1 एकड़ में 40 क्विंटल गेहूं उगाने वाली महिला किसान अब आंध्र प्रदेश की खास हल्दी MP में उगाकर कमा रही लाखों

Success Story: नर्मदापुरम की महिला किसान कंचन शरद वर्मा ने नर्मदांचल की धरती पर आंध्र प्रदेश की प्रसिद्ध 'सुरोमा' किस्म की हल्‍दी की खेती शुरू की. जिससे कृषि कर्मण अवॉर्ड विजेता कंचन लाखों की कमाई कर रही हैं.

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MP की महिला किसान कंचन वर्मा ने हल्दी की खेती से बदली तकदीर.

नर्मदापुरम: मध्य प्रदेश की एक महिला किसान ने परंपरा से हटकर ऐसा कमाल किया कि खुद पीएम नरेंद्र मोदी ने उन्हें 'कृषि कर्मण अवॉर्ड' से सम्मानित किया. अब यही महिला किसान आंध्र प्रदेश की एक खास किस्म की हल्दी उगाकर न सिर्फ लाखों का मुनाफा कमा रही हैं, बल्कि दर्जनों लोगों को रोजगार भी दे रही हैं. जानिए नर्मदांचल की इस 'सुपर वुमन' किसान की पूरी सक्सेस स्टोरी...

महिला किसान कंचन वर्मा ने एक एकड़ में 40 क्विंटल गेहूं की पैदावार की थी, जिसे लेकर साल 2020 में पीएम मोदी ने उन्‍हें कृषि कर्मण अवॉर्ड से सम्‍मानित क‍िया था. अब कंचन नर्मदांचल की धरती पर आंध्रप्रदेश की सुरोमा किस्म की हल्दी की खेती कर लाखों की कमाई कर रही हैं. 

महिला किसान कंचन शरद वर्मा की तकरीब से प्रभावित होकर उद्यानिकी विभाग भी पहली बार नर्मदापुरम में हल्दी की खेती को बढ़ावा दे रहा है. जिले में अब करीब 100 हेक्टेयर में हल्दी की बोवनी की गई है. 

पीएम नरेंद्र मोदी महिला किसान कंचन शरद वर्मा को दे चुके हैं कृषि कर्मण अवॉर्ड.

कंचन वर्मा ने 2020 में कृषि कर्मण अवॉर्ड जीता था

दरअसल, नर्मदापुरम जिले के ग्राम सोमलवाड़ा खुर्द की महिला किसान कंचन शरद वर्मा ने बीए होम साइंस की पढ़ाई की है.  उनके पति शरद वर्मा उन्नत किसान हैं. परिवार की जैविक अनाज और फल उत्पादन में एक अलग पहचान है. कंचन को भी खेती-किसानी में काफी रुच‍ि है. उन्‍होंने एक एकड़ में 40 क्विंटल गेहूं की पैदावार कर 2020 में कृषि कर्मण अवॉर्ड जीता था. बेंगलुरु के तुमकुर में आयोजित एक कार्यक्रम में पीएम नरेंद्र मोदी ने उन्‍हें यह अवॉर्ड देकर सम्मानित किया था. 

नर्मदापुरम: अपने हल्‍दी के खेत में कंचन शरद वर्मा‌.

आंध्रप्रदेश की प्रसिद्ध सुरोमा हल्‍दी से लाखों में पहुंची आमदनी 

NDTV से बात करते हुए महिला किसान कंचन शरद वर्मा ने बताया कि 3 साल पहले उन्‍होंने हल्दी की खेती शुरू की थी. पहले साल एक एकड़ में फसल लगाई. सूखने के बाद 16 क्विंटल पक्की हल्दी का उत्‍पादन हुआ. जिसे बेचने पर  1.10 लाख का मुनाफा हुआ. इसके बाद कंचन ने खेती का रकबा बढ़ाया और दूसरे साल 4 एकड़ में उद्यानिकी विभाग से आंध्रप्रदेश में मिलने वाली प्रसिद्ध सुरोमा किस्म की हल्दी लगाई. इस साल प्रति एकड़ में 100 क्विंटल गीली हल्दी की पैदावार हुई, सूखने पर यह 17 क्विंटल प्रति एकड़ रही. इससे करीब 5 लाख रुपये से अधकि का मुनाफा हुआ. इस साल 2026 में महिला किसान कंचन ने 6 एकड़ में हल्दी लगाई है. 

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घर से ही बिक जाती है पूरी हल्‍दी

कंचन वर्मा ने NDTV से बात करते हुए कहा क‍ि उनकी हल्दी की गुणवत्ता इतनी अच्छी है कि उसे बेचने के लिए किसी तरह के प्रचार-प्रसार या मंडी जाने की जरूरत नहीं पड़ती है. आसपास के गांव, शहरों के लोग और थोक व्‍यापारी ही उनसे आकर हल्‍दी ले जाते हैं, पूरी हल्‍दी घर से ही पूरी बिक जाती है.  

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8-9 महीने में तैयार हो जाती है हल्‍दी की फसल 

कंचन वर्मा ने बताया क‍ि हल्दी की फसल तैयार होने में 8-9 महीने का समय लगता है. मई-जून में खेत तैयार कर इसकी बोवनी कर करते हैं. एक एकड़ में करीब 8 क्विंटल बीज लगता है. हल्‍दी की खेती में करीब 60-70 हजार रुपए प्रति एकड़ लागत आती है, जिसमें करीब एक से डेढ़ लाख रुपए की आय (प्रति एकड़) प्राप्त होती है. खुदाई के बाद हल्‍दी गीली होती है तो उसके दाम होते हैं, लेकिन पकने या सूखने के बाद इसके दाम दोगुना हो जाते हैं. फरवरी-मार्च तक पक्की हल्दी बेचने के लिए तैयार हो जाती है. अलग-अलग वैराइटी के हिसाब से इसके दाम मिलते हैं, रोग लगने की भी चिंता नहीं रहती है. 

महिला किसान कंचन शरद वर्मा ने इस बार 6 एकड़ में हल्‍दी की बोवनी की.

नर्मदापुरम में पहली बार 100 हेक्टेयर में हल्दी की खेती 

किसान कंचन वर्मा को हल्दी की खेती में हुए मुनाफे को देखकर नर्मदापुरम उद्यानिकी विभाग ने भी जिले में हल्दी की फसल को बढ़ावा दिया. विभाग के अधिकारियों का कहना है क‍ि जिले की मिट्टी और जलवायु हल्दी की खेती के लिए उपयुक्त है. पहली बार जिले में करीब 100 हेक्टेयर के रकबे में हल्दी की बोवनी की गई है. साथ ही, सिवनी मालवा, पिपरिया समेत अन्‍य क्षेत्रों के किसानों को भी हल्दी की फसल लगाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है. इससे आने वाले समय में हल्दी की खेती का रकबा और बढ़ेगा. 

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