गले के आर- पार हुआ 11 इंच लंबा सरिया, डाक्टरों की टीम ने जटिल ऑपरेशन कर सफलतापूर्वक निकाला

Horrible Accident: मामला आनंद नगर का है. पेशे से मिस्त्री 30 वर्षीय सद्दाम बीते 1 अप्रैल को निर्माण कार्य कर रहा था और अचानक  संतुलन बिगड़ने से 11 इंच लोहे का सरिया उसके गले में घुस गया. हादसा इतना भयानक था कि जो आसपास खड़ा सन्न रह गया. सद्दाम को बेहद ही नाजुक स्थित में अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसे इंदौर रेफर कर दिया गया.

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11-INCH ROD PIERCED IN THROAT IN INDORE YOUTH

Iron Rod Pierces In Throat: मध्य प्रदेश के खरगोन जिले से एक बेहद जानलेवा हादसा सामने आया है, जहां पेशे से राजमिस्त्री एक युवक के गले में करीब 11 इंच लंबा लोहे का सरिया आर-पार हो गया. हादसे के शिकार हुए युवक की जान पर बन आई थी, लेकिन किस्मत अच्छी थी कि तकनीकी रूप से वह सुरक्षित था. युवक को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डाक्टरों ने युवक के गले से सरिया सफलतापूर्वक निकाल दिया. 

मामला आनंद नगर का है. पेशे से राजमिस्त्री 30 वर्षीय सद्दाम बीते 1 अप्रैल को निर्माण कार्य कर रहा था और अचानक संतुलन बिगड़ने से 11 इंच लोहे का सरिया उसके गले में घुस गया. हादसा इतना भयानक था कि जो आसपास खड़े लोग सन्न रह गए. सद्दाम को बेहद ही नाजुक स्थित में अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसे इंदौर रेफर कर दिया गया.

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गले के आर-पार हुए 11 इंच के सरिये के साथ अस्पताल पहुंचा सद्दाम

रिपोर्ट के मुताबिक भयानक हादसे के शिकार हुए सद्दाम को गले के आर-पार हुए 11 इंच के लोहे का सरिये के साथ अस्पताल ले जाया गया. सद्दाम की इतनी गंभीर थी कि मौके पर मौजूद लोग घबरा गए. जिला अस्पताल खरगोन ने पीड़ित की हालत को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद इंदौर के एम वाय हॉस्पिटल रेफर कर दिया, जहां डाक्टरों की टीम तत्काल इलाज शुरू कर दिया.

गले से आर-पार हुए सरिये के साथ युवक को इंदौर के एम वाय अस्पताल पहुंचाया गया

डॉक्टरों की टीम ने बिना देरी किए इमरजेंसी में शुरू किया इलाज

एम वाय हॉस्पिटल के सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अरविन्द शुक्ला के नेतृत्व में एक विशेषज्ञ टीम ने युवक के गले से आर-पार हुए सरिये को निकालने के लिए जटिल ऑपरेशन को अंजाम दिया. टीम में शामिल डॉ. अविनाश गौतम, डॉ. उपेन्द्र पाण्डेय, डॉ. रामेंद्र गुर्जर, सीनियर रेजिडेंट डॉ. सुब्रजीत नायक सहित अन्य जूनियर डॉक्टर्स के अथक प्रयास सद्दाम के गले में फंसे सरिए को सफलतापूर्वक निकाल लिया.

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गले के आर-पार हुए सरिये को निकालते वक्त डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि 11 इंच लंबा सरिया किसी भी क्षण मरीज की जान जा सकती थी, क्योंकि सरिया गले में गहराई तक फंसा हुआ था. ऐसे में डाक्टर्स की टीम द्वारा सावधानी और सटीकता के साथ ऑपरेशन किया गया और सरिए को सफलतापूर्वक बाहर निकालने में सफलता मिल गई.

मरीज की हालत स्थिर है और उसे डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है

गौरतलब है 11 इंच लंबे लोहे के सरिये को पीड़ित के गले से बाहर निकालने के लिए डाक्टरों को जटिल सर्जरी करनी पड़ी. इसमें एनेस्थीसिया विभाग की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही. विभागाध्यक्ष डॉ. शालिनी जैन और उनकी इमरजेंसी टीम ने पूरे ऑपरेशन के दौरान मरीज की स्थिति को स्थिर बनाए रखा. ऑपरेशन के बाद फिलहाल मरीज की हालत स्थिर है और उसे डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है.

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