मध्यप्रदेश में गेहूं खरीदी ने बनाया नया रिकॉर्ड; 104 लाख MT उपार्जन, MSP पर किसानों को 23708 करोड़ का भुगतान

मध्यप्रदेश ने गेहूं उपार्जन में नया रिकॉर्ड बनाया है. 100 लाख मीट्रिक टन लक्ष्य के खिलाफ 104 लाख MT से अधिक खरीदी हुई. 13.41 लाख किसानों से उपार्जन कर राज्य ने देश में अग्रणी स्थान हासिल किया है.

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मध्यप्रदेश में गेहूं उपार्जन ने बनाया रिकॉर्ड, 104 लाख मीट्रिक टन खरीदी, 13.41 लाख किसानों को लाभ

MP Wheat Procurement: मध्यप्रदेश ने इस वर्ष गेहूं उपार्जन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए नया रिकॉर्ड कायम किया है. निर्धारित 100 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले प्रदेश में 104 लाख 22 हजार मीट्रिक टन से अधिक गेहूं की खरीदी की गई है. केंद्र सरकार ने प्रदेश का लक्ष्य बढ़ाया, जिसका परिणाम बेहतर प्रबंधन और किसानों के सहयोग से सामने आया. समर्थन मूल्य पर 13.41 लाख से अधिक किसानों से गेहूं उपार्जन कर प्रदेश ने देश में अग्रणी स्थान प्राप्त किया है. यह उपलब्धि न केवल कृषि क्षेत्र में प्रदेश की मजबूती को दर्शाती है, बल्कि किसानों के हित में सरकार की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करती है.

लक्ष्य से अधिक उपार्जन, 104 लाख मीट्रिक टन पार

मध्यप्रदेश ने गेहूं खरीदी में एक बार फिर अपना वर्चस्व साबित किया है. इस वर्ष राज्य ने निर्धारित लक्ष्य 100 लाख मीट्रिक टन के विरुद्ध 104 लाख 22 हजार मीट्रिक टन से अधिक गेहूं का उपार्जन किया. प्रारंभिक लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन था, जिसे बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन किया गया. बेहतर रणनीति, समयबद्ध खरीदी और व्यवस्थागत सुधारों ने इस उपलब्धि को संभव बनाया.

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किसानों की भागीदारी से बना रिकॉर्ड

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के अनुसार प्रदेश में 13 लाख 41 हजार 266 किसानों से समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदा गया. यह संख्या देश में सर्वाधिक है. हालांकि कुल उपार्जन के मामले में मध्यप्रदेश पंजाब के बाद दूसरे स्थान पर है, लेकिन किसानों की व्यापक भागीदारी ने प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान दिलाई है.

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10 वर्षों में सर्वाधिक खरीदी

प्रदेश में इस वर्ष समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन का आंकड़ा पिछले 10 वर्षों में सर्वाधिक रहा है, यदि कोविड-19 अवधि को अपवाद मानें. इससे साफ है कि राज्य सरकार की नीतियां और खरीदी व्यवस्था लगातार बेहतर हो रही है.

राज्य सरकार किसानों के कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. गेहूं उपार्जन में मिली यह सफलता सरकार की नीतियों, प्रशासनिक दक्षता और किसानों के सहयोग का परिणाम है. आने वाले समय में भी ऐसे प्रयास जारी रहेंगे.

गोविंद सिंह राजपूत

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री

छोटे किसानों को प्राथमिकता

सरकार ने लघु एवं सीमांत किसानों को प्राथमिकता देते हुए खरीदी प्रक्रिया की शुरुआत की. कुल 8 लाख 9 हजार 990 छोटे एवं सीमांत किसानों से 32 लाख 14 हजार मीट्रिक टन से अधिक गेहूं खरीदा गया. यह सरकार की किसान-केंद्रित नीति को दर्शाता है.

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सीएम का मैदानी निरीक्षण, व्यवस्थाओं पर फोकस

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वयं खरीदी केंद्रों का औचक निरीक्षण किया. इस दौरान उन्होंने तौल व्यवस्था, बारदाना उपलब्धता और किसानों के लिए सुविधाओं का जायजा लिया. किसानों से सीधे संवाद कर भुगतान और प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी ली. जिन किसानों ने स्लॉट बुक किया था, उनके लिए उपार्जन अवधि 23 मई से बढ़ाकर 28 मई कर दी गई, जिससे अधिक किसानों को लाभ मिला.

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किसानों को 23,708 करोड़ से अधिक भुगतान

राज्य सरकार ने किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया है. अब तक 23,708.13 करोड़ रुपये से अधिक की राशि किसानों के खातों में भेजी जा चुकी है. इसके साथ ही 96 लाख 52 हजार 957 मीट्रिक टन गेहूं का परिवहन भी पूरा हो चुका है, जो कुल उपार्जन का लगभग 93 प्रतिशत है.

MSP के साथ बोनस, किसानों को बेहतर मूल्य

इस वर्ष गेहूं का समर्थन मूल्य 2,585 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया था. इसके साथ ही राज्य सरकार ने 40 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस दिया, जिससे किसानों को कुल 2,625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान मिला. इससे किसानों की आय में वृद्धि हुई.

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संभागवार उपार्जन में भोपाल और उज्जैन आगे

संभागवार आंकड़ों में भोपाल संभाग 28.47 लाख मीट्रिक टन के साथ सबसे आगे रहा, जबकि उज्जैन में 22.84 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया. जबलपुर में 12.73 लाख, नर्मदापुरम में 9.22 लाख, सागर में 8.56 लाख, इंदौर में 8.62 लाख, रीवा में 6.15 लाख, ग्वालियर में 4.36 लाख और चंबल में 2.40 लाख मीट्रिक टन उपार्जन हुआ. शहडोल संभाग में 70 हजार 666 मीट्रिक टन खरीदी दर्ज की गई.

व्यवस्थाओं में सुधार से सुचारू खरीदी

सरकार ने खरीदी केंद्रों पर व्यवस्थाओं को मजबूत किया. तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 की गई और जरूरत अनुसार जिलों को संख्या बढ़ाने का अधिकार दिया गया. तौल पर्ची बनाने का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे और भुगतान प्रक्रिया रात 12 बजे तक संचालित की गई.

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किसानों के लिए बेहतर सुविधाएं

खरीदी केंद्रों पर किसानों के लिए पेयजल, छायादार स्थान और अन्य सुविधाएं सुनिश्चित की गईं. उपज की तौल और गुणवत्ता जांच के लिए पर्याप्त संसाधन जैसे बारदाना, तुलावटी, कम्प्यूटर, सिलाई मशीन और सफाई उपकरण उपलब्ध कराए गए.

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