अजित पवार के निधन के बाद नीरा नदी के किनारे क्या करने गए थे शरद पवार, क्या है उनकी यात्रा का संदेश

भतीजे अजित पवार के निधन के बाद एनसीपी के दोनों धड़ों के एकीकरण की चर्चा फिर तेज हो गई है. इस बीच शरद पवार की बारामती में नीरा नदी के किनारे की यात्रा से कई राजनीतिक संदेश निकल रहे हैं. क्या हैं वो संकेत बता रहे हैं जीतेंद्र दीक्षित.

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मुंबई:

महाराष्ट्र की राजनीति में दृश्यों के जरिए राजनीतिक नैरेटिव गढ़ने में शरद पवार जैसी महारत बहुत ही कम लोगों के पास है. कहा जाता है कि एक तस्वीर एक हजार शब्दों की कहानी कहती है. 80 साल के हो चुके शरद पवार इसके सबसे अच्छे जानकार हैं. पवार ने अपने पांच दशक लंबी राजनीतिक पारी में बयानबाजी की जगह दृश्यों के जरिए लोगों की राय बनाने का काम किया है. पिछले हफ्ते एक प्लेन क्रैश में भतीजे और एनसीपी प्रमुख अजित पवार की मौत के बाद उन्होंने एक बार फिर अपनी चिर-परिचित राजनीतिक शैली का प्रदर्शन किया है. 

नीरा नदी के किनारे क्यों गए थे शरद पवार

महाराष्ट्र के 29 नगर निकायों में हाल में कराए गए चुनाव में शरद पवार अधिकांश समय पर्दे के पीछे ही रहे. खराब स्वास्थ्य के कारण उन्होंने अपनी पार्टी एनसीपी (एसपी) के चुनाव प्रचार से दूरी बनाए रखी. वो टीवी पर तब ही नजर आए जब बारामती में अजित पवार के निधन की खबर आई. उम्मीद की जा रही थी कि दुख की इस घड़ी में वो अपने परिजनों के साथ खड़े रहेंगे. लेकिन वो नीरा नदी के किनारे टहलते हुए नजर आए. उनके इस कदम ने राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया. 

पवार वहां प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखने गए थे. पवार ने नदी की खराब हालत पर खुलकर नाराजगी जताई. उन्होंने तत्काल सुधार के कदम उठाने की मांग की. जो लोग इस मामले से परिचित नहीं थे, उनको शोक की इस घड़ी में पर्यावरण संरक्षण की इतनी चिंता करना थोड़ा अटपटा लग सकता था. लेकिन पवार की राजनीतिक शैली को गहराई से जानने-समझने वालों के लिए इसका संदेश साफ था.

शरद पवार के भतीजे अजित पवार को पिछले दिनों एक प्लेन क्रैश में निधन हो गया था.

शरद पवार और अजित पवार ने दशकों तक बारामती की सेवा की. उन्होंने बारामती की धरती पर कदम रखकर वहां के लोगों को यह संकेत दिया कि जिला अनाथ नहीं हुआ है. पवार का नीरा नदी के किनारे जाना एक सुनियोजित कदम था. राज्य की राजनीतिक मशीनरी के लिए भी यह एक संदेश था कि शरद पवार अभी भी सक्रिय, प्रासंगिक और अपने भतीजे की मृत्यु के बाद होने वाले बदलावों में निर्णायक भूमिका निभाने में पूरी तरह सक्षम हैं.

शरद पवार की राजनीतिक शैली क्या है

यह वह रणनीति है, जिसे पवार ने अपने शुरुआती सालों से निखारा है. 1990 के दशक में रक्षा मंत्री के रूप में उन्होंने अरब सागर में 'जैकस्टे' अभ्यास में भाग लिया था. इसमें वे दो चलते हुए युद्धपोतों के बीच एक रस्सी से लटके हुए नजर आए थे. उस अभ्यास की तस्वीरों में सिर्फ एक मंत्री को लाइफ जैकेट पहने हुए नहीं दिखाया गया था, बल्कि उन्होंने एक ऐसे नेता की छवि पेश की थी जो सशस्त्र बलों की जमीनी हकीकतों को समझने के लिए दिल्ली के आरामदायक दफ्तर को छोड़ आता है. 

शरद पवार ने 2019 में सतारा में आयोजित एक चुनावी रैली को बारिश में भीगते हुए संबोधित किया था. उनके इस भाषण ने एनसीपी को मजबूत करने का काम किया था.

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साल 2019 के चुनाव में उनका बारिश में भीगते हुए भाषण देना, शायद उनकी आज के समय की सबसे यादगार तस्वीर है. 80 साल की उम्र में पवार ने बारिश में भीगते हुए चुनावी रैली को संबोधित किया था. उनके इस भाषण ने दलबदल से जूझ रही उनकी पार्टी पर आए अस्तित्व के संकट को भी भावनात्मक सहानुभूति की लहर में बदल दिया था. उस एक दृश्य ने राजनीतिक हवा को बदल दिया था. इससे एनसीपी को मजबूती मिली और अंततः महा विकास अघाड़ी का गठन हुआ.

और अब, जब राज्य में अजित पवार के निधन के नतीजों और एनसीपी के दोनों धड़ों के फिर से एक होने की चर्चाएं हैं, ऐसे समय में शरद पवार की नीरा नदी की यात्रा उनके एक चिर-परिचित अंदाज के रूप में सामने आती है. महाराष्ट्र के जटिल राजनीतिक परिदृश्य में, एनसीपी के इस वरिष्ठ नेता ने यह साफ कर दिया है कि वो अभी भी खेल के एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी हैं. 

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