चंबल में रेत माफिया की मिलीभगत उजागर; परिवहन सचिव ने अधिकारियों को लगाई फटकार, वाहन छोड़ने पर होगी कार्रवाई

चंबल में रेत माफिया और परिवहन विभाग की मिलीभगत सामने आने के बाद सरकार सख्त हो गई है. परिवहन सचिव ने छोड़े गए अवैध वाहनों को जब्त करने और दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. जानिए क्याें हुआ ऐसा एक्शन.

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चंबल रेत माफिया पर सख्ती, परिवहन सचिव ने अधिकारियों को लगाई फटकार

चंबल अंचल में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है, जिसमें रेत माफिया और परिवहन विभाग के अमले की मिलीभगत की बात सामने आई है. सुप्रीम कोर्ट द्वारा मामले में स्वत: संज्ञान लेने और सरकार को कड़ी फटकार के बाद अब प्रशासन हरकत में आया है. परिवहन सचिव मनीष सिंह ने परिवहन आयुक्त को कड़ा पत्र लिखकर विभागीय लापरवाही पर नाराजगी जताई है और अवैध रूप से छोड़े गए वाहनों को जब्त करने के निर्देश दिए हैं. साथ ही दोषी अधिकारियों के खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई करने और निगरानी व्यवस्था सख्त करने के आदेश दिए गए हैं. इससे चंबल में चल रही अवैध खनन गतिविधियों पर सख्ती के संकेत मिले हैं.

सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के बाद हरकत में सरकार

चंबल में अवैध रेत उत्खनन लंबे समय से गंभीर मुद्दा बना हुआ है. हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेकर राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे. कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद अब राज्य सरकार ने कार्रवाई तेज कर दी है और जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब-तलब शुरू हो गया है.

परिवहन सचिव का सख्त पत्र, लापरवाही उजागर

परिवहन सचिव मनीष सिंह ने परिवहन आयुक्त को लिखे पत्र में स्पष्ट रूप से विभागीय गड़बड़ियों का उल्लेख किया है. पत्र में कहा गया कि जिले में जांच के दौरान कई ऐसे वाहन पकड़े गए जो बिना नंबर प्लेट या नियमों का उल्लंघन करते हुए संचालित हो रहे थे, लेकिन उन्हें जब्त करने की बजाय जुर्माना लेकर छोड़ दिया गया. यह गंभीर लापरवाही की श्रेणी में आता है.

श्योपुर में 11 में से 10 वाहन छोड़ दिए

श्योपुर जिले में 20 से 26 मई के बीच हुई जांच में 11 वाहन बिना नंबर प्लेट के पाए गए. आश्चर्यजनक रूप से केवल एक जेसीबी जब्त की गई, जबकि 10 अन्य वाहनों को शमन शुल्क लेकर छोड़ दिया गया. सचिव ने इसे नियमों का स्पष्ट उल्लंघन बताया और जिम्मेदार अधिकारियों पर सवाल उठाए.

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मुरैना में भी मिली अनियमितताएं

मुरैना जिले में स्थिति और गंभीर पाई गई. यहां 12 ट्रैक्टर बिना नंबर प्लेट के संचालित हो रहे थे, जिन्हें केंद्रीय मोटरयान अधिनियम की धारा 51/177 के तहत जुर्माना लगाकर छोड़ दिया गया. इसके अलावा 54 मालवाहक वाहनों को धारा 192 के तहत शुल्क लेकर छोड़ दिया गया, जबकि इस श्रेणी के मामलों में जब्ती की कार्रवाई आवश्यक थी.

भिंड में भी बड़ी गड़बड़ी

भिंड जिले में भी भारी अनियमितताएं सामने आई हैं. यहां 28 भारी वाहनों को बिना नंबर प्लेट के पकड़े जाने के बावजूद मात्र 500 रुपये का शमन शुल्क लगाकर छोड़ दिया गया. परिवहन सचिव ने इस पर कड़ी नाराजगी जताई और इसे कानून का खुला उल्लंघन बताया.

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सुप्रीम कोर्ट निर्देशों के पालन पर जोर

सचिव ने अपने पत्र में यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार सभी ऐसे वाहनों को तुरंत रोका और जब्त किया जाना चाहिए, जो बिना पंजीयन, फर्जी नंबर प्लेट या नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं. इनमें ट्रैक्टर, डंपर, एक्सकेवेटर, लोडर और अन्य मशीनरी शामिल हैं.

अब तत्काल जब्ती और राजसात कार्रवाई

निर्देश में कहा गया है कि ऐसे सभी वाहनों को मोटरयान अधिनियम की धारा 207 के तहत जब्त कर राजसात करने की प्रक्रिया शुरू की जाए. आवश्यकता पड़ने पर वन विभाग की भी मदद ली जाए.

CCTV निगरानी और दैनिक रिपोर्टिंग के निर्देश

स्टेटिक पॉइंट्स पर CCTV कैमरे लगाए जाने और अवैध गतिविधियों की निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं. इसके अलावा रोजाना ऐसे वाहनों की सूची तैयार कर जिला प्रशासन और पुलिस अधीक्षक को भेजने का आदेश दिया गया है, ताकि समन्वय के साथ कार्रवाई हो सके.

दोषी अधिकारियों पर होगी कार्रवाई

परिवहन सचिव ने स्पष्ट कहा है कि जिन अधिकारियों ने नियमों के उल्लंघन के बावजूद वाहनों को छोड़ा है, उनके खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए. साथ ही संबंधित मामलों की जांच भी कराई जाए.

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ज्वाइनिंग नहीं देने वालों पर सस्पेंशन

पत्र में यह भी निर्देश दिया गया है कि जिन अधिकारियों या कर्मचारियों ने इस कार्य के लिए नियुक्ति के बाद ज्वाइनिंग नहीं दी है, उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए.

विशेष निगरानी के लिए अधिकारी तैनात

उप परिवहन आयुक्त किरण शर्मा को मुरैना संभागीय मुख्यालय भेजने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि वे मौके पर निगरानी कर व्यवस्थाएं सुधार सकें और कार्रवाई में तेजी लाई जा सके. वहीं  सचिव ने परिवहन आयुक्त को भी चंबल अभ्यारण्य के आसपास के क्षेत्रों का दौरा करने और स्थिति का प्रत्यक्ष निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं, ताकि विभागीय कार्यों में एकरूपता लाई जा सके.

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रेत माफिया पर कसी जाएगी नकेल

पूरे मामले से स्पष्ट है कि चंबल क्षेत्र में रेत माफिया और सिस्टम के कुछ हिस्सों के बीच मिलीभगत के चलते अवैध गतिविधियां फल-फूल रही थी. अब सरकार के सख्त रुख और न्यायालय के दबाव के बाद इन पर नकेल कसने की तैयारी है.

प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

अवैध खनन और परिवहन पर रोक लगाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है. अब देखना होगा कि इन सख्त निर्देशों के बाद जमीनी स्तर पर कार्रवाई कितनी प्रभावी होती है और क्या वास्तव में चंबल में रेत माफिया पर अंकुश लग पाता है.

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