Chhattisgarh Apex Bank Scam: छत्तीसगढ़ के सहकारिता क्षेत्र में एक बड़ी हलचल देखने को मिल रही है. प्रदेश के सहकारी बैंक (अपेक्स बैंक) में पिछले लंबे समय से चली आ रही वित्तीय अनियमितताओं और फर्जीवाड़े के खिलाफ अब आर-पार की जंग शुरू हो गई है. बैंक के नवनियुक्त अध्यक्ष केदार गुप्ता ने साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा.
रायपुर में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने ऐलान किया कि बैंक में हुई तमाम गड़बड़ियों की जांच अब आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) के हवाले की जाएगी. यह कदम न केवल दोषियों को सजा दिलाने के लिए उठाया है, बल्कि प्रदेश के लाखों किसानों के भरोसे को बहाल करने की एक बड़ी कोशिश भी है.
भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार और EOW जांच
अपेक्स बैंक के अध्यक्ष केदार गुप्ता ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बैंक में किसानों के नाम पर फर्जी तरीके से लोन निकालने वाले गिरोह अब बच नहीं पाएंगे. उन्होंने बताया कि पुराने समय में हुई वित्तीय गड़बड़ियों और फर्जी ऋण मामलों की फाइलें दोबारा खोली जा रही हैं.
इन मामलों की गंभीरता को देखते हुए जांच की जिम्मेदारी EOW को सौंपी जा रही है, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके. प्रशासन का लक्ष्य उन चेहरों को बेनकाब करना है जिन्होंने किसानों के हक के पैसे का दुरुपयोग किया है.
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तकनीक से रुकेगा फर्जीवाड़ा
बैंक प्रबंधन अब तकनीक के जरिए व्यवस्था को मजबूत करने में जुटा है. केदार गुप्ता ने बताया कि ई-केसीसी (E-KCC) और बैंकिंग सेवाओं के ऑनलाइन होने से फर्जी ऋण बांटने की गुंजाइश लगभग खत्म हो गई है. अब बैंकिंग की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई गई है. इसके अलावा, किसानों की सहूलियत के लिए 'रुपे एटीएम कार्ड' की सुविधा भी शुरू की गई है, जिससे वे अपनी जरूरत के हिसाब से आसानी से 40 हजार रुपये तक निकाल सकते हैं. इससे उन्हें बार-बार बैंक के चक्कर काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
किसानों के लिए नई योजनाएं और लोन
सहकारी बैंक अब केवल खेती-किसानी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि किसानों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए उनके घर के सपनों को भी पूरा करेगा. बैंक अब कृषि ऋण के साथ-साथ किसानों को आवास ऋण (Housing Loan) की सुविधा भी प्रदान कर रहा है.
केदार गुप्ता ने गर्व के साथ साझा किया कि बैंक से जुड़ने वाले किसानों की संख्या अब बढ़कर 15 लाख 56 हजार तक पहुंच गई है. बैंक का मुख्य उद्देश्य नई योजनाओं और तकनीक के तालमेल से किसानों के हितों की रक्षा करना और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है.














