जहां भारत अपनी पहली बुलेट ट्रेन को पटरी पर उतारने की तैयारी में है, वहीं चीन ने रफ्तार की ऐसी छलांग लगाई है, जिसने भविष्य की ट्रांसपोर्ट तकनीक को नई दिशा दे दी है. चीन ने सुपरकंडक्टिंग मैग्लेव तकनीक से महज 2 सेकंड में 700 किमी/घंटा की स्पीड हासिल कर विश्व रिकॉर्ड बनाने का दावा कर रहा है.
चीन की नई ट्रेन की रफ्तार की तुलना भारत में ट्रेनों की मौजूदा स्पीड से करें तो फर्क जमीन-आसमान का सा नजर आता है. भारत की पहली बुलेट ट्रेन मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर पर अगस्त 2027 तक के बीच चलने लगेगी. भारत में हाई-स्पीड रेल का सपना धीरे-धीरे आकार ले रहा है, जबकि चीन पहले ही उससे आगे की तकनीक पर काम कर रहा है.
China sets maglev world record, hits 700 km/h in 2 seconds during test
क्या जापान-जर्मनी को पीछे छोड़ रही चीन की स्पीड?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार चीन की नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ डिफेंस टेक्नोलॉजी (एनयूडीटी) की रिसर्च टीम ने सुपरकंडक्टिंग मैग्लेव तकनीक का उपयोग करते हुए एक टन वजन वाले टेस्ट व्हीकल को महज 2 सेकंड में 0 से 700 किमी/घंटा की रफ्तार तक पहुंचाकर नया विश्व रिकॉर्ड कायम किया. वैक्यूम और मैग्नेट के जादू से चीन यह रफ्तार हासिल कर जापान और जर्मनी को पछाड़कर सुपरकंडक्टिंग मैग्लेव तकनीक में लीडर बन रहा है.
वैक्यूम और मैग्नेट से बदली रफ्तार
scmp.com की खबर के अनुसार चीन के प्रयोग में पहियों की जगह शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र और वैक्यूम जैसी परिस्थितियों का इस्तेमाल किया गया. इससे हवा का घर्षण लगभग खत्म हो गया और बेहद कम दूरी में रिकॉर्ड स्पीड हासिल करना संभव हुआ.
चीन की छलांग: दिल्ली-पटना डेढ़ घंटे में
चीन की मैग्लेव तकनीक अगर यात्री परिवहन में उतारी जाती है, तो 700 किमी/घंटा की रफ्तार से दिल्ली से पटना के बीच 1,084 किलोमीटर की दूरी डेढ़ घंटे से भी कम समय में तय हो सकती है. यह तुलना बताती है कि आने वाले समय में ‘हाई-स्पीड' की परिभाषा कितनी तेजी से बदल रही है.
भारत की बुलेट ट्रेन: चरणों में सफर
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार गुजरात के सूरत और बिलिमोरा के बीच भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना का 50 किलोमीटर का हिस्सा 2027 में शुरू हो जाएगा और 2029 तक मुंबई और अहमदाबाद के बीच का पूरा खंड चालू कर दिया जाएगा. यानी कि 2029 तक भारत में पहली बुलेट ट्रेन चलनी शुरू हो जाएगी.
तकनीक की रेस में भारत कहां खड़ा है?
भारत फिलहाल जापानी शिंकानसेन तकनीक पर आधारित बुलेट ट्रेन पर फोकस कर रहा है, जिसकी अधिकतम ऑपरेशनल स्पीड करीब 320 किमी/घंटा होगी. दूसरी ओर चीन मैग्लेव और हाइपरलूप जैसी अगली पीढ़ी की तकनीकों पर प्रयोग कर रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के लिए यह वक्त सिर्फ तुलना करने का नहीं, बल्कि भविष्य की ट्रांसपोर्ट रणनीति पर गंभीर निवेश और रिसर्च का है.














