एक महिला की दो बार 'मौत'! एमपी में जमीन के लिए बड़ा गड़बड़ घोटाला, बना दिया डुप्लीकेट डेथ सर्टिफिकेट

मध्य प्रदेश के सिंगरौली में बड़ा जमीन घोटाला सामने आया है, जहां एक ही महिला के नाम पर दो अलग-अलग मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए गए. 1989 में मृत्यु होने के बाद भी 2013 में दोबारा डेथ सर्टिफिकेट बनाकर जमीन का नामांतरण करा लिया गया.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins

Duplicate Death Certificate Case: एक महिला की दो बार मौत! सुनने में अजीब लगता है ना, लेकिन मध्य प्रदेश के सिंगरौली में ऐसा ही हुआ. जमीन के खेल में सरकारी कागजों में एक ही महिला को दो अलग-अलग तारीखों पर “मरा” हुआ दिखा दिया. पहली बार 1989 में और दूसरी बार 2013 में. इस डुप्लीकेट डेथ सर्टिफिकेट के सहारे जमीन का नामांतरण तक करवा लिया. यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सिस्टम की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल है कि अगर मौत का प्रमाण पत्र भी सुरक्षित नहीं, तो आम आदमी की जमीन कितनी सुरक्षित है?

जानें क्या है पूरा मामला?

दरअसल, सिंगरौली जिले के धतूरा गांव निवासी धर्मकुमारी और कृष्ण कुमार ने कलेक्टर जनसुनवाई में शिकायत दी कि कलावती उपाध्याय की मृत्यु 25 फरवरी 1989 को हो चुकी थी और उस समय विधिवत मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी हुआ था. हैरानी की बात यह है कि 16 अक्टूबर 2013 को उसी महिला के नाम पर एक और डेथ सर्टिफिकेट बना दिया.  

डुप्लीकेट सर्टिफिकेट से हुआ ‘खेल' 

शिकायत के मुताबिक, 2013 में जारी डुप्लीकेट डेथ सर्टिफिकेट के आधार पर सजरा, वार्ड पार्षद से प्रमाण पत्र और वसीयत लगाकर तहसील के कर्मचारियों और अधिकारियों की मिलीभगत से नामांतरण करा लिया गया. एसडीएम की जांच रिपोर्ट में भी इस गड़बड़ी का उल्लेख है, जिसके बाद पीड़ित पक्ष ने संबंधित लोगों पर एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है.

प्रशासन की प्रतिक्रिया क्या है?

मामला सामने आने के बाद सिंगरौली कलेक्टर गौरव बैनल ने जांच कराने की बात कही है. पीड़ितों की ओर से स्पष्ट मांग है कि जिम्मेदार कर्मचारियों-अधिकारियों पर आपराधिक केस दर्ज हो और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हुआ नामांतरण निरस्त किया जाए.

Advertisement

सबसे बड़ा डर: अब सुरक्षित क्या है?

जब मृत्यु प्रमाण पत्र जैसा संवेदनशील दस्तावेज डुप्लीकेट बन जाए और उसके आधार पर जमीन का मालिकाना हक बदला जा सके, तो आम नागरिक के अधिकार कितने असुरक्षित हैं? यह सवाल व्यवस्था पर सीधा आरोप है. यह मामला सिर्फ एक प्रशासनिक गलती नहीं दिखता. सवाल यह उठता है कि क्या बिना सही जांच के मृत्यु प्रमाण पत्र जारी हो रहे हैं? क्या रिकॉर्ड वेरिफिकेशन सिस्टम इतना कमजोर है कि 24 साल बाद भी कोई भी नया प्रमाण पत्र बनवा ले? क्या यह सब अंदरूनी मिलीभगत के बिना मुमकिन है?  

Featured Video Of The Day
Mojtaba Khamenei की मौत का सच क्या? Trump का बड़ा दावा, ईरान ने क्या कहा? | US Iran War | BREAKING