- हिंगोली में दसवीं कक्षा की एक नाबालिग छात्रा ने अपनी शादी रुकवाने के लिए प्रिंसिपल को पत्र लिखा
- छात्रा की शादी उसके परिवार ने पंद्रह वर्ष की उम्र में पच्चीस वर्ष के युवक से तय कर दी थी
- छात्रा की पढ़ाई जारी रखने की इच्छा और प्रिंसिपल की तत्परता ने इस बाल विवाह को टालने में मदद की
महाराष्ट्र के हिंगोली में एक 10वीं कक्षा की नाबालिग छात्रा की शादी करवाई जा रही थी. लेकिन वो तो पढ़ना चाहती थी. मां-बाप भले ही बेटी के हाथ पीले कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ना चाहते थे, लेकिन बच्ची की मंशा ये नहीं थी. वह समझ ही नहीं पा रही थी कि आखिर करे तो क्या करे. फिर उसे एक रास्ता सूझा. उसने अपनी पढ़ाई जारी रखने की खातिर शादी रुकवाने के लिए प्रिंसिपल को पत्र लिख दिया. उसकी ये तरकीब काम भी आ गई.
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10वीं में पढ़ने वाली 15 साल की छात्रा की शादी उसके परिजनों ने एक 25 साल के युवक से तय कर दी थी. जिसके बाद उसने प्रिंसिपल से मदद की गुहार लगाते हुए लिखा, "सर, मैं पढ़ना चाहती हूं, मेरी शादी रुकवा दीजिए." फिर क्या था, प्रिंसिपल बच्ची की मदद के लिए तुरंत आगे आए.
प्रिंसिपल की मुस्तैदी और प्रशासन की सक्रियता से महिला और बाल विकास विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर परिवार की काउंसलिंग की और इस बाल विवाह को सफलतापूर्वक रुकवा दिया.
लड़की ने यह हिम्मत हिंगोली डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन की तरफ से गांवों में चाइल्ड मैरिज रोकने और पढ़ाई-लिखाई के प्रति लगाव को लेकर चलाए जा रहे जागरूकता अभियान की वजह से दिखाई है. लड़की के लेटर लिखने की हिम्मत और प्रिंसिपल की मुस्तैदी की वजह से हिंगोली में एक नाबालिग की शादी रुक गई.













