- सांगली में बच्ची ने एक लोहे का हुक निगल लिया था, जान पर आई आफत
- बच्ची के माता-पिता पहले प्राइवेट अस्पताल गए थे, लेकिन वहां पैसों के कारण इलाज नहीं हो पाया
- फिर सरकारी अस्पताल के डॉक्टर्स ने बिना ऑपरेशन बच्ची के गले से हुक निकाल लिया
डॉक्टर्स को भगवान क्यों कहते हैं महाराष्ट्र के सांगली में ये फिर से साबित हो गया. एक सरकारी अस्पताल के डॉक्टर्स ने गरीब माता-पिता के लिए भगवान बनकर आए. दरअसल, महाराष्ट्र में सांगली जिले के मिरज में 6 वर्षीय मासूम बच्ची स्फूर्ति शुभम सोकटे ने खेलते समय गलती से शो पीस का एक बड़ा एस आकार का लोहे का हुक निगल लिया था.
ये टुकड़ा जो उसकी फूड पाइप में जाकर फंस गया था. इस घटना के बाद स्फूर्ति के माता-पिता काफी परेशान हो गए और वो अस्पतालों के चक्कर लगाने लगे.
स्फूर्ति के माता-पिता एक निजी अस्पताल गए. वहां उनसे इसके लिए 3 लाख रुपये मांगे गए. यही नहीं, डॉक्टर्स ने बच्ची की जान को खतरा भी बताया था. लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उसे मिरज के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया.
यहां सर्जन डॉ. प्रशांत दोरकर और उनकी टीम ने बिना किसी किसी सर्जरी के, एंडोस्कोपी प्रक्रिया के जरिए उस हुक को सुरक्षित बाहर निकाल लिया. बच्ची अब खतरे से बाहर है, जिसके बाद परिजनों ने सरकारी अस्पताल और डॉक्टरों का आभार व्यक्त किया है. गौरतलब है कि डॉक्टर्स ने पहले बच्ची का एक्सरे निकाला. हुक जहां फंसा था उसका ठीक से जानकारी ली.
इसके बाद डॉक्टर दोरकर ने अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए बच्ची की जान बचा ली. पैसे नहीं होने के कारण सरकारी अस्पताल में पहुंचे माता-पिता को सरकारी अस्पताल ने बड़ी खुशी दी. बच्ची अभी कुछ दिन डॉक्टर्स की निगरानी में रहेगी इसके बाद उसकी दिनचर्या सामान्य हो जाएगी.














