Vivekanand Tiwari: दादा अंग्रेजों की पुलिस में रहे, खुद SI बनने से चूके; निलंबित कांस्टेबल विवेकानंद की कहानी

शहडोल यातायात शाखा से निलंबित प्रधान आरक्षक विवेकानंद तिवारी का परिवार दशकों से पुलिस में रहकर लोगों की सेवा कर रहा है. कांस्टेबल बनने से पहले विवेकानंद तिवारी ने यूपी पुलिस का एग्जाम दिया था, लेकिन वे 2 नबंर कम होने से फाइनल लिस्ट से बाहर हो गए थे.

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शहडोल के निलंबित ट्रैफिक कांस्टेबल विवेकानंद तिवारी ने NDTV से साझा की अपनी कहानी.

मध्य प्रदेश पुलिस की शहडोल यातायात शाखा में प्रधान आरक्षक पद से निलंबित विवेकानंद तिवारी नौकरी से इस्तीफ देने के बाद से सुर्खियों में हैं. बिना वर्दी के उनका जो वीडियो सामने आया, उसने करोड़ों लोगों ने देखा. पुलिस की वर्दी में अपने सरल-सभ्य व्यवहार और ट्रैफिक ज्ञान को लेकर जाने जाने वाले निलंबित हेड कांस्टेबल विवेकानंद तिवारी के परिवार का पुलिस विभाग से गहरा रिश्ता है, उनके दादा जी के दो भाई अंग्रेजों के जमाने की पुलिस में रहे हैं. परिवार के 6 सदस्य पुलिस विभाग में हैं. साल 2011 में विवेकानंद तिवारी डेढ़-दो नंबर से नहीं चूकते तो वे यूपी पुलिस में सब-इंस्पेक्टर या इंस्पेक्टर तो होते ही. 

NDTV से बातचीत में निलंबित हेड कांस्टेबल विवेकानंद तिवारी ने बताया कि '12-13 साल की नौकरी में पहली बार सात दिन की मेडिकल लीव मांगी थी, वो भी मुझे नहीं दी गई. मुझे नींद नहीं आने की समस्या हो रही थी, इसके बाद भी मेरा आवेदन मंजूर नहीं किया गया. सब कुछ बताने के बाद भी मुझे गैर-हाजिर बताया गया और फिर उसे संस्पेंड कर दिया गया. मेरी छवि को धूमिल करने का प्रयास किया गया. मेरी मानसिक स्थित इतनी खराब थी कि मुझे लगा कि या तो मैं खुद को खत्म कर लूं या फिर नौकरी, इसलिए मैंने इस्तीफा देने का फैसला लिया'. आइए, अब विस्तार से जानते कि विवेकानंद तिवारी की कहानी क्या है. 

निलंबित हेड कांस्टेबल विवेकानंद तिवारी मूल रूप से मध्य प्रदेश के रीवा जिले के चाकघाट थाना क्षेत्र में पड़िवार गांव के रहने वाले हैं. उनके पिता राजेंद्र प्रसाद तिवारी किसान हैं और मां ज्ञानवती तिवारी गृहणी हैं. चार बहनों में विवेकानंद तिवारी इकलौते भाई हैं. वंदना तिवारी उनकी पत्नी हैं और वे दो बेटियों वेदिता और वंदिता के पिता हैं. सोशल मीडिया पर उनके करोड़ों फोलोअर हैं. 

वंदना पोस्ट ग्रेजुएट हैं और अपने पति विवेकानंद के सभी अकाउंट संभालती हैं. इसे लेकर विवेकानंद मजाकिया लहजे में कहते हैं- 'ड्यूटी के बाद मैं अपनी पत्नी के इशारों पर नाचता था. ऑन-ड्यूटी रहते हुए मैंने कभी कोई वीडियो शूट नहीं किया. इसके मेरे पास सारे सबूत हैं. 

पत्नी वंदना तिवारी और दोनों बेटियों के साथ निलंबित कांस्टेबल विवेकानंद तिवारी. (फोटो- vivekanandtiwarithetrafficcop)

जबलपुर में चाचा-चाची के पास रहकर की पढ़ाई 

NDTV से बातचीत में विवेकानंद तिवारी कहते हैं- मेरे परिवार का शुरू से ही पुलिस विभाग से गहरा नाता रहा है, परिवार के छह सदस्य पुलिस में हैं. मेरे दादाजी (पितामह) के दो भाई अंग्रेजों के जमाने की पुलिस में रहे हैं. ऐसे में मेरे मन भी हमेशा से पुलिस में जाकर लोगों की सेवा करने की लगन थी. जबलपुर में चाचा-चाची के साथ स्कूलिंग की और फिर गवर्नमेंट मॉडल साइंस कॉलेज जबलपुर से बीएससी की डिग्री ली. इस दौरान पुलिस भर्ती की तैयारी भी जारी रही. 

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विवेकानंद एसआई बनने से कैसे रह गए? 

यूपी पुलिस सब-इंस्पेक्टर 2011 की भर्ती में विवेकानंद तिवारी ने आवेदन किया. प्रीलिम्स, फिजिकल, मेन्स क्लिअर कर इंटरव्यू तक पहुंचे, लेकिन फाइनल लिस्ट में डेढ़-दो नंबर से चूक गए. साल 2012 में एमपी पुलिस भर्ती का एग्जाम दिया और आरक्षक के पद पर चयनियत हो गए. 2013 में   पुलिस प्रशिक्षण शाला पंचमढ़ी में ट्रेनिंग पूरी करने के बाद पहली पोस्टिंग शहडोल ट्रैफिक थाना (यातायात शाखा) में मिली.  ट्रैफिक पुलिस से शुरुआत हुई तो जॉब के साथ-साथ इससे संबंधित कई कोर्स भी किए. 

सस्पेंड किए जाने के बाद ट्रैफिक कांस्टेबल विवेकानंद तिवारी ने दे दिया है इस्तीफा. (फोटो- vivekanandtiwarithetrafficcop)

कैसे शुरू हुआ सोशल मीडिया का सफर? 

सोशल मीडिया के सफर की शुरुआत को लेकर विवेकानंद तिवारी बताते हैं कि कोरोना के बाद साल 2022 का समय था. शहडोल में नए-नए ट्रैफिक सिंग्नल लगे थे. लोग ट्रैफिक रूल्स का पालन नहीं करते थे. उन्होंने लोगों को समझाना शुरू किया. लोगों को रोककर उनसे बात की, नियम बताए. डांस करते हुए ट्रैफिक कंट्रोल किया. इसका असर दिखने लगा, लोग मुझे समझने लगे, मेरी बात मानने लगे. फिर ये सब मेरी आदत में आ गया. लोग मुझे पहचानने लगे, कहीं भी मिलने पर मुझे बात करते. इस दौरान कई लोगों ने मुझसे कहा कि 'आप यातायात नियम बताते ही है तो उसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर बनाएं. इससे देशभर के लोगों को फायदा मिलेगा. 

किसके इशारे पर नाचते हैं विवेकानंद तिवारी?

लोगों से मिले फीडबैक के बाद विवेकानंद तिवारी ने अपनी पत्नी वंदना तिवारी से चर्चा की तो उन्होंने भी तुरंत हां कर दी.  विवेकानंद कहते हैं, पत्नी वंदना ने कहा- 'मैं एक चैनल बनाती हूं, उस पर वीडियो डालूंगी, मैं बताऊंगी, कैसी स्क्रिप्ट रखनी है क्या करना है. इसके बाद मैंने अपनी पत्नी के इशारों पर नाचना शुरू कर दिया. ड्यूटी पूरी करने के बाद मैं घर आता तो वह कैमरामेन को लेकर मेरे साथ जातीं, हम लोगों से मिलकर बात करते, जो भी बात अच्छी लगती उसका वीडियो पोस्ट कर देते. धीरे-धीरे लोगों का सपोर्ट मिलता गया'.  ट्रैफिक नियमों का ज्ञान देने वाले विवेकानंद तिवारी के वर्तमान में फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब को मिलाकर करीब 2 करोड़ फॉलोअर्स हैं. देशभर के लोग उनके वीडियो देखते हैं.  

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ट्रैफिक रूल्स के ज्ञान को लेकर जाने-जाते हैं विवेकानंद तिवारी. (फोटो- vivekanandtiwarithetrafficcop)

ट्रैफिक नियमों का ज्ञान देने को लेकर क्या कहते हैं विवेकानंद तिवारी? 

लोग नियमों को जानकर भी न माने तो दिक्कत है, जब उन्हें नियम ही न पता हों तो क्या किया जाए. मोटर व्हीकल एक्ट एक माइनर एक्ट है, सुप्रीम कोर्ट भी यह बात कह चुका है. अगर, किसी ने कोई गलती की है तो आप उसे एक बार समझाकर छोड़ सकते हैं. किसी भी शहर या राज्य का पुलिस डिपार्टमेंट बहुत मेहनत करता है, लेकिन फिर भी लोग पुलिस को पसंद नहीं करते, क्योंकि हमने अपना स्वभाव कूल एंड काम, पेशेंसफुल न बनाकर अग्रेसिव बनाया है. इसी नरैटिव को चेंज करते हुए और लोगों को नियमों के प्रति जागरूक करने के लिए मैंने इसकी शुरूआत की थी, जो आज मेरे जीवन का हिस्सा है. वर्दी नहीं भी रही तो भी अपने लोगों के लिए हमेशा खड़ा रहूंगा. 

अब जानिए क्या है विवेकानंद तिवारी से जुड़ा पूरा विवाद? 

शहडोल यातायात पुलिस के हेड कांस्टेबल विवेकानंद तिवारी को बिना सूचना दिए गैर-हाजिर रहने पर मई 2026 में पुलिस अधीक्षक (एसपी) रामजी श्रीवास्तव ने 5 जून को सस्पेंड कर दिया गया था. उन्हें विभागीय और संपत्ति जांच के लिए नोटिस भी मिले. 10 जून विवेकानंद तिवारी ने इस्तीफा दे दिया. हालांकि, अभी तक इस्तीफा मंजूर नहीं हुआ है. 

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