Madhya Pradesh: भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद में जुम्मे की नमाज, मुस्लिम समाज ने प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप

Madhya Pradesh: मुस्लिम समाज सदर व मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष अब्दुल समद ने कहा कि प्रशासन ने दोहरी रणनीति अपनाते हुए मुस्लिम समाज को नमाज से दूर रखा. उनका आरोप है कि जिस स्थान पर नमाज कराए जाने का दावा किया जा रहा है, वो कब्रिस्तान था और वहां नमाज के लिए किसी प्रकार के उचित इंतजाम नहीं किए गए थे.

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Dhar Bhojshala: धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद में बसंत पंचमी के दिन पूजा और नमाज को लेकर एक बार फिर विवाद सामने आया है. मुस्लिम समाज सदर व मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष अब्दुल समद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं.

मुस्लिम समाज का गंभीर आरोप

मुस्लिम समाज सदर व मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष अब्दुल समद ने कहा कि प्रशासन ने दोहरी रणनीति अपनाते हुए मुस्लिम समाज को नमाज से दूर रखा. उनका आरोप है कि जिस स्थान पर नमाज कराए जाने का दावा किया जा रहा है, वह कब्रिस्तान था और वहां नमाज के लिए किसी प्रकार के उचित इंतजाम नहीं किए गए थे. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन द्वारा डमी नमाज करवाई गई. 

प्रशासन ने न्यायालय के आदेश की अवमानना की

सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद जिला प्रशासन के अधिकारियों के सामने केंद्रीय पुरातत्व विभाग द्वारा जो नक्शा और नमाज के लिए चिन्हित स्थान बताया गया था, वो वफ्फ बोर्ड का कब्रिस्तान था. ऐसे में हमने आपत्ति दर्ज करवाई थी. उसके बाद भी जिला प्रशासन ने समाज को गुमराह करते हुए उसी स्थान पर डमी नमाज अदा करा कर न्यायालय के आदेश की अवमानना की है. अब हम लोग माननीय न्यायालय में अपनी आपत्ति दर्ज कराएंगे. 

मुस्लिम समाज सदर ने कहा कि नमाज के निर्धारित समय पर समाज के लोग नमाज अदा करने के लिए तैयार थे, लेकिन उन्हें उचित अवसर नहीं दिया गया.

प्रशासन का दावा- 'शांतिपूर्ण तरीके से पूजा और नमाज संपन्न कराई गईं'

वहीं जिला प्रशासन पहले ही यह दावा कर चुका है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार पूजा और नमाज दोनों ही शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराई गईं. प्रशासन के अनुसार, दोनों समुदायों के लिए स्थान पूर्व में ही चिन्हित कर दिए गए थे.

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