VIDEO: रस्सी लेकर पेड़ पर चढ़ा परेशान किसान, यूरिया खाद के लिए आत्महत्या की कोशिश

मध्य प्रदेश में यूरिया खाद की किल्लत से किसान बुरी तरह परेशान हैं. रायसेन जिले के सिलवानी में खाद न मिलने से आहत किसान ने वेयरहाउस परिसर में आत्महत्या की कोशिश की, जिसका वीडियो सामने आया है.

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MP Urea Fertilizer Shortage: मध्य प्रदेश में यूरिया खाद की किल्लत ने किसानों की परेशानी इस हद तक बढ़ा दी है कि अब हालात जानलेवा कदम तक पहुंच रहे हैं. रायसेन जिले के सिलवानी नगर से ऐसी ही एक चिंताजनक घटना सामने आई है, जहां लगातार कई दिनों तक खाद न मिलने से परेशान एक किसान ने सार्वजनिक स्थान पर आत्महत्या की कोशिश कर दी. जैसे ही किसान रस्सी लेकर पेड़ पर चढ़ा, मौके पर अफरातफरी मच गई.

वेयरहाउस परिसर में मचा हड़कंप

दरअसल, बुधवार को सिलवानी नगर के बरेली रोड स्थित सुंदरम वेयरहाउस पर उस समय हड़कंप मच गया, जब एक किसान अचानक रस्सी लेकर पास के पेड़ पर चढ़ गया. वहां मौजूद लोगों ने जब उसे देखा तो तुरंत शोर मचाया और मामले की सूचना प्रशासन को दी. कुछ देर के लिए पूरे वेयरहाउस क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया.

तीन दिन से खाद के लिए परेशान

जानकारी के अनुसार, ग्राम चुन्हेटिया निवासी किसान चंद्रभान सिंह राजपूत, पिता सुंदर सिंह राजपूत, पिछले तीन दिनों से लगातार यूरिया खाद के लिए वेयरहाउस के चक्कर काट रहे थे. हर बार उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा था. बार-बार निराशा मिलने से किसान मानसिक रूप से टूट गया और गुस्से व हताशा में यह कदम उठाने की कोशिश कर बैठा.

प्रदर्शन के बाद जागा प्रशासन 

घटना की सूचना मिलते ही नायब तहसीलदार गौरव शुक्ला और टीआई पूनम सविता तुरंत मौके पर पहुंचे. अधिकारियों ने किसान से बात की और उसे समझा-बुझाकर सुरक्षित नीचे उतारा. प्रशासन की सूझबूझ से एक बड़ा हादसा टल गया. अधिकारियों ने किसान को शीघ्र ही यूरिया खाद उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया.

ऑनलाइन टोकन व्यवस्था बनी परेशानी

किसानों का कहना है कि ऑनलाइन टोकन सिस्टम लागू होने के बाद से समय पर यूरिया मिलना मुश्किल हो गया है. कई किसानों को बिना खाद लिए ही बार-बार वेयरहाउस लौटना पड़ रहा है. घंटों लाइन में लगने और कई दिनों तक चक्कर काटने के बावजूद जब खाद नहीं मिलती, तो किसानों की परेशानी और हताशा बढ़ जाती है.

खाद संकट पर उठे सवाल

इस घटना ने एक बार फिर खाद वितरण व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. किसान संगठनों का कहना है कि अगर समय रहते व्यवस्था नहीं सुधारी गई, तो ऐसे हालात दोबारा भी सामने आ सकते हैं. प्रशासन की ओर से भले ही आश्वासन दिया गया हो, लेकिन जमीनी स्तर पर समस्या का समाधान अब भी किसानों की सबसे बड़ी जरूरत बना हुआ है.

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