Success Story: ड्राइवर का बेटा बना IPS, 20 परीक्षाओं में फेल होने के बाद मिली सफलता, जानिए विवेक यादव की कहानी

Vivek Yadav Success Story: विवेक को सफलता रातों-रात नहीं मिली. पहले उन्हें 20 अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं में असफलता मिली, लेकिन न तो वो टूटे और न ही उनके हौसले पस्त हुए. हर हार से उन्होंने एक नई सीख ली और अपनी कमियों को सुधार कर दोगुनी ताकत से उठे. बीस प्रयासों में असफल होने के बाद देश की सबसे कठिन परीक्षा सिविल सेवा परीक्षा पास की है. 

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IPS Vivek Yadav Success Story: अगर हौसलों की उड़ान सच्ची हो, तो आसमान भी छोटा पड़ जाता है... सुविधाओं के अभाव और लगातार मिल रही असफलताओं के बावजूद, जब कोई युवा अपनी जिद पर अड़ जाए, तो वो इतिहास रच देता है. मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले के चंदेरी के रहने वाले विवेक यादव ने कुछ ऐसी ही सफलता की इबारत लिखी है. विवेक यादव ने यूपीएससी 2025 में सफलता हासिल कर आईपीएस अधिकारी बने हैं. यूपीएससी परिणाम 2025 में विवेक को 487वीं रैंक हासिल हुई.

20 परीक्षाओं में मिली असफलता

विवेक को सफलता रातों-रात नहीं मिली. पहले उन्हें 20 अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं में असफलता मिली, लेकिन न तो वो टूटे और न ही उनके हौसले पस्त हुए. हर हार से उन्होंने एक नई सीख ली और अपनी कमियों को सुधार कर दोगुनी ताकत से उठे. उनकी इसी जिद का नतीजा था कि पिछले साल उन्होंने UPSC क्रैक कर रेलवे में असिस्टेंट कमिश्नर का पद हासिल किया. वहीं लखनऊ में ट्रेनिंग के दौरान उन्होंने लगन के साथ पढ़ाई की और फिर से UPSC का एग्जाम दिया. इस बार विवेक का चयन आईपीएस अधिकारी के पद के लिए हुआ है.

पिता ड्राइवर, मां सिलाई कर करती थी परिवार का भरण-पोषण

विवेक के पिता नवलसिंह यादव चंदेरी नगर पालिका में सीएमओ के ड्राइवर हैं और वर्तमान में अनियमित कर्मचारी हैं. वहीं उनकी मां घर पर सिलाई कर परिवार का भरण-पोषण करती हैं. हालांकि वो आंगनवाड़ी केंद्र में सहायिका भी हैं. आर्थिक तंगी के बावजूद माता-पिता ने कभी विवेक के सपनों में कटौती नहीं की, कभी विवेक की पढ़ाई में कमी नहीं आने दी. विवेक ने 5वें प्रयास में यूपीएससी में 487वीं रैंक हासिल की. 

विवेक ने चन्देरी सरस्वती स्कूल से हायरसेकंडरी परीक्षा पास की और अशोकनगर जिले में टॉप किया. इसके बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से एमए किया और फिर बीएड... 

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5वें प्रयास में हासिल की सफलता

विवेक यादव ने NDTV से खास बातचीत में बताया कि उसका यूपीएससी क्रैक करना बी प्लान था और प्राथमिकता थी कि बेरोजगारी का तमगा दूर किया जाए. इसके लिए उसने बीस परीक्षाएं दी. पटवारी की परीक्षा दी, लेकिन बेटिंग से ही सन्तुष्ट होना पड़ा. 2023 में दिल्ली पुलिस की परीक्षा दी, लेकिन रिटन टेस्ट क्लियर नहीं हुआ. विवेक ने आगे बताया कि पहला उद्देश्य बेरोजगारी का तमगा दूर करना था. इसके लिए पुलिस की नौकरी करने की तैयारी थी, लेकिन इसमें चयन नहीं हो पाया. 

विवेक यादव के संघर्ष और जुनून के बीच किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. 2024 में उनका चयन यूपीएससी में हुआ. वो पिछले एक साल से रेलवे में नौकरी कर रहे थे. विवेक ने अपनी इस सफलता का श्रेय माता पिता और अपने चाचा को दिया.

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