कल्याण–डोंबिवली महानगरपालिका (KDMC) में स्थानीय स्तर पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) द्वारा लिए गए फैसले को लेकर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे नाराज बताए जा रहे हैं. सूत्रों के अनुसार, मनसे के इस कदम से न केवल विपक्षी एकजुटता को झटका लगा है, बल्कि स्थानीय राजनीति में नई खींचतान भी शुरू हो गई है. कल्याण–डोंबिवली महानगरपालिका में शिवसेना (उद्धव गुट) के कुल 11 नवनिर्वाचित नगरसेवक हैं. इनमें से 4 नगरसेवक (not reachable) फिलहाल संपर्क में नहीं हैं और उनके एकनाथ शिंदे की शिवसेना के संपर्क में होने की चर्चा है. इस सियासी उठापटक के बीच शेष 7 नगरसेवकों ने बुधवार को मातोश्री पहुंचकर उद्धव ठाकरे से मुलाकात की और मौजूदा हालात पर खुलकर चर्चा की.
नगरसेवकों की बैठक में उद्धव ठाकरे का स्पष्ट संदेश
मातोश्री पर हुई इस अहम बैठक में उद्धव ठाकरे ने नगरसेवकों को साफ शब्दों में कहा कि किसी भी प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय पार्टी स्तर पर ही लिया जाएगा. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल कल्याण–डोंबिवली महानगरपालिका में शिवसेना (UBT) विपक्ष की भूमिका निभाएगी.
सूत्रों के मुताबिक, बैठक के दौरान नगरसेवकों ने यह चिंता जाहिर की कि उन्हें दोनों गुटों की ओर से लगातार संपर्क और अलग-अलग प्रस्ताव मिल रहे हैं. ऐसे में आगे की रणनीति को लेकर उन्होंने पार्टी नेतृत्व से मार्गदर्शन मांगा.
“आपको अलग-थलग नहीं किया जाएगा” – उद्धव ठाकरे
नगरसेवकों की आशंकाओं को दूर करते हुए उद्धव ठाकरे ने उन्हें भरोसा दिलाया कि पार्टी उन्हें कहीं भी अकेला या अलग-थलग नहीं छोड़ेगी. उन्होंने कहा कि भविष्य की चिंता करने की जरूरत नहीं है, पार्टी उनके साथ मजबूती से खड़ी रहेगी. उद्धव ठाकरे ने यह भी आश्वासन दिया कि विपक्ष में रहते हुए भी नगरसेवकों को सम्मानजनक और प्रभावी भूमिका दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे.
मनसे के फैसले पर नाराज़गी
बैठक के दौरान उद्धव ठाकरे ने स्थानीय मनसे नेताओं के फैसले पर खुलकर नाराज़गी जताई. उन्होंने कहा कि ऐसा निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए था. ठाकरे के मुताबिक, अगर मनसे और शिवसेना (UBT) के सभी नगरसेवक एकजुट रहते, तो कल्याण–डोंबिवली महानगरपालिका में एक मजबूत और प्रभावी विपक्षी गुट खड़ा किया जा सकता था.
आने वाले दिनों में बढ़ेगा राजनीतिक तापमान
कल्याण–डोंबिवली में चल रही यह सियासी खींचतान आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत दे रही है. एक ओर जहां सत्तापक्ष अपनी संख्या मजबूत करने की कोशिश में जुटा है, वहीं उद्धव ठाकरे विपक्ष में रहते हुए भी संगठन को टूटने से बचाने और नगरसेवकों को साथ बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रहे हैं.
स्थानीय राजनीति पर नजर रखने वालों का मानना है कि आने वाले कुछ दिन KDMC की राजनीति के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं.














