नर्मदा नदी को जीवित इकाई का दर्जा, फिर भी नियमों का उल्लंघन; NHRC सदस्य प्रियंक कानूनगो ने दिए कड़े निर्देश

नर्मदापुरम में NHRC सदस्य प्रियंक कानूनगो ने नर्मदा प्रदूषण पर कड़ी नाराजगी जताई. बिना ट्रीटमेंट गंदा पानी नदी में जाने, मटन दुकानों और अधूरे प्रोजेक्ट्स पर प्रशासन से जवाब मांगा और कार्रवाई के निर्देश दिए.

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नर्मदा प्रदूषण पर NHRC सदस्य प्रियंक कानूनगो सख्त, प्रशासन से मांगी जवाबदेही

Narmada Pollution: मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम दौरे पर पहुंचे राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने नर्मदा नदी के बढ़ते प्रदूषण और प्रशासनिक लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया है. कलेक्ट्रेट में हुई समीक्षा बैठक और उसके बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने साफ कहा कि कई मामलों में प्रशासन की कार्यप्रणाली संतोषजनक नहीं है और सुधार की सख्त आवश्यकता है. उन्होंने नर्मदा नदी में गंदे पानी के प्रवाह, नियमों के उल्लंघन और अधूरे इंफ्रास्ट्रक्चर कार्यों पर गंभीर चिंता जताई. कानूनगो ने स्पष्ट किया कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो इसका असर जनस्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों पर पड़ेगा, जिसकी जिम्मेदारी अधिकारियों को लेनी होगी.

नर्मदा में गंदे नालों का पानी, बताया बड़ा खतरा

प्रियंक कानूनगो ने नर्मदा नदी में बिना उपचार (ट्रीटमेंट) के गंदे नालों का पानी छोड़े जाने को गंभीर लापरवाही बताया. उन्होंने कहा कि इससे न केवल नदी प्रदूषित हो रही है, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य पर भी सीधा खतरा बन रहा है. उन्होंने चेताया कि इस तरह की स्थिति भविष्य में संक्रामक बीमारियों और महामारी को जन्म दे सकती है. अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि सीवरेज ट्रीटमेंट की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए.

‘जीवित इकाई' का दर्जा, फिर भी नियमों का उल्लंघन

कानूनगो ने कहा कि नर्मदा को सरकार ने ‘जीवित इकाई' का दर्जा दिया है, ऐसे में उसके आसपास नियमों का कड़ाई से पालन होना चाहिए. उन्होंने नदी किनारे और निर्धारित क्षेत्र में मटन दुकानों के संचालन पर सवाल उठाए और इसे नियमों के खिलाफ बताया. इस संबंध में जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं.

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STP और पाइपलाइन प्रोजेक्ट पर उठाए सवाल

नर्मदा घाट पर बन रहे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) और पाइपलाइन प्रोजेक्ट की डिजाइन और क्रियान्वयन को लेकर भी नाराजगी जताई गई. कानूनगो ने इन परियोजनाओं की तकनीकी समीक्षा कराने और एक ठोस कार्ययोजना तैयार करने को कहा. उनका कहना है कि अगर इंफ्रास्ट्रक्चर सही नहीं होगा तो प्रदूषण की समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है.

जातिसूचक नामों पर आपत्ति

दौरे के दौरान शहर में एक घाट और एक मोहल्ले के नाम को जातिसूचक पाए जाने पर भी उन्होंने आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि यह संविधान की भावना और सामाजिक समानता के सिद्धांतों के खिलाफ है. प्रशासन को ऐसे नामों को बदलने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं.

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अवैध मटन दुकान पर कार्रवाई के निर्देश

राम-जानकी मंदिर के पास संचालित एक कथित अवैध मटन दुकान का मामला भी सामने आया. इस पर कानूनगो ने अधिकारियों को तुरंत जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों के आसपास नियमों का सख्ती से पालन होना चाहिए.

सफाई कर्मचारियों के वेतन में अनियमितता पर नाराजगी

नगर पालिका में आउटसोर्स के माध्यम से कार्यरत सफाई कर्मचारियों के वेतन को लेकर भी गंभीर शिकायत सामने आई. बताया गया कि कई कर्मचारियों को तय दर के अनुसार वेतन नहीं मिल रहा है. इस पर कानूनगो ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी कर्मचारियों को समय पर और निर्धारित मानकों के अनुसार भुगतान सुनिश्चित किया जाए. श्रम विभाग को भी रिकॉर्ड की जांच करने को कहा गया है.

जिम्मेदारी तय करने के निर्देश

NHRC सदस्य ने स्पष्ट कहा कि नदियों को साफ रखने के लिए सरकारें बड़ी राशि खर्च कर रही हैं, फिर भी यदि लापरवाही हो रही है तो जवाबदेही तय करना जरूरी है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि गड़बड़ियां सामने आती हैं तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

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