- गुजरात HC ने मोटेरा इलाके में आसाराम आश्रम की 45000 वर्ग मीटर से अधिक जमीन वापस लेने की अनुमति दी है
- जमीन नरेंद्र मोदी स्टेडियम और सरदार पटेल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के पास स्थित है और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है
- राज्य सरकार ने कोर्ट में बताया कि जमीन धार्मिक कार्यों के लिए थी, लेकिन आश्रम ने अवैध कब्जा और निर्माण किया था
अहमदाबाद: गुजरात हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में राज्य सरकार को अहमदाबाद के मोटेरा इलाके में स्थित आसाराम आश्रम के कब्जे वाली 45,000 वर्ग मीटर से अधिक की जमीन वापस लेने की अनुमति दे दी है. कोर्ट ने सरकार के उस फैसले को सही ठहराया है जिसमें इस कीमती सार्वजनिक भूमि को दोबारा सरकारी नियंत्रण में लेने की बात कही गई थी.
खेल विकास और शहरी विस्तार के लिए मास्टरस्ट्रोक
यह जमीन अहमदाबाद के सबसे रणनीतिक और वीवीआईपी क्षेत्र में स्थित है. यह विवादित जमीन दुनिया के सबसे बड़े नरेंद्र मोदी स्टेडियम और सरदार पटेल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के बिल्कुल पास स्थित है. अहमदाबाद कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 की मेजबानी की तैयारी कर रहा है. साथ ही, भविष्य में ओलंपिक आयोजन की संभावनाओं को देखते हुए यह क्षेत्र खेल और शहरी विकास का मुख्य केंद्र बनने वाला है.
सरकार की दलीलें: धार्मिक उपयोग से अतिक्रमण तक
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के समक्ष ठोस सबूत पेश किए. सरकार की दलीलें मुख्य रूप से इन तथ्यों पर आधारित थीं. दशकों पहले यह जमीन केवल धार्मिक कार्यों के लिए दी गई थी. आश्रम प्रबंधन ने तय शर्तों का उल्लंघन करते हुए निर्धारित दायरे से बाहर जमीन पर अनधिकृत कब्जा किया. सरकारी जमीन पर अवैध रूप से पक्के निर्माण किए गए जो कानूनन गलत थे.
AMC ने भी दिया था बड़ा झटका
इससे पहले, अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (AMC) ने भी आश्रम को राहत देने से इनकार कर दिया था. आश्रम प्रबंधन ने परिसर के भीतर बनी 30 से ज्यादा अवैध संरचनाओं को नियमित (Regularize) करने की अपील की थी, जिसे AMC ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि इतने संवेदनशील क्षेत्र में अवैध निर्माण को वैध नहीं ठहराया जा सकता.
अहमदाबाद के भविष्य को मिलेगी नई दिशा
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद वर्षों से चल रहा कानूनी विवाद अब समाप्त होने की दिशा में है. राज्य सरकार अब इस विशाल भूखंड का उपयोग निम्नलिखित कार्यों के लिए कर सकती है.
- अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाओं का निर्माण.
- शहर के बढ़ते बोझ को कम करने के लिए नई टाउनशिप या पब्लिक पार्क.
- 2036 ओलंपिक की दावेदारी के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार.














