- मीरा रोड के नयानगर चाकूबाजी मामले में आरोपी जुबैर अंसारी ISIS से जुड़ने की कोशिश कर रहा था
- जुबैर ने अपने घर के गेट पर कुरान की सूरा अल-इखलास की आयत वाला स्टिकर लगाया था जिसमें प्रवेश की शर्तें बताई थीं
- जुबैर चार महीने से डार्क वेब और एन्क्रिप्टेड प्लेटफार्म के जरिए ISIS से संपर्क की कोशिश कर रहा था
मुंबई के मीरा रोड इलाके में हुए नयानगर चाकूबाजी केस में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाली बातें सामने आ रही हैं. पहले खुलासा हुआ कि आरोपी जुबैर अंसारी के आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) से जुड़ना चाहता था. अब उसके घर के एंट्री गेट की एक तस्वीर सामने आई है, जिससे उसके कट्टरपंथी सोच का पता चलता है. उसने घर के एंट्री गेट पर एक स्टीकर लगाया हुआ था. इस पर लिखा था,'कुल हू अल्लाह हू अहद'. दरअसल यह कुरान के 112वें अध्याय, सूरा अल-इखलास (Surah Al-Ikhlas) की पहली आयत है. इसका मतलब है "कह दो, वह अल्लाह एक है". यह सूरा अल्लाह की एकता (तौहीद) और सर्वोच्चता को बताती है.
कुरान की इस आयत को गेट पर लगाने का मतलब समझें
हैरान करने वाली बात यह है कि कुरान की आयत वाला स्टिकर आरोपी जुबैर ने सिर्फ धर्म में निष्ठा रखने की वजह से नहीं लगाया था. बल्कि यह उसकी कट्टरपंथी सोच को उजागर करने वाला है. उसने गेट पर लगाए इस स्टिकर पर लिखा था कि कुरान की इस आयत को पहले बिस्मिल्लाह कहो, सलाम करो और तब जाकर घर के अंदर घुसने की परमिशन मिलेगी. मतलब यह कि घर के अंदर आना है तो पहले ये बातें माननी ही होंगी.
ISIS से जुड़ना चाहता था जुबैर
आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) से जुड़ने की उसकी मंशा का खुलासा तो पहले ही हो चुका है. जब आतंकी संगठन से उसका संपर्क नहीं हो पाया तो उसने खुद ही ‘लोन वुल्फ' हमला करने का फैसला कर लिया.महाराष्ट्र एटीएस की पूछताछ में कई बातों का खुलासा हुआ है. जांच एजेंसियों सूत्रों के मुताबिक, अंसारी पिछले करीब चार महीने से डार्क वेब और एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म के जरिए ISIS तक पहुंचने की कोशिश में जुटा हुआ था. बार-बार कोशिशों के बावजूद उसे कोई जवाब नहीं मिला. इसके बाद उसने सोचा कि अगर वह खुद हमला करेगा, तो शायद संगठन का ध्यान उसकी तरफ चला जाए.
ये भी पढ़ें-NDTV EXCLUSIVE: कलमा नहीं पढ़ा तो मार दिया चाकू, मीरारोड कांड का वीडियो आया -गिड़गिड़ाता दिखा पीड़ित
आरोपी जुबैर की कट्टरपंथी सोच
आरोपी जुबैर के घर से एक हाथ से लिखा खत भी मिला है, जिसमें उसने ISIS के प्रति निष्ठा (बैअत) जताई थी और संगठन का झंडा भी बनाया था. इस नोट में भड़काऊ बातें लिखी गई थीं. नोट में गैर-मुस्लिमों को निशाना बनाने की चेतावनी दी गई थी और “लोन वुल्फ” हमलों का जिक्र किया गया था.
अपने नोट में उसने ‘गाजा', ‘खिलाफत' और ‘जिहाद' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए दूसरे युवाओं को भी इस रास्ते पर चलने के लिए उकसाने की कोशिश की थी. साथ ही उसने खुद को “घुरबा” यानी समाज से अलग-थलग और अकेला बताया. हैरानी की बात यह है कि जुबैर कोई अनपड़ शख्स नहीं है. वह साइंस ग्रेजुएट है और कई साल अमेरिका में रह चुका है. उसका परिवार तो अब भी वहां रहता है. नौकरी नहीं मिलने की वजह से वह कुछ साल पहले भारत लौट आया और मीरा रोड पर अकेले रहने लगा. यहां वह ऑनलाइन केमिस्ट्री की क्लासेस लेता था और नौकरी की तलाश में था.













