न बयान, न सफाई... गाड़ी में बैठकर निकल गए मंत्री विजय शाह, हवा में रह गए सवाल, क्या करना चाह रही MP सरकार?

बीजेपी के प्रदेश कार्यालय में जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह का आना पार्टी के लिए एक सामान्य, पूर्व-निर्धारित कार्यक्रम बताया गया. भीतर बातचीत हुई, लेकिन बाहर माहौल बिल्कुल अलग था. सवाल तैयार थे, लेकिन शाह ने वही किया, जो वे राजनीति में चार दशक से बखूबी करते आए हैं.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins

6 फरवरी 2026 शुक्रवार को भोपाल में जो हुआ, उसने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया कि सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बावजूद विजय शाह अब तक सवालों से कैसे बचे हुए हैं? क्या सरकार भी उसी राह पर है.

दरअसल, बीते शुक्रवार को भोपाल स्थित बीजेपी के प्रदेश कार्यालय में जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह का आना पार्टी के लिए एक सामान्य, पूर्व-निर्धारित कार्यक्रम बताया गया. भीतर कार्यकर्ताओं से मुलाकात हुई, बातचीत हुई, लेकिन बाहर माहौल बिल्कुल अलग था. जैसे ही विजय शाह कार्यालय से निकले, कैमरे तैयार थे, सवाल तैयार थे-सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई, अभियोजन स्वीकृति और सरकार के रुख को लेकर. लेकिन शाह ने वही किया, जो वे राजनीति में चार दशक से बखूबी करते आए हैं- खामोशी के सहारे निकल जाना. न कोई बयान, न कोई सफाई. सवाल हवा में रह गए और मंत्री अपनी गाड़ी में बैठकर निकल गए.

इसी खामोशी के बीच अब खबर यह है कि सरकार भी शायद उसी रणनीति पर चलने वाली है. सूत्रों के मुताबिक, मध्य प्रदेश सरकार 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में यह कहकर और समय मांग सकती है कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है और फैसला जल्दबाजी में नहीं लिया जा सकता. यानी कैमरे से बचाव के बाद, अब अदालत से मोहलत की तैयारी. इससे पहले 19 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने साफ निर्देश दिया था- विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट के आधार पर दो हफ्ते में तय करें कि विजय शाह के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति दी जाएगी या नहीं. यह समय-सीमा 2 फरवरी को खत्म हो चुकी है, लेकिन फैसला अब भी फाइलों में अटका है.

रेलिंग तोड़कर नहर में गिरी कार, देखते-देखते 3 की मौत, हादसे की वजह क्या? देखें तस्वीरें   

विजय शाह कोई साधारण मंत्री नहीं हैं

राजनीतिक गलियारों में इसके जवाब खुले तौर पर दिए जा रहे हैं. विजय शाह कोई साधारण मंत्री नहीं हैं. 1990 से अब तक लगातार आठ चुनाव जीत चुके, वे मध्य प्रदेश कैबिनेट में दिग्गज मंत्री रहे हैं. उमा भारती की सरकार से लेकर अब तक आठ पारियों में पांच मंत्रालय संभाल चुके हैं. मंत्री रहते हुए उन्हें तीन बार आदिम जाति कल्याण विभाग, दो बार वन विभाग, और एक-एक बार स्कूल शिक्षा विभाग, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग और खाद्य एवं आपूर्ति विभाग मिला. वे मकड़ाई राजघराने के वंशज और गोंड आदिवासी समाज के प्रभावशाली नेता हैं.

कोई भी सरकार नाराजगी का जोखिम लेने से पहले दस बार सोचती है

मध्य प्रदेश की 22 प्रतिशत आदिवासी आबादी और 84 आदिवासी बहुल सीटों वाले राज्य में, जहां 47 सीटें आदिवासियों के लिए आरक्षित हैं, वहां 35 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले गोंड आदिवासियों में राजगोंड परिवार के शाह की नाराजगी का जोखिम कोई भी सरकार लेने से पहले दस बार सोचती है. हरसूद और आसपास के इलाकों में चार दशक से उनका प्रभाव है. यही वजह है कि 2013 में झाबुआ में महिलाओं को लेकर दिए गए विवादित बयान के बावजूद उन्हें सिर्फ चार महीने के लिए मंत्री पद से हटाया गया था, पूरी तरह नहीं. 

Advertisement

Video: विदिशा मेडिकल कॉलेज में परिजन से बदसलूकी, युवक ने महिला गार्ड को जड़ा थप्पड़, वीडियो वायरल

Featured Video Of The Day
Bareilly में अवैध मस्जिद पर चलाया जा रहा बुलडोजर | Bulldozer Action | UP News | Breaking News
Topics mentioned in this article