हाईकोर्ट ने कांग्रेसियों की गिरफ्तारी पर जताई सख्त नाराजगी, पुलिस से पूछा- कानूनी प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई?

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कांग्रेस के तीन कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी को लेकर पुलिस की कार्रवाई पर सख्त नाराजगी जताई है. कोर्ट ने बिना ट्रांजिट रिमांड और कानूनी प्रक्रिया अपनाए उन्हें राजस्थान पुलिस को सौंपने पर सवाल उठाए. इस मामले में 27 अप्रैल को अगली सुनवाई तय की गई.

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Illegal Arrest Case MP: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कांग्रेस से जुड़े तीन कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी को लेकर पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं. कोर्ट ने इस पूरे मामले को प्रथम दृष्टया कानूनी प्रक्रिया के खिलाफ मानते हुए कड़ी नाराजगी जताई. विशेष रूप से बिना ट्रांजिट रिमांड और तय कानूनी औपचारिकताओं के कार्यकर्ताओं को राजस्थान पुलिस को सौंपे जाने पर कोर्ट ने जवाब तलब किया है.

क्या है पूरा मामला?

यह मामला वसुंधरा राजे से जुड़े एक कथित पत्र को सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से जुड़ा है. इसी केस में मप्र कांग्रेस सेल के तीन कार्यकर्ता निखिल, बिलाल और इनाम पर कार्रवाई की गई. याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि 20 अप्रैल की तड़के करीब 3 बजे इन तीनों को अवैध रूप से हिरासत में लिया गया.

दो दिन तक नहीं हुई मजिस्ट्रेट के सामने पेशी

याचिकाकर्ता पक्ष का कहना है कि हिरासत में लेने के बाद न तो तीनों को समय पर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया और न ही राजस्थान ले जाने के लिए कोई ट्रांजिट रिमांड लिया गया. इसके बावजूद उन्हें राजस्थान पुलिस के हवाले कर दिया गया, जो सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है.

कोर्ट ने पुलिस से किए सीधे सवाल

मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने सुनवाई करते हुए भोपाल पुलिस कमिश्नर से सीधा सवाल किया कि “बिना ट्रांजिट रिमांड और विधि सम्मत प्रक्रिया के इन लोगों को राजस्थान पुलिस को कैसे सौंपा गया?”

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राजस्थान पुलिस को पेश करने के निर्देश

हाई कोर्ट ने राजस्थान पुलिस को निर्देश दिया है कि तीनों कार्यकर्ताओं को अगली सुनवाई, यानी 27 अप्रैल को कोर्ट के समक्ष पेश किया जाए. साथ ही, पूरे घटनाक्रम को गंभीर मानते हुए कई अधिकारियों को नोटिस भी जारी किए गए हैं.

सीसीटीवी फुटेज पेश करने के आदेश

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिए हैं कि 20 और 21 अप्रैल 2026 के बीच पुलिस परिवहन एवं अनुसंधान संस्थान, जहांगीराबाद में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज पेश की जाए, ताकि यह साफ हो सके कि हिरासत और सुपुर्दगी की प्रक्रिया किस तरह से हुई.

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सरकार का पक्ष और याचिकाकर्ताओं का आरोप

राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि राजस्थान पुलिस की सूचना पर तीनों को पूछताछ के लिए बुलाया गया था. बाद में उन्हें परिवार को सौंपा गया और फिर अगले दिन राजस्थान पुलिस को दिया गया.
हालांकि, याचिकाकर्ता पक्ष ने इस दलील को झूठा और मनगढ़ंत बताते हुए कहा कि पूरे घटनाक्रम में कानून की खुली अनदेखी की गई है.

अब अगली सुनवाई पर टिकी नजर

हाई कोर्ट की सख्ती के बाद यह मामला काफी अहम हो गया है. अब सबकी नजर 27 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी है, जहां यह साफ होगा कि पुलिस की कार्रवाई सिर्फ लापरवाही थी या फिर कानून का गंभीर उल्लंघन.

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