- उद्धव ठाकरे की शिवसेना बीएमसी चुनाव में ढाई दशक बाद सत्ता से बाहर
- बीएमसी चुनाव में शिवसेना हारी भले हो लेकिन उसका प्रदर्शन खराब नहीं रहा है
- बीएमसी चुनाव में राज ठाकरे पूरी तरह से हाशिए पर चले गए हैं
भले ही उद्धव ठाकरे बीजेपी की मजबूत चुनौती के सामने BMC चुनाव में मात खा गए हों, लेकिन इस परिणाम के बाद भी बतौर नेता शिवसेना लीडर कमजोर नहीं दिख रहे हैं. शिवसेना बीएमसी चुनाव में अकेले 71 सीटों पर आगे हैं. उनकी पार्टी ने एकनाथ शिंदे की शिवसेना को भी एकतरफ हटा दिया है. हालांकि, शिंदे ने मुंबई में कई सीटों पर अच्छी बढ़त बनाई है लेकिन वो देश की आर्थिक राजधानी में ठाकरे की सत्ता को उतनी चुनौती नहीं दे पाए. उद्धव मुंबई में मराठी मानुस के निर्विवाद चेहरा बन गए हैं.
उद्धव ने दी मजबूत चुनौती
महाविकास अघाड़ी की साझेदार शिवसेना का साथ छोड़कर कांग्रेस ने बीएमसी में अकेले चुनाव लड़ने का फैसला कर लिया. इस घटना के बाद उद्धव और राज ठाकरे ने मिलकर अपने आधार वोट को जोड़ा और एक मजबूत चुनौती दी. शिवसेना के किले में मराठी मानुस ने उद्धव ठाकरे की शिवसेना में अपना भरोसा जताया. यही वजह रही कि उद्धव की पार्टी ने यहां अच्छा प्रदर्शन किया.
BMC की सत्ता जाना झटका
हां, बीएमसी की सत्ता गंवाना शिवसेना (उद्धव) के लिए एक बड़ा झटका है. शुरुआत से ही बीएमसी शिवसेना के लिए सत्ता का प्रमुख केंद्र रही है. शिवसेना हमेशा से बीएमसी पर कंट्रोल रखती थी और सहयोगियों के साथ साझेदारी की ये उसकी मुख्य मांग होती थी.
उद्धव के सामने नहीं टिके शिंदे
एकनाथ शिंदे भले ही कई पार्षदों को लेकर उद्धव का साथ छोड़ गए लेकिन इस चुनाव में शिवसेना नेता ने ये साफ कर दिया कि जब बात मुंबई की आती है तो उद्धव ठाकरे ही इस लीगेसी को थामते हैं. ये लीगेसी उन्हें अपने पिता बाल ठाकरे से मिली थी.
मुंबई में उद्धव की शिवसेना का अच्छा प्रदर्शन
मुंबई में विपक्षी चेहरे की जब बात आ रही है तो. यहां निर्विवाद रूप से उद्धव ही सामने हैं. क्योंकि एकनाथ शिंदे की शिवसेना उद्धव की शिवसेना से बहुत कम सीट जीतती दिख रही है. वहीं कांग्रेस का यहां पूरी तरह से सफाया हो गया है. ऐसे में उद्धव निर्विवाद विपक्ष बन चुके हैं.
दो ध्रुवीय होगा मुकाबला?
इन नतीजों ने ये बात साफ कर दी कि मुंबई में शिवसेना (उद्धव) और बीजेपी के बीच दो ध्रुवीय मुकाबले की राह तैयार हो गई है. शिवसेना (उद्धव) बीजेपी के कट्टर हिंदुत्ववादी विचारधारा के विपरित अधिक समावेशी हिंदुत्व वाली राजनीति करने का दावा कर रही है.
हाशिए पर गए राज
राज ठाकरे मुंबई की राजनीति में अब पूरी तरह से हाशिए पर चले गए हैं. अब उद्धव के सामने बड़ी चुनौती अपने पार्टी के विस्तार की है. उद्धव ने मी मुंबईकर जैसे कैंपेन पहले भी चला चुके हैं. वो शिवसेना का विस्तार मुंबई शहर के बाहर भी कर सकते हैं.
उद्धव कैसे बढ़ाएंगे वोट बैंक
मराठी और मुस्लिम फैक्टर: मुंबई में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद खराब रहा है और ये निचले स्तर तक पहुंच चुका है. अब उद्धव ठाकरे अपने वोट बैंक को बढ़ाने की तरफ देख रहे होंगे. इसका एक तरीका मुस्लिम वोटों को भी जोड़ना हो सकता है.














