तहसील कार्यालय का चपरासी निकला ड्रग सप्लायर! सूरजपुर में 560 नशीली गोलियां और कैप्सूल जब्त, कार से करता था सप्लाई

Surajpur News: छत्तीसगढ़ के सूरजपुर में आबकारी विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक कार सवार युवक को 560 एल्प्राजोलम टेबलेट और 48 स्पास्मो प्रोक्सीवन कैप्सूल के साथ गिरफ्तार किया है. आरोपी विश्रामपुर तहसील कार्यालय में चपरासी बताया जा रहा है.

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छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत आबकारी विभाग को बड़ी सफलता मिली है. उड़नदस्ता टीम ने घेराबंदी कर एक कार सवार युवक को भारी मात्रा में नशीली दवाओं के साथ गिरफ्तार किया.

गश्त के दौरान टीम को मुखबिर से सूचना मिली थी कि अभिषेक साहू, जो विश्रामपुर तहसील कार्यालय में चपरासी है, अपनी कार से तिलसिंवा ग्राउंड के पास नशीले इंजेक्शन और दवाओं की सप्लाई करने वाला है. 

कार की तलाशी में मिला भारी जखीरा

सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंची और संदिग्ध वाहन की घेराबंदी कर तलाशी ली. तलाशी के दौरान कार से बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित दवाएं बरामद हुईं. आरोपी के पास से 560 पीस एल्प्राजोलम टेबलेट और 48 नग स्पास्मो प्रोक्सीवन कैप्सूल जप्त किए गए. बरामद दवाओं की अनुमानित कीमत करीब 40 हजार रुपए बताई जा रही है.

NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज

उड़नदस्ता आबकारी अधिकारी रंजीत गुप्ता (सरगुजा) ने बताया कि आरोपी के खिलाफ NDPS एक्‍ट के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है. आरोपी को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है. 

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NDPS Act क्या होता है?

NDPS Act का पूरा नाम है Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act, 1985. यह भारत सरकार द्वारा बनाया गया एक सख्त कानून है, जिसका उद्देश्य नशीले पदार्थों की खेती, उत्पादन, बिक्री, खरीद, परिवहन, भंडारण और सेवन पर नियंत्रण करना है.

यह कानून क्यों बनाया गया?

देश में बढ़ते ड्रग्स कारोबार और नशे की लत पर रोक लगाने के लिए वर्ष 1985 में यह कानून लागू किया गया. इसके तहत अवैध मादक पदार्थों के व्यापार पर कड़ी सजा का प्रावधान है.

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किन पदार्थों पर लागू होता है?

इस कानून के तहत अफीम, गांजा, हेरोइन, कोकीन, एलएसडी, एल्प्राजोलम जैसी मनोदैहिक दवाएं और अन्य प्रतिबंधित नशीले पदार्थ आते हैं.

सजा का प्रावधान क्या है?

  • NDPS Act के तहत सजा मात्रा और अपराध की प्रकृति पर निर्भर करती है:
  • छोटी मात्रा (Small Quantity): 1 साल तक की सजा या जुर्माना या दोनों.
  • मध्यम मात्रा: 10 साल तक की सजा और जुर्माना.
  • व्यावसायिक मात्रा (Commercial Quantity): 10 से 20 साल तक की सख्त सजा और भारी जुर्माना.
  • कुछ मामलों में जमानत मिलना भी कठिन होता है, क्योंकि यह गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में आता है.

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