आजादी की लड़ाई लड़ी, जेल भी गए, लेकिन 78 साल बाद भी नहीं मिला सम्मान, अब अलविदा कह गए 102 वर्षीय राजेंद्र महतो

The Last Breath: आजादी के लिए अंग्रेजों से लड़ने वाले राजेंद्र महतो को हक के लिए कोर्ट के चक्कर काटने पड़े. सम्मान के लिए वर्षों लड़ने वाले महतो को कोर्ट से  न्याय भी मिला, लेकिन सरकारी तंत्र के हाथों हारे महतो जीवन के 102 बसंत देखने के बाद भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का दर्जा नहीं मिल सका.

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102-YEAR-OLD FREEDOM FIGHTER RAJENDRA MAHTO PASSED AWAY

Rajendra Mahto Passed Away: जिंदगी भर आजादी की लड़ाई लड़ने वाले और जेल में अंग्रेजों द्वारा दी गई यातनाओं को झेलने वाले राजेंद्र प्रसाद महतो अब इस दुनिया में नहीं हैं. 102 की उम्र में दुनिया को अलविदा कह चुके स्वतंत्रता सेनानी राजेंद्र प्रसाद महतो को उम्र भर स्वतंत्रता सेनानी का सम्मान नहीं मिला और लंबे इंतजार के बादअब वो दुनिया छोड़ चके हैं.

आजादी के लिए अंग्रेजों से लड़ने वाले राजेंद्र महतो को हक के लिए कोर्ट के चक्कर काटने पड़े. सम्मान के लिए वर्षों लड़ने वाले महतो को कोर्ट से  न्याय भी मिला, लेकिन सरकारी तंत्र के हाथों हारे महतो जीवन के 102 बसंत देखने के बाद भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का दर्जा नहीं मिल सका.

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राजेंद्र महतो ने 102 साल की उम्र में कहा अलविदा

रिपोर्ट के मुताबिक 102 साल की उम्र में सम्मान पाने के लिए दर-दर भटकते रहे छतरपुर के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राजेन्द्र महतो की पिछले दिनों मौत हो गई. राजेंद्र महतो के पोते प्रशांत महतो बताते हैं कि 102 की उम्र में दादाजी खुद को स्वतंत्रता सेनानी साबित करने के लिए दर-दर भटकते रहे, लेकिन किसी ने उनकी नहीं सुनी. 

देश के सिस्टम का शिकार हुए राजेंद्र प्रसाद महता

प्रशांत महतो बताते हैं कि उनके दादाजी की आगामी 30 जनवरी तेरहवी हैं. उन्होंने बताया कि उनके दादा पूरी उम्र इस बात से बेहद दुखी रहे कि देश की आजादी के लिए झंडा उठाने वाले को देश के सिस्टम ने शिकार बना लिया, जबकि कोर्ट में उनकी जीत हुई थी, लेकिन जीते जी राजेन्द्र महतो को स्वतंत्रता सेनानी होने का आदेश जारी नहीं किया जा सका.

आजादी के 78 सालों तक सम्मान की आस में बाट जोहते रहे राजेंद्र प्रसाद महतो की सांस अंततः 17 जनवरी, 2026 को टूट गई. स्व. महतो ने अब न केवल जीवन छोड़ दिया है, बल्कि उन अरमानों को छोड़ गए हैं, जिसके इंतजार में उनकी सांस 102 सालों तक उनके अंदर अटकी रहीं. 

सरकारी सिस्टम से नहीं जीत पाए राजेन्द्र महतो

गौरतलब है आज देश 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है, तब भी स्वर्गीय राजेंद्र महतो को पूछने वाला कोई नहीं है. स्वर्गीय राजेंद्र महतो को उनका हक देने के लिए भोपाल के अधिकारियों से लेकर मध्य प्रदेश की मौजूदा सरकार तक को कोर्ट ने आदेश दिया था, लेकिन आज तक कुछ नही हुआ और वो बिना सम्मान के दुनिया से रुखसत हो गए. 

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