दतिया बैंक घोटाला: फैसले से पहले कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती हिरासत में, 25 साल पुराना है मामला

Datia Bank Scam: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के दतिया से जुड़े बहुचर्चित बैंक घोटाले में दिल्ली की स्पेशल सेशन कोर्ट में सुनवाई पूरी हो चुकी है. अब इस मामले में फैसला सुनाया जाएगा. फैसले से पहले विधायक को हिरासत में लिया जाना इस केस की गंभीरता को दर्शाता है.

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Datia bank Ghotala: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के दतिया से जुड़े बहुचर्चित बैंक घोटाले में एक अप्रैल 2026 को बड़ा फैसला आने जा रहा है. कांग्रेस विधायक राजेन्द्र भारती (Rajendra Bharti) से जुड़े इस 25 साल पुराने मामले पर दिल्ली की स्पेशल सेशन कोर्ट अपना निर्णय सुनाएगी. फैसले से पहले सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के निर्देश पर विधायक को हिरासत में ले लिया गया है.

इस मामले में कोर्ट ने अपना डिसीजन सुनाते हुए उन्हें दोषी ठहरा दिया है. अब मामला यह है यदि सजा 5 साल या 7 साल की होती है, तो राजेंद्र भारती विधायक पद से अयोग्य माने जाएंगे. आपको बता दैं कि दतिया विधानसभा पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की सीट है. राजेंद्र भारती इस सीट पर विजय घोषित हुए थे, लेकिन ऐसे मामले पूर्व से ही इनके ऊपर चल रहे हैं. 

बैंक को ऐसे लगाया था चूना

यह मामला वर्ष 1998 का है, जब राजेन्द्र भारती जिला सहकारी कृषि ग्रामीण बैंक, दतिया के अध्यक्ष थे. आरोप है कि उन्होंने अपनी मां स्वर्गीय सावित्री देवी के नाम पर 10 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) करवाई थी. उस समय इस एफडी पर 13.5% की उच्च ब्याज दर लागू थी. नियमों के अनुसार, एफडी की अवधि पूरी होने के बाद ही भुगतान होना चाहिए था, लेकिन आरोप है कि भारती ने हर साल ब्याज निकालकर नियमों का उल्लंघन किया. इतना ही नहीं, एफडी की अवधि पूरी होने के बाद दस्तावेजों में कथित हेरफेर कर इसकी अवधि पहले 3 साल और फिर 10 साल तक बढ़ा दी गई, ताकि पुरानी ऊंची ब्याज दर का लाभ मिलता रहे. इससे बैंक को आर्थिक नुकसान होने की बात सामने आई.

मामला ऐसे आया सामने

साल 2003 में बैंक प्रबंधन को इस गड़बड़ी की जानकारी मिली. जांच के दौरान राजेन्द्र भारती और उनकी मां को दोषी पाया गया. इसके बाद मामला अदालत तक पहुंचा और धीरेधीरे यह एक बड़ा कानूनी विवाद बन गया.

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इन धाराओं में दर्ज हुआ केस

प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए इस मामले में कई गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया, जिनमें  IPC 420 – धोखाधड़ी, IPC 467, 468, 471 – जालसाजी और फर्जी दस्तावेज, IPC 409 – आपराधिक विश्वासघात और IPC 120B – आपराधिक षड्यंत्र जैसी धाराएं शामिल हैं.

 अदालतों में लंबा सफर

यह मामला पहले दतिया की सीजेएम कोर्ट में चला. बाद में इसे ग्वालियर स्थित MPMLA कोर्ट में ट्रांसफर किया गया. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इस केस की सुनवाई दिल्ली की स्पेशल सेशन कोर्ट में हुई, जहां अब फैसला सुनाया जाना है.

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इसलिए हुई दिल्ली में सुनवाई

राजेन्द्र भारती ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि वे विपक्षी दल के विधायक हैं और मध्य प्रदेश में निष्पक्ष सुनवाई संभव नहीं है. इस दलील को स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मामले को दिल्ली ट्रांसफर कर दिया.

 अब क्या है वर्तमान स्थिति?

दिल्ली की स्पेशल सेशन कोर्ट में सुनवाई पूरी हो चुकी है. अब इस मामले में फैसला सुनाया जाएगा. फैसले से पहले विधायक को हिरासत में लिया जाना इस केस की गंभीरता को दर्शाता है.

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अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अदालत का फैसला क्या होगा? क्या राजेन्द्र भारती को इस मामले में राहत मिलेगी या उन्हें दोषी करार देते हुए सजा सुनाई जाएगी? साथ ही, सजा की स्थिति में उनकी विधायकी पर भी असर पड़ सकता है.

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