कैसे चुना जाएगा मुंबई का नया महापौर, लॉटरी सिस्टम से लेकर जानिए सबकुछ

बीएमसी के अपना नया मेयर इस महीने के अंत तक मिलने की उम्मीद है. मेयर के लिए आरक्षण वाली लॉटरी से लेकर समीकरणों का पूरा ख्याल रखा जाएगा.

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मुंबई को कब मिलेगा नया मेयर?
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  • बीएमसी में जनवरी के अंत तक नए मेयर का हो सकेगा चुनाव
  • चुनाव से पहले लॉटरी सिस्टम और फिर पूरे समीकरणों का रखा जाएगा ख्याल
  • महायुति ने बीएमसी चुनाव में करीब तीन दशक से सत्ता में काबिज शिवसेना को सत्ता से उखाड़ फेंका है
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मुंबई:

मुंबई का अगला महापौर कौन बनेगा. इस पर फैसला जनवरी के अंत तक होगा. गौरतलब है कि बीएमसी चुनावों में महायुति ने बड़ी जीत दर्ज की है. इस जीत के साथ ही बीजेपी ने बीएमसी में पिछले करीब तीन दशक से सत्ता में रही उद्धव ठाकरे की शिवसेना को बेदखल कर दिया है. बीजेपी ने बीएमसी में 89 सीटों पर जीत दर्ज की है. शिवसेना (उद्धव) ने 65 वार्ड पर कब्जा किया है. एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने 29 वार्ड पर जीत दर्ज की है. वहीं,  कांग्रेस ने 24 वार्डों में जीतकर अपनी मौजूदगी दर्ज करवाई है. AIMIM को 8, मनसे को 6, NCP को 3, SP को 2 और NCP (SP) को 1 वार्ड मिला है.

क्या होता है लॉटरी सिस्टम?

सूत्रों के मुताबिक अब महायुति महापौर बनाने की प्रक्रिया में जुट गई है. हालांकि, अभी इस पर सस्पेंस जारी है और इसके इस महीने के अंत तक खत्म होने की उम्मीद है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, अगले सप्ताह नगर विकास विभाग महापौर पद के लिए आरक्षण की लॉटरी निकालेगा. इस प्रक्रिया के पूरा होने के ठीक दस दिन बाद महापौर का चुनाव संपन्न कराया जाएगा. इस देरी के कारण अब यह स्पष्ट है कि जनवरी महीने के आखिरी दिनों में ही मुंबई को अपना नया महापौर मिल पाएगा.

महापौर चयन की प्रक्रिया

सबसे पहले नगर विकास विभाग द्वारा लॉटरी के जरिए यह तय किया जाता है कि महापौर का पद किस वर्ग (जैसे- सामान्य, महिला, पिछड़ा वर्ग, आदि) के लिए आरक्षित होगा. इसके बाद, योग्य उम्मीदवार अपना नामांकन दाखिल करते हैं. BMC के निर्वाचित पार्षद एक विशेष सभा में मतदान करते हैं. जिस उम्मीदवार को सदन में बहुमत (कुल पार्षदों का आधा से अधिक) प्राप्त होता है, उसे महापौर चुना जाता है. यदि किसी दल को स्पष्ट बहुमत न हो, तो गठबंधन की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है. वर्तमान राजनीतिक समीकरणों और बीएमसी चुनाव के नतीजों के बीच मेयर पद को लेकर दिख रही खींचतान में टूट या दलबदल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता!