न हिंदू, न मुस्लिम... क्या 'जैन तीर्थ' है भोजशाला? हाई कोर्ट पहुंची जैन समाज की याचिका से आया नया मोड़

Bhojshala Dispute Indore High Court: जैन पक्ष का दावा है कि भोजशाला मूल रूप से जैन धरोहर है, जहां प्राचीन काल में जैन गुरुकुल और मंदिर थे. सुनवाई के दौरान ऐतिहासिक तथ्यों और ASI की सर्वे रिपोर्ट को लेकर भी सवाल उठाए गए.

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धार भोजशाला विवाद में जैन समाज की याचिका से नया मोड़; इंदौर हाईकोर्ट में लगातार सुनवाई, ASI रिपोर्ट पर सवाल

Bhojshala Dispute Indore High Court: धार स्थित भोजशाला को लेकर लंबे समय से चल रहे ऐतिहासिक और धार्मिक विवाद में एक नया अध्याय जुड़ गया है. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में जारी सुनवाई के दौरान जैन समाज द्वारा दायर की गई जनहित याचिका ने इस मामले को नया मोड़ दे दिया है. जैन समाज ने दावा किया है कि भोजशाला मूल रूप से जैन धरोहर रही है और प्राचीन काल में यहां जैन गुरुकुल और मंदिर मौजूद थे. हाईकोर्ट ने जैन समाज की याचिका को मुख्य याचिका के साथ टैग कर लिया है, जिससे अब यह विवाद केवल दो पक्षों तक सीमित न रहकर बहुपक्षीय कानूनी बहस में बदल गया है.

इंदौर हाईकोर्ट में लगातार जारी सुनवाई

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में भोजशाला विवाद को लेकर लगातार सुनवाई चल रही है. इसी क्रम में जैन समाज की ओर से दायर जनहित याचिका पर भी अदालत ने विचार शुरू कर दिया है. कोर्ट के इस फैसले को मामले की दृष्टि से अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे जैन पक्ष को औपचारिक रूप से कानूनी मंच पर अपनी बात रखने का अवसर मिला है.

Bhojshala Dispute: भोजशाला विवाद: जैन समाज की PIL, HC में सुनवाई

जैन समाज की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता की दलील

सुनवाई के दौरान जैन समाज की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश प्रसाद राजभर ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपना पक्ष रखा. उन्होंने ऐतिहासिक तथ्यों और प्राचीन ग्रंथों का हवाला देते हुए दावा किया कि राजा भोज ने भोजशाला की भूमि जैन आचार्य मानतुंग को दान में दी थी. मानतुंगाचार्य को जैन धर्म के अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथ ‘भक्तामर स्तोत्र' का रचयिता माना जाता है.

मुख्य याचिका के साथ टैग हुई PIL

अदालत ने जैन समाज की जनहित याचिका को भोजशाला विवाद में पहले से लंबित मुख्य याचिका के साथ टैग कर दिया है. इससे यह संकेत मिलता है कि कोर्ट इस विवाद को व्यापक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से देखना चाहती है. कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, इससे सुनवाई का दायरा और तर्कों की संख्या दोनों बढ़ेंगी.

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ASI रिपोर्ट को लेकर उठे सवाल

जैन समाज की ओर से पक्ष रख रहीं अधिवक्ता प्रिया जैन ने मीडिया से चर्चा में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की हालिया सर्वे रिपोर्ट पर सवाल उठाए. उन्होंने बताया कि सर्वे के दौरान जैन तीर्थंकरों और यक्ष-यक्षणियों की कई खंडित मूर्तियां पाई गई हैं, लेकिन एएसआई ने रिपोर्ट में इन अवशेषों को जैन धर्म से स्पष्ट रूप से जोड़कर नहीं दर्शाया.

जैन प्रतीकों से मेल खाने के दावे

प्रिया जैन ने यह भी कहा कि सर्वे में ‘सप्त फणी कैनोपी', यानी सात फणों वाली संरचना के अवशेष मिले हैं, जो जैन प्रतीक चिन्हों से मेल खाते हैं. जैन समाज का दावा है कि ये सब तथ्य भोजशाला के जैन इतिहास की ओर इशारा करते हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

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पूजा-अर्चना के समान अधिकार की मांग

जैन समाज ने अदालत से भोजशाला में पूजा-अर्चना के समान अधिकार देने की मांग की है. समाज का कहना है कि यह मामला किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि ऐतिहासिक सत्य और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा है. साथ ही लंदन में संरक्षित वाग्देवी की प्रतिमा और उससे जुड़े शिलालेखों को भी जैन इतिहास की पुष्टि के तौर पर पेश किया गया है.

अगली सुनवाई पर टिकी निगाहें

मामले में अगली सुनवाई भी जारी रहेगी, जिसमें जैन समाज की दलीलों पर विस्तार से सुनवाई होने की संभावना है. अदालत के आगामी रुख पर अब सभी पक्षों और प्रशासन की नजरें टिकी हुई हैं.

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