Mahakal Makar Sankranti 2026: मध्य प्रदेश के उज्जैन में किसी भी पर्व की शुरुआत बाबा महाकाल के दर से होती हैं. इसी परंपरा के चलते मकर संक्रांति पर्व भी सबसे पहले बाबा तिल के तेल से स्नान कर तिल्ली के लड्डू और पकवानों का भोग लगाकर की जाएगी, लेकिन यह पूजा कल नहीं गुरुवार को की जाएगी, क्योंकि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार संक्रांति पर्व बुधवार दोपहर से शुरू होगा.
दरअसल, लोग हर वर्ष की तरह 14 जनवरी को संक्रांति पर्व मनाते हुए पतंग उड़ाएंगे, लेकिन ज्योतिषों के अनुसार 14 जनवरी दोपहर 3:05 पर सूर्य धनु राशि छोड़कर के मकर राशि में प्रवेश करेगा, जिससे मकर संक्रांति हो जाएगी. लेकिन इसका प्रभाव 15 को होगा क्योंकि सूर्य की संक्रांति यदि दोपहर या अपरान्ह में होती है तो उसका पर्व काल अगले दिन माना जाता है.
यही वजह है कि महाकाल में मकर संक्रांति पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा. वहीं शिप्रा में स्नान और दान पुण्य का महत्व भी इसी दिन का रहेगा.
ऐसे मनेगी बाबा की मकर संक्रांति
पुजारी महेश शर्मा ने बताया कि मकर संक्रांति स्नान पर्व के रूप में मनाया जाता है. 15 जनवरी संक्रांति पर्व पर तड़के 4 बजे भस्मारती के बाबा महाकाल को तिल के उबटन से स्नान कराया जाएगा. शक्कर से बने तिल के लड्डु ओर तिल्ली के पकवानों का महाभोग लगाकर जलाधारी में भी तिल्ली और पतंग अर्पित की जाएगी.
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संक्रांति की यह है परंपरा
सूर्य के उत्तरायन का पर्व मकर संक्रांति 14 और 15 जनवरी दो दिन षटतिला एकादशी पर सर्वार्थसिद्धि व अमृतसिद्धि योग के महासंयोग में मनाया जाएगा. संक्रांति पर सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर होता है. संक्रांति के पर्व काल पर सामान्यतः चावल, हरी मूंग की दाल की खिचड़ी, पात्र, वस्त्र, भोजन आदि वस्तुओं का दान अलग-अलग ढंग से करने की परंपरा भी है. संक्रांति पर श्रद्धालु शिप्रा नदी में स्नान फिर दान पुण्य कर बाबा महाकाल के दर्शन करते है.
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