महाराष्ट्र: रिक्शा‑टैक्सी चालकों को सिखाई जाएगी मराठी, सरकार की मदद करेंगे साहित्यकार

महाराष्ट्र में रिक्शा, टैक्सी और ऐप‑आधारित सेवाओं से जुड़े अमराठी चालकों को मराठी सिखाने की पहल शुरू हुई है. राज्य सरकार ने यात्रियों और चालकों के बीच संवाद बेहतर करने के लिए यह कदम उठाया है. इस अभियान में मराठी साहित्यकार और साहित्यिक संस्थाएं भी सरकार की मदद करेंगी.

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Auto Taxi Drivers Marathi Teaching: महाराष्ट्र में अब यात्रियों और रिक्शा‑टैक्सी चालकों के बीच भाषा की दूरी कम करने की पहल शुरू हो गई है. राज्य सरकार ने फैसला लिया है कि रिक्शा, टैक्सी और ऐप‑आधारित सेवाओं (ओला, उबर, ई‑बाइक टैक्सी) से जुड़े अमराठी चालकों को मराठी में बुनियादी बातचीत आनी चाहिए. इस फैसले को जमीन पर उतारने के लिए सरकार के साथ‑साथ मराठी साहित्यकार और साहित्यिक संस्थाएं भी आगे आ गई हैं. उद्देश्य साफ है कि यात्री को राहत और मराठी भाषा को सम्मान.

मराठी संवाद को लेकर सरकार की पहल

परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक की मौजूदगी में हाल ही में एक अहम बैठक हुई, जिसमें प्रशासनिक अधिकारियों के साथ भाषा विशेषज्ञ और साहित्यकार शामिल हुए. इस बैठक में तय किया गया कि अमराठी वाहनचालकों को रोज़मर्रा की जरूरतों से जुड़ी सरल और व्यवहारिक मराठी सिखाई जाएगी, ताकि वे यात्रियों से आसानी से संवाद कर सकें.

साहित्यिक संस्थाओं ने उठाई जिम्मेदारी

इस मुहिम में कई प्रतिष्ठित मराठी साहित्यिक संस्थाओं ने सहयोग का भरोसा दिया है. कोकण मराठी साहित्य परिषद ने अपनी 72 शाखाओं के जरिए अलग‑अलग इलाकों में प्रशिक्षण कक्षाएं शुरू करने की योजना बनाई है. वहीं मुंबई मराठी साहित्य संघ ने ऑनलाइन माध्यम से हज़ारों स्वयंसेवी शिक्षकों के जरिए मराठी सिखाने की पेशकश की है. खास बात यह है कि यह पूरा प्रशिक्षण निःशुल्क होगा.

क्यों महसूस हुई इस फैसले की जरूरत?

महाराष्ट्र में बड़ी संख्या में दूसरे राज्यों से आए वाहनचालक काम कर रहे हैं. इनमें से कई मराठी भाषा से परिचित नहीं होते, जिसकी वजह से यात्रियों को अक्सर परेशानी होती है. सरकार का मानना है कि भाषा की यह दूरी खत्म होने से न सिर्फ यात्रियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि चालकों का काम भी आसान होगा.

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जांच अभियान और समझाइश

मंत्री सरनाईक ने बताया कि महाराष्ट्र दिवस के मौके पर राज्यभर में रिक्शा और टैक्सी चालकों के लाइसेंस की विशेष जांच की जाएगी. इस दौरान यह देखा जाएगा कि चालक को मराठी की बुनियादी समझ है या नहीं. हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि यह अभियान किसी तरह की सख्ती के लिए नहीं, बल्कि समझाइश और प्रशिक्षण के उद्देश्य से होगा.

मराठी को ‘अभिजात भाषा' मिलने के बाद बढ़ा महत्व

हाल ही में मराठी भाषा को ‘अभिजात भाषा' का दर्जा मिला है. इसके बाद इस अभियान को और भी अहम माना जा रहा है. सरकार चाहती है कि अमराठी चालक मराठी को सिर्फ एक नियम के तौर पर नहीं, बल्कि सम्मान और अपनत्व के साथ सीखें.

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वरिष्ठ साहित्यकारों का मार्गदर्शन

इस पूरी पहल को मजबूत बनाने के लिए कई वरिष्ठ साहित्यकारों का मार्गदर्शन भी मिल रहा है. इनमें महेश केळुसकर, संतोष राणे, अशोक बागवे, बाळ कांदळकर, सुनील तांबे, शिवाजी गावडे, सतीश सोळांकुरकर, अरुण म्हात्रे, एकनाथ आव्हाड, प्रसाद कुलकर्णी, अशोक चिटणीस, अनुपमा उजगरे, दीपा ठाणेकर और मनीषा राजपूत जैसे नाम शामिल हैं.

सरकार का साफ संदेश

परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक का कहना है कि यह फैसला किसी पर दबाव डालने के लिए नहीं है, बल्कि मराठी भाषा के सम्मान और बेहतर जनसंपर्क की दिशा में उठाया गया कदम है. इससे यात्रियों को सहूलियत मिलेगी और महाराष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान को भी नई मजबूती मिलेगी.

संजय निरुपम ने मराठी अनिवार्यता पर विचार करने की दी सलाह

शिवसेना नेता संजय निरुपम ने रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य करने के महाराष्ट्र सरकार के फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है. उन्होंने परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक को पत्र लिखकर कहा कि 1 मई से लागू होने वाला यह निर्णय हजारों मेहनतकश चालकों के बीच भय और असुरक्षा पैदा कर रहा है. निरुपम ने मुंबई की बहुसांस्कृतिक पहचान का हवाला देते हुए कहा कि ज्यादातर चालक अन्य राज्यों से हैं और इस फैसले से उनके रोजगार पर असर पड़ सकता है. उन्होंने कामचलाऊ मराठी जानने वालों को छूट देने और भाषा परीक्षा का फैसला वापस लेने की अपील की है.

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