्टर को घुटनों पर ला दिया है. बांद्रा की पॉश गलियों से लेकर माटुंगा के पारंपरिक कोनों तक, अब बर्तनों की खनक की जगह सन्नाटा और गिरते हुए शटरों की आवाज़ सुनाई दे रही है.
बांद्रा से माटुंगा तक बेबसी का मंजर
बांद्रा के परेवा होटल की स्थिति इस संकट की गंभीरता को बयां करती है. होटल के मालिक ने बताया कि वे फिलहाल "उधार के वक्त" पर काम चला रहे हैं. आज की रसोई सिर्फ इसलिए चल पाई क्योंकि उन्होंने किसी दूसरे होटल से आधा बचा हुआ सिलेंडर मांगकर काम चलाया. कल के लिए उनके पास कोई स्टॉक नहीं है और ब्लैक मार्केट में भी गैस गायब है. मालिक का कहना है कि अगर जल्द ही चूल्हा नहीं जला, तो उनके कर्मचारियों की नौकरियां जा सकती हैं, क्योंकि उनके पास काम जारी रखने का कोई दूसरा विकल्प मौजूद नहीं है.
यही हाल माटुंगा के मशहूर राम आश्रय होटल का है. दक्षिण भारतीय व्यंजनों के इस केंद्र में पिछले तीन दिनों से संघर्ष चल रहा था, लेकिन आज आखिरकार वहां की आंच बुझ गई. डोसा और मेदु वडा जैसे पकवान, जिन्हें लगातार गैस की आंच की जरूरत होती है, अब नहीं बन पा रहे हैं. मैनेजर ने भारी मन से बताया कि उनके पास ग्राहकों को वापस भेजने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है और जब तक सप्लाई बहाल नहीं होती, होटल बंद रहेगा.
डिस्ट्रीब्यूटर का धर्मसंकट - प्राथमिकता की जंग
गैस डिस्ट्रीब्यूटर चेतन मोदी के अनुसार, यह समस्या बहुत गहरी है. मुंबई के सभी 90 डिस्ट्रीब्यूटर्स को सख्त निर्देश मिले हैं कि वे पहले घरेलू रसोई को प्राथमिकता दें. जहां घरों के लिए ओटीपी के जरिए गैस मिल रही है, वहीं कमर्शियल सेक्टर के लिए इन्वेंट्री पूरी तरह खत्म हो चुकी है. मोदी ने चेतावनी दी है कि यह दोहरी मार है एक तरफ रेस्टोरेंट ग्राहक खो रहे हैं, तो दूसरी तरफ डिस्ट्रीब्यूटर्स को भी भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है क्योंकि उनके पास बेचने के लिए माल ही नहीं है.
आंकड़ों में तबाही - AHAR की गंभीर चेतावनी
इंडियन होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन (AHAR) ने जो आंकड़े पेश किए हैं, वे डराने वाले हैं. संगठन के मुताबिक
मंगलवार को: मुंबई के 20% होटल प्रभावित थे.
बुधवार (आज): यह संख्या बढ़कर 50% हो गई है, जहां कई जगहों पर मेन्यू छोटा कर दिया गया है.
गुरुवार की आशंका: अनुमान है कि कल तक मुंबई के 70% रेस्टोरेंट अस्थाई रूप से बंद हो सकते हैं.
अंधेरी के सदगुरु होटल जैसे कई ठिकानों ने बाहर नोटिस लगा दिया है कि 'गैस की कमी के कारण ऑर्डर सीमित रहेंगे'. अब ग्राहक अपनी पसंद का खाना नहीं, बल्कि वही खा पा रहे हैं जो कम ईंधन में तैयार हो सके.
हॉस्पिटलिटी सेक्टर मुंबई की अर्थव्यवस्था और रोजगार का एक बड़ा हिस्सा है. शेफ से लेकर डिलीवरी पार्टनर्स तक, हजारों लोगों की रोजी-रोटी इस नीली लौ पर निर्भर है. अगर सरकार और तेल कंपनियों ने जल्द ही कमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति सामान्य नहीं की, तो मुंबई की यह मशहूर 'फूड कल्चर' लंबे समय के लिए ठंडी पड़ सकती है. फिलहाल, पूरा शहर बस एक उम्मीद की 'चिंगारी' का इंतजार कर रहा है.
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