Digital Arrest: साइबर फ्राड के चंगुल में रिटायर्ड अधिकारी, महीने भर रखा डिजिटल अरेस्ट, ठगों ने वसूले 1.12 करोड़ रुपए

GWALIOR RETIRED OFFICER: पूर्व सब रजिस्ट्रार बिहारीलाल गुप्ता मनी लॉन्डरिंग केस में फंसाने के शातिर ठगों ने झांसे को सच मान लिया और करीब एक माह तक साइबर ठगों के चंगुल में फंसा रहा. अपराधियों के इशारे पर नाचने वाले पीड़ित अधिकारी को अपराधियों ने करोड़ों का चूना लगाने के बाद छोड़ा. 

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GWALIOR RETIRED OFFICER DIGITALLY ARREST APPROX ONE MONTH

Month Long Digital Arrest: मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में मनी लॉन्डरिंग केस में फंसाने का झांसा देकर साइबर अपराधियों द्वारा एक महीने तक एक रिटायर्ड अधिकारी को डिजिटल अरेस्ट करने और 1.12 करोड़ रुपए की ठगी करने का मामला सामने आया है. अपराधियों ने खुद को सीबीआई और आईपीएस अधिकारी बताकर पीड़ित को चूना लगाया.

पूर्व सब रजिस्ट्रार बिहारीलाल गुप्ता मनी लॉन्डरिंग केस में फंसाने के शातिर ठगों ने झांसे को सच मान लिया और करीब एक माह तक साइबर ठगों के चंगुल में फंसा रहा. अपराधियों के इशारे पर नाचने वाले पीड़ित अधिकारी को अपराधियों ने करोड़ों का चूना लगाने के बाद छोड़ा. 

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ठग के अलग-अलग खातों में 1.12 करोड़ रुपए ट्रांसफर कर दिए

रिपोर्ट के के मुताबिक रिटायर्ड अधिकारी को एक महीने तक डिजिटल अरेस्ट कर करोड़ों रुपए डकारने वाले अपराधियों ने मनी लॉंडरिंग में अरेस्टेड एक व्यक्ति से दो लाख रुपए लेकर खाता खुलवाने और हवाला में उस खाते के उपयोग के दावे से नतमस्तक हुए पूर्व अधिकारी ने ठग के अलग-अलग खातों में एक करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम ट्रांसफर कर दिए.

रिटायर्ड अधिकारी ने ठगी का पता चलने पर दर्ज कराई शिकायत 

पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार 75 वर्षीय पीड़ित बिहारीलाल पुत्र स्व. नाथूराम गुप्ता रजिस्ट्रार कार्यालय से उप-पंजीयक के पद से सेवानिवृत्त हैं. ओल्ड खेड़ापति कॉलोनी में स्थित अपने घर में एक महीने तक डिजिटल अरेस्ट रहे पीड़ित को गत 16 नवम्बर 2025 को कॉल आया और पीड़ित का आधार कार्ड और मोबाइल नंबर बंद होने का दावा किया.

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ठगों ने पीड़ित अधिकारी से कहा कि, दिल्ली पुलिस ने तुम्हारा मोबाइल नम्बर बंद करने और गिरफ्तार करने को कहा है. ठग ने पीड़ित से आगे कहा कि, तुम्हारे पास एक आईपीएस अधिकारी का कॉल आएगा. पीड़ित को IPS अधिकारी से बात करने और अपना पक्ष बताने को कहा था. 

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सीबीआई अधिकारी बनकर ठगों ने किया व्हाट्सअप वीडियो कॉल

पीड़ित के मुताबिक थोड़ी देर बाद आए व्हाट्सअप वीडियो कॉल में पुलिस की वर्दी पहने व्यक्ति ने खुद को सीबीआई का अधिकारी बताकर कहा कि उसने संदीप कुमार नामक एक व्यक्ति को हवाला केस में पकड़ा है, जिसका कहना है कि उसने दो लाख रुपए देकर आईसीआईसीआई बैंक का खाता खुलवाया है, जिसका उपयोग उसने मनी लॉन्डरिंग में किया है.

सीबीआई अधिकारी बताकर शातिर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट किया

फर्जी पुलिस ने मामले में गिरफ्तारी का भय दिखाते हुए पीड़ित अधिकारी से कहा कि, आप वरिष्ठ नागरिक हैं, आपको प्री इन्वेस्टीगेशन का मौका मिलेगा, लेकिन इसके लिए सीबीआई अधिकारी को आवेदन भेजना है, फिर ठगों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर पीड़ित को डिजिटल अरेस्ट कर लिया और परिवार से छुपाने की धमकी दी.

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शातिर ठगों ने कहा कि, आपके बैंक खातों की जांच आरबीआई से कराई जा रही है. यदि आपकी राशि मनी लॉन्डरिंग से संबंधित नहीं निकली तो उसे उसके सारे पैसे  वापस कर दिए जाएंगे, लेकिन अधिकारी तब ठगा रह गया, जब इंटरनेट पर फेक डिजिटल अरेस्ट का वीडियो वीडियो देखा. 

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अपने और पत्नी के म्युचुअल फंड के 1.12 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए

ठगों ने डिजिटल अरेस्ट करने के बाद पीड़ित अधिकारी से उनकी सम्पत्ति, म्युचल फंड निवेश आदि की जानकारी ली और गिरफ्तारी का डर दिखाकर उनके म्युचुअल फंड के 60 लाख रुपए और पत्नी के म्युचुअल से 52 लाख रुपए ट्रांसफर करा लिए. ठगों ने पीड़ित से आरटीजीएस के माध्यम से अलग-अलग खाते में कुल 1.12 करोड़ रुपए ट्रांसफर करवाए. 

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फेक डिजिटल अरेस्ट का वीडियो देखा, तब जाकर ठगी का पता चला

फरियादी  गुप्ता ने बताया कि उन्हें अपने साथ हुई ठगी का एहसास हुआ  जब उन्होंने अपने मोबाइल पर अपने साथ हुई ठगी जैसी एक घटना का वायरल वीडियो देखा. अपने साथ हुई ठगी का पता चलने पर पीड़ित बिहारीलाल गुप्ता पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह के पास पहुंचे और अपने साथ हुई ठगी के बारे में बताया. पुलिस ने केस दर्ज जांच शुरू कर दी है.

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