लाडली बहना को 1500 रुपये और बुजुर्ग-विधवा-दिव्यांग 600 में जीवन गुजारने को हैं मजबूर, ये कैसा न्याय?

MP News: भिंड जिले में कांग्रेस ने लाडली बहना योजना और वृद्धा-विधवा-दिव्यांग पेंशन में भेदभाव का आरोप लगाया है. जहां लाडली बहना को 1500 रुपये मिल रहे हैं, वहीं पेंशन 600 रुपये पर अटकी होने से बुजुर्ग और दिव्यांग आर्थिक संकट में हैं.

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मध्यप्रदेश सरकार की योजनाओं को लेकर भिंड जिले में सियासी घमासान तेज हो गया है. कांग्रेस ने महिलाओं, बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों के साथ भेदभाव का आरोप लगाते हुए सरकार पर सीधा हमला बोला है. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जहां सरकार ने लाडली बहना योजना की राशि बढ़ाकर 1500 रुपये प्रतिमाह कर दी है, वहीं वृद्धा, विधवा और दिव्यांग पेंशन वर्षों से मात्र 600 रुपये पर अटकी हुई है, जो बढ़ती महंगाई के दौर में नाकाफी साबित हो रही है.

पेंशन पाने में दस्तावेजी उलझनें

कांग्रेस का आरोप है कि पेंशन पाने के लिए बुजुर्गों को कई तरह की जटिल प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है. केवाईसी या अन्य दस्तावेजों में थोड़ी सी कमी होने पर पेंशन रोक दी जाती है. इसका सबसे ज्यादा असर उन बुजुर्गों पर पड़ रहा है, जिन्हें परिवार ने सहारा देने से इंकार कर दिया है और जो पूरी तरह पेंशन पर निर्भर हैं.

वृद्धाश्रमों में हालात बदतर

जिले के वृद्धाश्रमों में रहने वाले बुजुर्गों की स्थिति और भी चिंताजनक बताई जा रही है. दस्तावेजों में सुधार न होने के कारण कई बुजुर्गों की पेंशन पिछले एक साल से बंद है. पेंशन न मिलने से इलाज, दवाइयों और रोजमर्रा की छोटी जरूरतों के लिए उन्हें दूसरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है. जानकारी के अनुसार एक वृद्धाश्रम में आधा दर्जन से अधिक बुजुर्ग ऐसे हैं, जिनकी पेंशन लंबे समय से बंद है.

फूलवती की कहानी ने झकझोरा

वृद्धाश्रम में रह रही 70 वर्षीय फूलवती की कहानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है. बेटों द्वारा घर से निकाली गई फूलवती प्लास्टिक की कुर्सी के सहारे चलती हैं और आश्रम में जीवन गुजार रही हैं. आश्रम में उन्हें दो वक्त का भोजन और कपड़े तो मिल जाते हैं, लेकिन बीमार होने पर इलाज के लिए उन्हें संघर्ष करना पड़ता है. पहले 600 रुपये की पेंशन से किसी तरह दवाइयों का इंतजाम हो जाता था, लेकिन केवाईसी न होने के कारण उनकी पेंशन पिछले एक साल से बंद है. फूलवती जैसी कई बुजुर्ग महिलाएं आज पेंशन के लिए मोहताज हैं.

दिव्यांगों की भी वही पीड़ा

50 वर्षीय रामलखन जाटव पैरों से दिव्यांग हैं. उन्हें हर महीने केवल 600 रुपये दिव्यांग पेंशन मिलती है, जो परिवार के भरण-पोषण के लिए नाकाफी है. मजबूरी में रामलखन ने साइकिल सुधारने की दुकान खोल रखी है और उसी से परिवार का गुजारा कर रहे हैं. कांग्रेस का कहना है कि यह स्थिति सरकार की संवेदनहीनता को उजागर करती है.

आंकड़े भी सवालों के घेरे में

भिंड जिले में जहां 2 लाख 69 हजार 197 महिलाएं लाडली बहना योजना का लाभ ले रही हैं, वहीं वृद्धा, विधवा और दिव्यांग पेंशन पाने वालों की संख्या मात्र 12 हजार 927 है. कांग्रेस के मुताबिक जून 2023 में शुरू हुई लाडली बहना योजना की राशि पहले 1000 रुपये थी, फिर 1250 रुपये की गई और बाद में बढ़ाकर 1500 रुपये प्रतिमाह कर दी गई. इसके उलट पेंशन योजनाओं में वर्षों से कोई बढ़ोतरी नहीं की गई.

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कांग्रेस का सरकार पर सीधा हमला

कांग्रेस के जिला एवं शहर अध्यक्ष धर्मेंद्र भदौरिया ने सरकार पर वोटों की राजनीति करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार को बुजुर्गों की कोई चिंता नहीं है. यदि सरकार सच में संवेदनशील होती, तो 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को लाडली बहना योजना से बाहर नहीं रखा जाता. उन्होंने कहा कि वृद्धा पेंशन कई सालों से 600 रुपये पर अटकी है, जो मौजूदा महंगाई में मजाक बनकर रह गई है.

कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि वृद्ध, विधवा और दिव्यांग पेंशन को बढ़ाकर कम से कम 2000 रुपये प्रतिमाह किया जाए, ताकि ये वर्ग सम्मानजनक जीवन जी सकें. पेंशन में बढ़ोतरी न होने से जिले में बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों के बीच गहरी नाराजगी देखी जा रही है.

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