- शिवसेना 22 वर्षों बाद पहली बार अपने आंतरिक चुनाव संविधान के अनुसार डिजिटल और प्रत्यक्ष मतदान से करवा रही है.
- चुनाव सात चरणों में पूरे महाराष्ट्र के जिलों में होंगे, जिसमें सभी पदों के लिए चुनाव होगी.
- चुनाव में शिवसेना के प्रमुख नेता और महाराष्ट्र के डिप्टी CM एकनाथ शिंदे भी मुख्य नेता पद के लिए उतरेंगे.
एशिया के सबसे अमीर नगर निगम BMC सहित महाराष्ट्र के कई शहरों में हाल ही में हुए चुनाव में जीत के बाद अब शिवसेना फिर से एक चुनाव में उतरने जा रहा है. इस चुनाव में शिवसेना के प्रमुख नेता और महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे भी मैदान में उतरेंगे. खास बात यह है कि यह चुनाव 22 साल बाद हो रहा है. ऐसे में इसे महाराष्ट्र और शिवसेना को जानने वाले लोग ऐतिहासिक बता रहे हैं. दरअसल शिवसेना आंतरिक चुनाव कराने जा रहा है. यह चुनाव साल 2003 के बाद पहली बार पार्टी के संविधान के अनुसार होने जा रहा है. सूत्रों के अनुसार, यह चुनाव डिजिटल और प्रत्यक्ष मतदान, दोनों तरीकों से सात चरणों में संपन्न होंगे.
इस प्रक्रिया में शिवसेना सदस्यों के मतदान के आधार पर गुट प्रमुख-शाखा प्रमुख, शाखा समन्वयक-विभाग प्रमुख, विभाग प्रमुख-जिला संपर्क प्रमुख, जिला प्रमुख-शिवसेना उपनेता, युवासेना-महिला अघाड़ी, स्थानीय लोकाधिकार समिति सहित अन्य संबंधित संगठनों और शिवसेना उपनेता से शिवसेना मुख्य नेता पद का चयन किया जाएगा.
इस पूरी प्रक्रिया की रिपोर्ट चुनाव आयोग को दी जाएगी
महीने के अंत से शुरू होने वाली यह प्रक्रिया हर जिले में प्रत्येक पद के लिए होगी, ताकि कहीं भी कोई गोपनीयता न रहे और किसी का नेतृत्व थोपने की कोशिश न की जाए. खास बात यह है कि स्वयं एकनाथ शिंदे को भी अपने 'मुख्य नेता' पद के लिए चुनाव का सामना करना होगा. इस पूरी प्रक्रिया की रिपोर्ट चुनाव आयोग को सौंपी जाएगी. 2003 के बाद, एकनाथ शिंदे इस चुनाव प्रक्रिया के जरिए पार्टी के दूसरे आधिकारिक मुख्य नेता बनेंगे.
5 प्वाइंट में जानें शिवसेना में जानें
- 2003 की चुनाव प्रक्रिया में बालासाहेब ठाकरे को सर्वसम्मति से 'पक्ष प्रमुख' नियुक्त किया गया था. बाद में 2013 में, उद्धव ठाकरे ने बदलाव करते हुए सभी अधिकार अपने पास ले लिए थे.
- साथ ही, 'शिवसेना प्रमुख' पद स्वीकार न करते हुए उन्होंने अपने लिए 'शिवसेना पक्ष प्रमुख' का नया पद स्थापित किया था. हालांकि, उस समय चुनाव प्रक्रिया के बजाय बहुमत के आधार पर इसकी घोषणा की गई थी, जिसका पार्टी के संविधान में प्रावधान नहीं है.
- सूत्रों के अनुसार, लगभग 22 वर्षों के बाद शिवसेना में यह आंतरिक चुनाव प्रक्रिया अपनाई जा रही है, जो इस महीने के अंत तक सभी जिलों और अन्य राज्यों में भी लागू की जाएगी.
- अभी जो आंतरिक चुनाव की बात हो रही है, वो एकनाथ शिंदे वाली शिवसेना के संगठन के अंदर हो रही है, यह चुनाव इसलिए कराया जा रहा है ताकि शिंदे गुट चुनाव आयोग को यह साबित कर सके कि उनकी पार्टी पूरी तरह से लोकतांत्रिक तरीके से चल रही है और संविधान के नियमों का पालन कर रही है.
- चुनाव आयोग ने पहले ही एकनाथ शिंदे के गुट को असली शिवसेना मानते हुए 'धनुष-बाण' चिन्ह और 'शिवसेना' नाम आवंटित कर दिया है. वहीं, उद्धव ठाकरे के गुट को शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नाम और मशाल चिन्ह मिला है. ये दोनों अब दो अलग राजनीतिक दल के रूप में काम कर रहे हैं.













