Sindoor Cricket Cup organized in Narsinghpur: नरसिंहपुर में अनोखे क्रिकेट का आयोजन हुआ. इसमें भाग लेने वाले खिलाड़ी विवाहित महिलाएं थीं. भारतीय महिला टीम के वर्ल्ड कप जीतने से प्रेरित होकर ये आयोजन स्थानीय स्टेडियम ग्राउंड में किया गया, जिसका नाम रखा गया सिंदूर कप... जिले की छह महिला टीमों ने इसमें भाग लिया जिसमें पुलिस, सोशल और शिक्षा विभाग की टीम सहित निजी स्कूल की शिक्षिकाओं ने भी अपने हुनर पिच पर आजमाएं.
विवाहित महिलाओं ने थामा बल्ला
दो दिन चले इस आयोजन में शिक्षा और पुलिस विभाग की महिलाओं के बीच फाइनल मुकाबला हुआ, जिसमें जोरदार रनों की बारिश हुई. कहीं महिला पुलिस की टीम पर शिक्षकाएं भारी पड़ी तो कहीं शिक्षिकाओं पर पुलिस की टीम और आखिरकार इस दिलचस्प मुकाबले में पुलिस इलेवन ने बाजी मारी. इस आयोजन ने महिलाओं को घर से बाहर निकलकर आउटडोर गेम्स से जोड़ने और फिट रखने की कोशिश की है, जिसमें शामिल होकर महिलाओं ने अपने बचपन को याद किया.
शारीरिक और मानसिक रुप से मजबूत बनाने का प्रयास
इस आयोजन ने महिलाओं को घर से बाहर निकलकर आउटडोर गेम्स से जोड़ने और फिट रखने की कोशिश की है, जिसमें शामिल होकर महिलाओं ने अपने बचपन को याद किया. मोबाइल और इंडोर खेलों के बीच इस तरह से घर की चार दिवारी से बाहर निकाल कर मैदान में अपने हुनर को आजमाना महिलाओं के लिए आत्म परीक्षण तो है ही साथ ही मानसिक और शारीरिक रूप से फिट रखने का एक संकल्प भी है.
पुलिस इलेवन ने मारी बाजी
6 टीमों के मुकाबले के बीच दो दिन में कई लीग मैच खेले गए जिनमें से ढाई ओवर से लेकर 5 ओवर तक के मैच शामिल थे. फाइनल मुकाबला स्टेडियम ग्राउंड की दूधिया रोशनी के बीच 15 मार्च को रात्रि 10:00 बजे खेला गया, जिसमें पुलिस 11 और एजुकेशन 11 की टीमें खिताबी भिड़ंत में आमने-सामने रही. पहले बल्लेबाजी करते हुए पुलिस 11 ने 5 ओवर में 52 रन बनाए तो वहीं रन का पीछा करते-करते एजुकेशन 11 10 रनों से हार गई. इस मौके पर पूर्व राज्य मंत्री जालम सिंह पटेल ने खिलाड़ियों का उत्साह वर्धन करते हुए विजेता उपविजेता सहित सभी खिलाड़ियों को पुरस्कार वितरण किया.
जीत का जश्न ,गीत संगीत के बीच नृत्य
महिला खिलाड़ियों ने फाइनल मैच के बाद जमकर मैदान पर संगीत का लुत्फ उठाया और जमकर ठिरकी. पुलिस इलेवन की कप्तान रश्मि बताती हैं कि कभी बेलन तो कभी लाठियां संभालने वाली पुलिस विभाग की महिलाएं आज बैट को थामकर भी करिश्मा करने में पीछे नहीं रहीं. NDTV से बात करते हुए वो बताती हैं कि वे नौकरी करती हैं पर कुछ महिलाएं ऐसी हैं जो पूरी तरह से ग्रहणी हैं, जिन्होंने आज बेलन के बाद पहली बार बल्ला लेकर ग्राउंड पर उतरीं हैं. उन्हें बहुत मजा आया है.
खिलाड़ियों ने बताया कि उन्हें फिर से बचपन जीने का मौका इस ग्राउंड पर मिला. उन्होंने कहा कि ये मौका उन्हें फिर से मिले. ये अनुभव कई महिलाओं के लिए बेहद जानदार और आश्चर्यजनक रहा. उपविजेता रहने वाली एजुकेशन इलेवन ने गुलाबी जर्सी में मैदान में जोरदार दम खम दिखाया.
उपविजेता टीम ने बताया कि शिक्षा विभाग में कई टास्क मिलते हैं, पर वह सारे टास्क कलम, डस्टर और ब्लैक बोर्ड तक ही सीमित रहते हैं. इन सब से निकलकर जिस दमखम के साथ 5 दिनों की तैयारी में शिक्षिकाओं ने अपना जौहर दिखाया है. उस पर हमें गर्व है और साथ ही ऐसे सम्मानपूर्वक आयोजन का भी हम आभार करते हैं. ऐसे देश पर भी हमें गर्व है, जहां महिलाओं का सम्मान पूरी शिद्दत से किया जाता है.
महिला भाजपा की जिला अध्यक्ष निशा सोनी एनडीटीवी को बताती हैं कि यह टास्क उनके लिए बड़ा कठिन था. विवाहित महिलाओं को मैदान पर लाना थोड़ा सा मुश्किल जरूर था, लेकिन जिस तरह से आयोजन का प्रचार प्रचार धीरे-धीरे बढ़ा तो महिलाओं ने घर से निकाल कर मैदान पर आना सुनिश्चित किया.
मैन ऑफ द मैच रही प्रियंका बताती है कि भावना से ऊंचा कोई खेल नहीं होता. वो दोनों टीम को धन्यवाद देते हुए कहती है कि दोनों ही टीमों ने बहुत ही शानदार प्रदर्शन किया. सबने बहुत अच्छा खेला.
सपनों को संजोकर घर लौटे खिलाड़ी...
कार्यक्रम के आयोजक इस आयोजन से बेहद ही उत्साहित नजर आए. कार्यक्रम में पहुंचे पूर्व राज्य मंत्री जालम सिंह ने कहा कि ऐसे आयोजन अब हमेशा होते रहेंगे. महिलाओं की विशेष मांग है कि यह क्रिकेट अब और बेहतर हो. ऐसे में अब कोशिश की जाएगी कि महिलाओं को प्रशिक्षित भी किया जाए और ऐसे आयोजन से जोड़कर उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत भी रखा जा सके.














