Chhattisgarh liquor scam case : छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कथित 3200 करोड़ रुपये के शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ताबड़तोड़ कार्रवाई जारी है. ED ने जांच का दायरा बढ़ाते छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़े सिंडिकेट पर अब तक का सबसे बड़ा प्रहार किया है.
जांच एजेंसी ने अनवर ढेबर और अनिल टुटेजा से जुड़े करीब 1,000 करोड़ रुपये के बाजार मूल्य की संपत्तियों को अटैच कर लिया है, जिनमें गोवा का एक आलीशान होटल भी शामिल है. इसके साथ ही कोर्ट में छठा पूरक आरोप पत्र पेश कर चार नए लोगों को भी आरोपी बनाया गया है, जिसके बाद इस मामले में कुल आरोपियों की संख्या बढ़कर 85 हो गई है.
गोवा के वेस्टिन होटल समेत बैंक खाते सीज
शराब घोटाले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत तीन अलग-अलग कुर्की आदेश जारी किए हैं. सरकारी दस्तावेजों में इन संपत्तियों की कीमत भले ही 200 करोड़ रुपये आंकी गई हो, लेकिन बाजार में इनका वास्तविक मूल्य 1,000 करोड़ रुपये से अधिक है. ईडी की यह कार्रवाई ईओडब्ल्यू (EOW) और एसीबी (ACB) रायपुर की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर के आधार पर की गई है.
3,200 करोड़ रुपये से अधिक के भ्रष्टाचार का है आरोप
जांच में सामने आया है कि साल 2019 से 2023 के बीच रायपुर के पूर्व मेयर एजाज ढेबर के भाई अनवर ढेबर और पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा के नेतृत्व वाले सिंडिकेट ने वरिष्ठ अधिकारियों और शराब कारोबारियों के साथ मिलकर करीब 3,200 करोड़ रुपये से अधिक का भ्रष्टाचार किया.
विकास अग्रवाल और अनवर ढेबर की है संपत्तियां
पहला कुर्की आदेश सिंडिकेट के जमीनी स्तर के वित्तीय प्रबंधक विकास अग्रवाल और अनवर ढेबर से संबंधित है. आरोप है कि विकास अग्रवाल डिस्टिलरियों से कमीशन वसूल कर अनवर ढेबर तक पहुंचाता था. ईडी ने विकास के परिजनों के नाम दर्ज संपत्तियों के साथ-साथ अनवर ढेबर की बेनामी संपत्तियों, रायपुर स्थित 'ढेबर सिटी होम्स' के कई प्लॉट और शेल कंपनियों के जरिए खरीदी गई पांच जमीनों को कुर्क किया है. इस आदेश के तहत करीब 30 करोड़ रुपये की संपत्ति सीज की गई है.
गोवा का 110 करोड़ का होटल वेस्टिन भी अटैच
दूसरी सबसे बड़ी कार्रवाई गोवा के अंजुना गांव में स्थित आलीशान 'होटल वेस्टिन' पर हुई है. यह प्रॉपर्टी पैसिफिक होटल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर है, जिसके निदेशक राहुल अग्रवाल और विजय कुमार अग्रवाल हैं. ईडी के अनुसार, इस होटल को खरीदने के लिए शराब घोटाले की काली कमाई से लगभग 110 करोड़ रुपये की बेहिसाबी नकदी का इस्तेमाल किया गया था, जिसे चैतन्य बघेल के निर्देश पर ठिकाने लगाया गया था.
लाइसेंसधारी कंपनियों के शेयर और म्यूचुअल फंड
तीसरी कार्रवाई तीन FL10A लाइसेंसधारी कंपनियों, ओम साई बेवरेजेज, दिशिता वेंचर्स और नेक्सजेन पावर इंजीटेक के खिलाफ जारी हुआ. जांच में पाया गया कि इन कंपनियों को अपने मुनाफे का 50 से 60 फीसदी हिस्सा जबरन सिंडिकेट को देना पड़ता था. इनसे जुड़े करीब 51 करोड़ रुपये के बैंक खाते, शेयर और म्यूचुअल फंड निवेश फ्रीज कर दिए गए हैं.
ED की कार्रवाई पर फिर गरमाई सियासत
ED की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई के बाद छत्तीसगढ़ का सियासी पारा एक बार फिर चढ़ गया है. इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस आमने-सामने आ गई हैं. बीजेपी ने इस बहाने कांग्रेस के केंद्रीय और राज्य नेतृत्व पर सीधा हमला बोला है. वहीं, कांग्रेस ने इसे राजनीतिक द्वेष से प्रेरित कार्रवाई बताया है.
भाजपा का कांग्रेस पर वार
कांग्रेस पर प्रहार करते हुए भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता शिवनारायण पांडेय ने कहा है कि कांग्रेस कब तक घोटालेबाजों को बचाएगी? इस महाघोटाले के तार सीधे कांग्रेस के शीर्ष नेताओं से जुड़े हैं. जनता की गाढ़ी कमाई लूटने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा.
कांग्रेस का भाजपा पर पलटवार
दूसरी तरफ, कांग्रेस ने पलटवार करते हुए इसे पूरी तरह से विपक्ष की छवि खराब करने की साजिश करार दिया है. कांग्रेस प्रवक्ता आशीष यादव ने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा है कि भाजपा सरकार राजनीतिक द्वेष के चलते केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है. आगामी चुनावों को देखते हुए कांग्रेस के नेताओं को जानबूझकर फंसाया जा रहा है और जनता का ध्यान मूल मुद्दों से भटकाने की कोशिश हो रही है.
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इस मामले में अब तक नेता, नौकरशाह और बड़े कारोबारियों समेत 85 लोगों को आरोपी बनाया जा चुका है. छत्तीसगढ़ की राजनीति के जानकारों का मानना है कि शराब घोटाले में कांग्रेस से जुड़े नेताओं के नाम लगातार सामने आने से पार्टी की मुश्किलें आने वाले समय में और बढ़ सकती हैं. भारतीय जनता पार्टी इस पूरे मुद्दे को ठंडे बस्ते में नहीं जाने देना चाहती और इसकी गूंज साल 2028 में होने वाले विधानसभा चुनावों तक बुलंद रखने की पूरी तैयारी में है, ताकि इसे एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया जा सके.
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