पाकिस्तान की जेल से आखिरकार रिहा हुआ बालाघाट का बेटा, 5 साल से परिजन कर रहे थे इंतजार 

MP News: लंबे इंतजार के बाद पाकिस्तान की जेल में बंद बालाघाट के बेटे की रिहाई हो गई है. इसके बाद जिला प्रशासन के सहयोग से परिजन अमृतसर रवाना हो गए हैं. 

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Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के खैरलांजी की रहने वाली एक बहन की खुशी का उस समय ठिकाना नहीं रहा जब उसे 5 साल पहले बिछड़े भाई के पाकिस्तान जेल से रिहा होने और अमृतसर के एक अस्पताल में होने की जानकारी मिली. इसके बाद जिला प्रशासन की मदद से बहन अमृतसर के लिए रवाना हुई. 

बहन संघमित्रा को खैरलांजी थाने से सूचना मिली कि 31 जनवरी को पाकिस्तान से सात भारतीय कैदियों की रिहाई हुई है. जिन्हें अटारी-वाघा बॉर्डर से लाया गया. इनमें से 6 पंजाब मूल के है और एक मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले का है. उसका नाम प्रसन्नजीत रंगारी है, जो बीते 5 साल से पाकिस्तान की जेल में सुनील अदे के नाम से बंद था, अब वह भी रिहा हो चुका है.इस खबर के बाद संघमित्रा की खुशी का ठिकाना ही न रहा. 

साल 2021 को वह खेती किसानी के लिए गया था. इस बीच वह  सीमा को पार कर पाकिस्तान चला गया था. इस एक गलती की वजह से उसे पाकिस्तान की जेल में बंद कर दिया गया था. जानकारी मिलने के बाद उनकी बहन संघमित्रा भाई के वतन वापसी के लिए कई जतन कर रही थी. अब आखिरकार उनका भाई पाकिस्तान से रिहा हो गया. 

प्रसन्नजीत की रिहाई इतनी आसान न थी. दरअसल वह सालों से अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर लगाती तो कभी नेताओं के दरवाजों को खटखटाती. आखिरकार 01 फरवरी को प्रसन्नजीत की रिहाई की खबर उन्हें खैरलांजी पुलिस स्टेशन से मिली. 

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कलेक्टर ने की मदद 

इसके बाद उन्हें लगातार अमृतसर के थाने से फोन आने लगे और उन्हें जल्दी ही वापस लाने की बात करने लगे. लेकिन भाई प्रसन्नजीत को लाने के लिए उसके पास पर्याप्त रुपए ना होने से फिर चिंता से घिर गई.ऐसे में जिला कलेक्टर मृणाल मीना ने प्रशासन की ओर से वाहन की व्यवस्था करवाई और प्रसन्नजीत के परिजन, एक पंचायत कर्मी और पुलिस जवान को साथ लेकर अमृतसर के लिए रवाना हो गए. 

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