दुर्ग में अवैध कब्जों पर कार्रवाई; विनायक ताम्रकार के ठिकानों पर बुलडोज़र, गांव की सरकारी जमीनों का सीमांकन

Chhattisgarh News: ताम्रकार परिवार के अवैध कब्जों पर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई शुरू की. सरकारी जमीनों के सीमांकन और बुलडोज़र कार्रवाई के बाद ग्रामीणों ने राहत जताई.

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Chhattisgarh News: दुर्ग में अवैध कब्जों पर कार्रवाई; विनायक ताम्रकार के ठिकानों पर बुलडोज़र, गांव की सरकारी जमीनों का सीमांकन

Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ में अफ़ीम की अवैध खेती का मामला सुर्खियों में आने के बाद अब जिला प्रशासन एक्शन मोड में आ गया है. अफ़ीम की खेती से जुड़े विनायक ताम्रकार और उसके भाइयों के अवैध कब्जों पर उद्योग नगर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक लगातार कार्रवाई हो रही है. स्टेट हाईवे पर स्थित करीब 32.5 डिसमिल जमीन से अवैध कब्जा हटाने के लिए प्रशासन ने मंगलवार को बुलडोज़र चलाया, वहीं पूरे गांव की सरकारी जमीनों का सीमांकन भी शुरू कर दिया गया है.

Chhattisgarh News: अफीम की खेती का मामला

ताम्रकार परिवार की तानाशाही के खिलाफ ग्रामीणों में राहत की भावना

गांव के कई ग्रामीणों ने बताया कि ताम्रकार परिवार की दबंगई और तानाशाही से वे वर्षों से परेशान थे. प्रशासनिक कार्रवाई के बाद उन्हें राहत मिली है और अब वे खुलकर अपने अनुभव बता रहे हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि इस परिवार ने गांव की अधिकांश सरकारी जमीनों से लेकर प्रमुख रास्तों तक कब्जा जमा रखा था, जिसकी वजह से ग्रामीणों की आवाजाही और बुनियादी सुविधाएं प्रभावित होती थीं.

मुक्तिधाम तक जाने के लिए भी लेनी पड़ती थी परमिशन

गांव के एक बुजुर्ग ने बताया कि मुक्तिधाम के सामने की जमीन पर भी ताम्रकार बंधुओं का कब्जा था. उन्होंने बताया, “किसी की लाश लेकर मुक्तिधाम जाना होता था तो पहले इनसे अनुमति लेनी पड़ती थी. कई बार तो पहुंच मार्ग पर ताला लगा दिया जाता था.” यह स्थिति ग्रामीणों की परेशानी और प्रशासन की निष्क्रियता को उजागर करती है.

गांव में नहीं बचा चरागाह, न खेल मैदान; शिवनाथ नदी का रास्ता भी बंद

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि गांव के चारागाह और खेल मैदान जैसी साझा संपत्तियों पर भी वर्षों से कब्जा है. एक ग्रामीण के अनुसार, “शिवनाथ नदी जाने वाला रास्ता भी विनायक ताम्रकार अपनी जमीन बताकर बंद कर देता था. इसलिए वहां पक्की सड़क नहीं बन सकी.” इससे यह साफ झलकता है कि गांव के विकास कार्य कब्जों की वजह से प्रभावित हो रहे थे.

सरपंच की शिकायत के बाद भी चौकी प्रभारी ने नहीं ली कार्रवाई

मामले के खुलासे में गांव के सरपंच की भी अहम भूमिका रही. उन्होंने बताया कि 5 तारीख को दोपहर 1 बजे चौकी के एक आरक्षक को अफ़ीम की खेती की सूचना दी थी, लेकिन शाम तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. शाम को उन्होंने चौकी प्रभारी को फोटो भेजकर जानकारी दी, पर तब भी कोई हलचल नहीं हुई. अंततः अगले दिन उन्होंने एलआईबी के आरक्षक को सूचना दी, जिसने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी दी. स्थानीय पुलिस की इस लापरवाही ने ग्रामीणों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं.

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110 एकड़ के फार्म हाउस में हाई सिक्योरिटी: सेंसर कैमरे और करंट वाले तार

जांच में सामने आया कि विनायक ताम्रकार के 110 एकड़ के फार्म हाउस में पहुंचने के लिए 1.5 से 2 किलोमीटर का रास्ता तय करना पड़ता है. इस रास्ते में जगह-जगह सेंसर वाले कैमरे लगे थे, जो मूवमेंट होते ही आवाज करते थे. फार्म हाउस के अंतिम छोर पर स्थित शिवनाथ नदी किनारे की 11 एकड़ जमीन करंट वाले तारों से घिरी हुई मिली. यह जमीन प्रीतिबाला और मधुबाला के नाम दर्ज है, जो ताम्रकार परिवार की करीबी रिश्तेदार बताई जा रही हैं. पूछताछ में उन्होंने माना कि वे वर्षों से दूसरे शहर में रहती हैं और खेतों की देखभाल विनायक करता है. उन्होंने यह भी कहा कि जब वे खुद खेत देखने जाना चाहती थीं, तो उन्हें भी रोक दिया गया था.

राजस्व विभाग की विशेष टीम कर रही सीमांकन, रिपोर्ट एक सप्ताह में

दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह ने पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए राजस्व विभाग की एक विशेष टीम बनाई है. यह टीम गांव की सभी सरकारी जमीनों का सीमांकन कर रही है और अवैध कब्जों की सूची तैयार कर रही है. एक सप्ताह के भीतर टीम अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.

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पुलिस ने बरामद किया अफ़ीम, बीज, उपकरण; दो आरोपी अब भी फरार

अभी तक की कार्रवाई में पुलिस ने आरोपियों के घर से ये वस्तुएं बरामद की हैं.

  • 10 ग्राम अफ़ीम
  • 200 ग्राम अफ़ीम के बीज
  • अफ़ीम निकालने में इस्तेमाल होने वाली लकड़ी
  • 7 बोरी सूखे अफ़ीम के फल
  • जेसीबी और ट्रैक्टर जैसे उपकरण

दो प्रमुख आरोपी अभी फरार हैं, जिनकी तलाश राजस्थान सहित अन्य संभावित जगहों में की जा रही है.

ग्रामीणों को उम्मीद; अब खत्म होगा कब्जा और दबंगई का दौर

प्रशासन ने साफ किया है कि सरकारी जमीन को कब्जामुक्त कराया जाएगा और जिम्मेदार व्यक्तियों पर सख्त कार्रवाई होगी. ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह अभियान इसी गति से जारी रहा, तो दशकों पुरानी उनकी मुश्किलें दूर हो सकती हैं.

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