- भारत को अंग्रेजों से आजादी के लिए 14 और 15 अगस्त की दो तारीखें मिली थी.
- भारत ने आजादी के जश्न के लिए 15 अगस्त का दिन चुना और आधी रात को ध्वजारोहण किया.
- उज्जैन के ज्योतिषी के इसके लिए शुभ मुहूर्त निकाला था. 14 अगस्त का दिन क्यों नहीं चुना गया?
भारत की आजादी के लिए 15 अगस्त की तारीख और आधी रात का समय कैसे तय हुआ? 80वें स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले आजादी की तारीख से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प पहलू सामने आया है, जिसे बहुत कम लोग जानते हैं. दरअसल, आजादी के जश्न के लिए 15 अगस्त का दिन 'शुभ मुहूर्त' देखकर तय किया गया था. देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के कहने पर उज्जैन के पद्मभूषण पंडित सूर्यनारायण व्यास ने यह ऐतिहासिक मुहूर्त निकाला था. 14 अगस्त का दिन नहीं चुनने के पीछे एक बड़ा कारण था.
14-15 अगस्त की दो तारीखों में एक को चुनना था
1946 में देश की आजादी तय होने के बाद डॉ. राजेंद्र प्रसाद (जो ज्योतिष में गहरा विश्वास रखते थे) ने अपने भरोसेमंद गोस्वामी गणेश दत्त महाराज के जरिए विख्यात क्रांतिकारी, ज्योतिषी और लेखक पंडित व्यास को दिल्ली बुलाया. उन्होंने बताया कि अंग्रेजों से आजादी के लिए 14 और 15 अगस्त की दो तारीखें मिली हैं. जब उन्होंने पूछा कि ज्योतिषीय गणना के अनुसार भारत को किस दिन पहला स्वतंत्रता दिवस मनाना चाहिए, तब पंडित व्यास ने पंचांग देखकर बताया कि 14 अगस्त को कुंडली में लग्न (पहला स्थान) अस्थिर है, इसलिए 15 अगस्त का दिन ही सर्वथा उपयुक्त रहेगा.
why india got independence 15 august astrologer muhurat: देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने पंडित सूर्यनारायण व्यास को ये पत्र लिखा था.
आधी रात को किया गया पहला ध्वजारोहण
पंडित व्यास के पुत्र, दूरदर्शन के पूर्व महानिदेशक व लेखक राजशेखर व्यास ने बताया कि मुहूर्त निकलने के बाद पंडित व्यास ने डॉ. प्रसाद से कहा कि चूंकि आजादी का समय आधी रात का बन रहा है, इसलिए इसी समय ध्वजारोहण कर स्वतंत्रता के औपचारिक कार्यक्रम सुबह आयोजित किए जाएं. नतीजतन, पंडित जवाहरलाल नेहरू ने उनकी बात मानते हुए आधी रात को लाल किले पर ध्वजारोहण किया. पंडित व्यास की सलाह पर ही रात में संसद भवन को धोकर उसका शुद्धिकरण भी किया गया था.
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1930 में ही कर दी थी आजादी की भविष्यवाणी
पंडित व्यास के संबंध में लिखी किताबों के अनुसार, 1902 में जन्मे पंडित सूर्यनारायण व्यास 1921 से ही स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय हो गए थे. उन्होंने 1930 में ही भविष्यवाणी कर दी थी कि भारत अगस्त 1947 में आजाद होगा और डॉ. राजेंद्र प्रसाद राष्ट्रपति बनेंगे. 1952 में कार्यकाल समाप्त होने पर पंडित व्यास ने पुनः बताया कि वे दूसरी बार भी राष्ट्रपति चुने जाएंगे, जो बात सच साबित हुई. इसके बाद डॉ. प्रसाद ने पं. व्यास को पत्र भी लिखा था, जिसमें उन्होंने स्वीकार किया था कि आपने जो कहा था वही हुआ.
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क्यों हमेशा अस्थिर रहता है पाकिस्तान?
पंडित व्यास ने मुहूर्त देखते समय चेतावनी दी थी कि 14 अगस्त को पाकिस्तान बना तो वह हमेशा अस्थिर रहेगा, क्योंकि उस दिन मेष लग्न और गुरु की शत्रु स्थान पर स्थिति देश को अस्थिर रखेगी. मोहम्मद अली जिन्ना ने पंचांग और मुहूर्त को मूहर्त नहीं मानते थे. इसलिए उन्होंने पाकिस्तान की आजादी के लिए 14 अगस्त का दिन चुना, आज यह देश किस हालत में यह सबको पता है. हालांकि, जिन्ना की पत्नी रतनबाई पं. व्यास को मानती थीं, लेकिन 1929 में ही उनका निधन हो गया था.
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