Jabalpur Cruise Capsized: जबलपुर के ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में मशीनिस्ट की पोस्ट पर काम करने वाले कामराज के पैतृक गांव तमिलनाडु से घूमने के लिए जबलपुर आए उनके पांच रिश्तेदार भी बरगी में क्रूज हादसे का शिकार हुए हैं. कामराज के परिवार में पत्नी सहित चार सदस्य थे, जिनमें उनके दो बेटे शामिल हैं. कामराज अपने सास, ससुर, साले की पत्नी और बेटे-बेटी के साथ कुल सात सदस्यों के साथ बरगी डैम में क्रूज की यात्रा करने गए थे. क्रूज की यात्रा के दौरान सास ससुर ने क्रूज पर सवार होने से मना कर दिया था, लिहाजा वो घाट पर ही थे. इसके अलावा सात लोग क्रूज पर सवार होकर यात्रा कर रहे थे.
परिवार के सिर्फ दो मासूम को बचाया गया
जिस दौरान क्रूज डूबा उस समय का मंजर बेहद भयानक था. इस हादसे में कामराज का 10 साल का बेटे पुवीथरन और कामराज की साले की 12 साल की बेटी तमिलनिया को बचाया जा सका. वहीं कामराज की पत्नी और उसके साले की पत्नी की मौत हो गई है, जिनके शव वायुयान से जबलपुर एयरपोर्ट से तमिलनाडु, इनके पैतृक गांव भेजे जा रहे हैं. वहीं इस भयावक मंजर को बरगी डैम के किनारों पर बुजुर्ग सास-ससुर देखते रहे गए और कुछ कर नहीं सके.
तीन लोग अबी भी लापता
हादसे में कामराज, उसका छोटा बेटा और साले का बेटा अभी लापता है... मृत दोनों महिलाओं की शवों को डुमना एयरपोर्ट से तमिलनाडु भेजा जा रहा है. वहीं इस हादसे को करीब से देखने वाले कामराज के बेटे के पुवीथरन जो अपनी मां के शव के साथ तमिलनाडु जा रहे हैं. उन्होंने एयरपोर्ट पर एनडीटीवी से बातचीत की.
डैम से निकले पुवीथरन ने क्या कहा?
फैमिली के बचे एक मात्र सदस्य के पुवीथरन ने बताया कि नाना नानी को छोड़कर शेष सभी सात लोग क्रूज पर सवार हुए थे. इस यात्रा में उनका पिता, मां और छोटा भाई थे. इसके अलावा उसकी मामी और मामी की बेटी और बेटे भी क्रूज से यात्रा कर रहे थे. जब आंधी तूफान आया तो क्रूज उसमें फंस गया, जिसके चलते क्रूज़ में पानी भरने लगा. घुटने से ऊपर पानी आने के बाद लाइफ जैकेट बांटने का काम किया गया. सभी को लाइफ जैकेट नहीं मिल पाई. पुवीथरन और उसकी मामी की बेटी को जैकेट मिल गई. क्रूज को चलाने वाले पायलट ने जान बचाने के लिए छलांग लगा दी, जिसके बाद क्रूज में चीख पुकार मच गई. पुवीथरन आगे बताते हैं कि वो कैसे निकल पाए उन्हें खुद नहीं पता?
रांझी की एसडीएम मोनिका बाघमारे ने बताया कि दोनों शव को उनके पैतृक गांव भेजा जा रहा है. पहले वायुयान से तिर्ची शवों को पहुंचाया जाएगा और वहां से सड़क के रास्ते कामराज के घर पहुंचाया जाएगा.
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