मध्य प्रदेश: कृषि विभाग में 14 हजार पदों में से 8 हजार रिक्त, बिना स्टाफ कैसे मन रहा है 'कृषक कल्याण वर्ष'?

MP Krishi Vibhag Vacancy: मध्य प्रदेश में 'कृषक कल्याण वर्ष 2026' के सरकारी दावों के बीच एनडीटीवी की ग्राउंड रिपोर्ट ने चौंकाने वाली हकीकत उजागर की है. प्रदेश के कृषि विभाग में करीब 60 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं, जिससे 150 करोड़ की सॉयल हेल्थ लैब में ताले लटके हैं और 'ड्रोन दीदी' जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएं भी स्टाफ की कमी के कारण दम तोड़ रही हैं.

विज्ञापन
Read Time: 4 mins
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • कृषि विभाग में कुल स्वीकृत पदों में लगभग साठ प्रतिशत पद रिक्त हैं, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली प्रभावित
  • राज्य के तीन सौ तेरह विकासखंडों में बनी 263 मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाएं स्टाफ की कमी के कारण निष्क्रिय हैं
  • पशुपालन, मत्स्य पालन और खाद्य विभाग जैसे सहायक विभागों में भी 50% तक पद खाली
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

MP Krishi Kalyan Varsh: मध्य प्रदेश में खेती और किसानों को लेकर सरकार के दावे और जमीनी हकीकत के बीच एक बड़ी खाई नजर आ रही है. राज्य सरकार साल 2026 को 'कृषक कल्याण वर्ष' के रूप में मना रही है, लेकिन जिस विभाग के कंधों पर इस कल्याण की जिम्मेदारी है, वह खुद 'वेंटिलेटर' पर है. मध्य प्रदेश के कृषि विभाग में कर्मचारियों की इतनी भारी कमी है कि विभाग की पूरी रीढ़ ही चरमरा गई है. सरकारी आंकड़ों की परतें खोलें तो पता चलता है कि विभाग में लगभग 60 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं, जिससे न केवल योजनाएं ठप हैं, बल्कि सिस्टम पूरी तरह लाचार नजर आ रहा है. 

खाली पड़े हैं 60% पद, कौन सुनेगा किसानों की गुहार?

मध्य प्रदेश कृषि विभाग के भीतर का सन्नाटा डराने वाला है. विभाग में कुल स्वीकृत 14,537 पदों में से केवल 6,126 कर्मचारी ही तैनात हैं, जबकि 8,468 पद लंबे समय से रिक्त हैं. यानी आधे से ज्यादा कुर्सियां खाली हैं. सिर्फ निचले स्तर पर ही नहीं, बल्कि फैसले लेने वाले वरिष्ठ पदों का हाल भी बुरा है. वरिष्ठ अधिकारियों के 182 पदों में से 113 पद खाली हैं, जो लगभग 62 प्रतिशत की कमी दर्शाते हैं. जब विभाग के पास काम करने वाले हाथ ही नहीं होंगे, तो सरकार की बड़ी-बड़ी घोषणाएं खेतों तक कैसे पहुंचेंगी, यह एक बड़ा सवाल है.

करोड़ों की लैब में लग रहे जाले, ड्रोन दीदी भी बेहाल

कर्मचारियों की इस कमी का सीधा असर सरकारी योजनाओं पर पड़ रहा है. एनडीटीवी की ग्राउंड रिपोर्ट में यह कड़वा सच सामने आया है कि राज्य के 313 विकासखंडों में 150 करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत से बनी 263 मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाएं (सॉयल लैब) सफेद हाथी साबित हो रही हैं. वहां स्टाफ न होने की वजह से मशीनों पर धूल जम रही है, जबकि कागजों पर सॉयल हेल्थ कार्ड बनाने के आंकड़े 188 प्रतिशत से भी ज्यादा दिखाए जा रहे हैं. यही हाल 'ड्रोन दीदी' योजना का है, जो आत्मनिर्भर बनने के बजाय तकनीकी और मानवीय सहयोग के अभाव में बैट्री पर निर्भर होकर रह गई हैं.

पशुपालन से मत्स्य पालन तक, हर जगह 'स्टाफ का अकाल'

यह संकट सिर्फ कृषि विभाग तक सीमित नहीं है. खेती-किसानी से जुड़े अन्य सहायक विभागों की स्थिति भी वैसी ही है. संचालनालय, खाद्य विभाग, पशुपालन और मत्स्य पालन जैसे महत्वपूर्ण विभागों में भी 40 से 50 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं. जमीनी स्तर पर काम करने वाले मैदानी अमले की कमी के कारण फसल मुआवजा, खाद-बीज का वितरण और तकनीकी सलाह जैसी बुनियादी सुविधाएं किसानों तक नहीं पहुंच पा रही हैं. सिस्टम की इस लाचारी ने खेती को बेहाल कर दिया है.

Advertisement

सियासी घमासान: वादे बनाम हकीकत

इस मुद्दे पर अब सियासत भी गरमा गई है. मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खत लिखकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश का 97 प्रतिशत किसान कर्ज में डूबा है और सरकार ने सोयाबीन के 6000, धान के 3100 और गेहूं के 2700 रुपये देने का जो वादा किया था, वह पूरा नहीं हुआ. पटवारी का कहना है कि जब विभाग में 60 प्रतिशत कर्मचारी ही नहीं हैं, तो कृषि कल्याण की बात करना बेमानी है. दूसरी तरफ, कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना का कहना है कि नियुक्तियां नियमों के तहत की जाएंगी और इसमें चिंता करने जैसी कोई बात नहीं है.

क्या सिर्फ घोषणा बनकर रह जाएगा 'कृषक कल्याण वर्ष'?

कुल मिलाकर तस्वीर यह है कि सरकार के पास योजनाओं का अंबार है और बजट भी खर्च हो रहा है, लेकिन जमीन पर उन योजनाओं को उतारने वाले कर्मचारी गायब हैं. जब तक खाली पदों को भरकर विभाग की रीढ़ मजबूत नहीं की जाती, तब तक 'कृषक कल्याण वर्ष' जैसी घोषणाएं सिर्फ कागजों और विज्ञापनों तक ही सीमित रहने का डर है. बिना स्टाफ के खेती को लाभ का धंधा बनाना और किसानों की आय दोगुनी करना फिलहाल एक अधूरा सपना ही नजर आता है. 
ये भी पढ़ें: नक्सलियों पर अंतिम प्रहार: 31 मार्च तक ‘ऑपरेशन-4' से खत्म होगा लाल आतंक?

Advertisement
Featured Video Of The Day
Iran Attacks Israel: ईरान के हमले में कैसे इजरायल में मारे गए 2 लोग? Ground Report से समझें हालात