नक्सल मुक्त दावे पर उठे सवाल: कांग्रेस MLA का अंदरूनी गांव दौरे पर रोक, भूपेश बघेल ने सरकार को घेरा

देश में लाल आतंक के खात्‍मे की डेडलाइन 31 मार्च 2026 है. छत्तीसगढ़ में जैसे-जैसे माओवाद समाप्ति की आख‍िरी तारीख करीब आ रही है, लेकिन कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी को बीजापुर के अंदरूनी गांवों का दौरा करने की अनुमति नहीं मिली. इससे स‍ियासत गरमा गई है. पुल‍िस ने यह फैसला यह सुरक्षा कारणों से ल‍िया बताया है, लेकिन विपक्ष ने सरकार के नक्सलमुक्त दावे पर सवाल उठाए हैं.

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छत्तीसगढ़ ही नहीं, पूरे देश में 31 मार्च 2026 तक माओवाद समाप्त करने की डेडलाइन नजदीक आ रही है. राज्य सरकार का दावा है कि अब केवल 10 से 15 प्रतिशत क्षेत्र ही माओवाद प्रभावित हैं. लेकिन बीजापुर से कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी ने हाल ही में भैरमगढ़ और फरसेगढ़ के अंदरूनी गांवों का दौरा करने की अनुमति मांगी, जो पुलिस ने नक्सली गतिविधियों का हवाला देते हुए अस्वीकृत कर दी. इस कदम ने सीधे तौर पर सरकार के नक्सलमुक्त होने के दावे पर सवाल खड़ा कर दिया.

विक्रम मंडावी ने कहा कि "सरकार नक्सलमुक्त होने का दावा करती है, लेकिन जिन गांवों में पुलिस कैम्प खुले हैं, वहां जनप्रतिनिधियों का जाना रोका जा रहा है."

इसी बीच पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर सरकार को घेरते हुए लिखा कि यदि अभी भी नक्सल गतिविधियां जारी हैं, तो माओवाद का खात्मा कैसे हो रहा है.

वहीं, भाजपा प्रवक्ता गौरीशंकर श्रीवास ने कहा कि विधायक को सुरक्षा कारणों से रोका गया है और अभी किसी ने माओवाद समाप्त होने की घोषणा नहीं की है.

विश्लेषक मानते हैं कि सुरक्षा कारणों से विधायक को अंदरूनी गांवों के दौरे से रोकना जायज हो सकता है, लेकिन विपक्ष का यह सवाल भी वाजिब है कि यदि वहां पुलिस कैम्प हैं, तो जनप्रतिनिधियों को वहां जाने से क्यों रोका जा रहा है. 

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