26 फरवरी को प्यार ने एक ऐसा रूप लिया, जिसने सिनेमा और संस्कृति दोनों को एक साथ जीवंत कर दिया. रश्मिका मंदाना (Rashmika Mandanna) और विजय देवरकोंडा (Vijay Deverakonda) ने उदयपुर के खूबसूरत हिल रिसॉर्ट आईटीसी मेमेंटोस उदयपुर में परिवार और करीबी दोस्तों की मौजूदगी में शादी की. मीडिया की पहुंच से दूर इस जगह को चुनकर उन्होंने यह साफ कर दिया कि वे अपने रिश्ते को शोर नहीं, बल्कि शांति में जीना चाहते हैं. आठ साल तक दोनों ने अपने रिश्ते को सार्वजनिक नजर से दूर रखा. न सोशल मीडिया पर ज्यादा तस्वीरें, न ही खुली बयानबाज़ी. आज के दौर में, जब हर रिश्ते की कहानी इंस्टाग्राम पर लिखी जाती है, उन्होंने अपने प्यार को निजी और पवित्र बनाए रखा और फिर, शादी के दिन उन्होंने अपनी प्रेम कहानी को एक महाकाव्य की तरह दुनिया के सामने पेश किया.
परंपराओं से सजी दो संस्कृतियों की अनोखी झलक
शादी की खास बात यह रही कि इसमें दो अलग-अलग परंपराओं का सुंदर संगम देखने को मिला. सुबह तेलुगु रीति-रिवाज से विवाह हुआ और शाम को कोडावा परंपरा के अनुसार दूसरा समारोह आयोजित किया गया. यह सिर्फ शादी नहीं, बल्कि विरासत और पहचान का उत्सव था.
यह कोई बॉलीवुड-स्टाइल चमक-दमक वाली शादी नहीं थी. इसमें भव्यता थी, लेकिन दिखावे से ज्यादा संस्कृति और आध्यात्मिकता की गहराई थी. मंदिर आभूषण, पारंपरिक साड़ियाँ, हस्तकला की बारीक कढ़ाई हर चीज अपनी जड़ों से जुड़ी हुई थी.
जब विरोश बन गए शिव-पार्वती
शादी की एक तस्वीर ने इंटरनेट पर धूम मचा दी. तस्वीर में दोनों कैमरे की तरफ पीठ करके चल रहे हैं. विजय का लाल अंगवस्त्रम रश्मिका की रस्ट रंग की साड़ी से बंधा हुआ है. सबसे खास बात विजय ने रश्मिका की उंगली को हल्के से थाम रखा है, ठीक वैसे ही जैसे शिव-पार्वती की लोकप्रिय तस्वीरों में दिखाया जाता है.
सोशल मीडिया पर लोगों ने इस तस्वीर को दिव्यता का प्रतीक बताया. किसी ने लिखा, युग अलग है, पर भाव वही है. तो किसी ने कहा, "यह तो साक्षात शिव-पार्वती का विवाह लगता है." यह तस्वीर केवल एक पोज नहीं थी, यह विश्वास, प्रेम और आध्यात्मिकता का प्रतीक बन गई.
वेडिंग आउटफिट का गहरा अर्थ
डिजाइनर अनामिका खन्ना ने दोनों के परिधानों को खास सोच के साथ तैयार किया. रश्मिका की रस्ट रंग की साड़ी लाल बॉर्डर से सजी थी, जिस पर मंदिरों की आकृतियां और हैदराबाद की स्थापत्य कला से प्रेरित कढ़ाई की गई थी. एंटीक गोल्ड धागों से की गई महीन कारीगरी ने इसे श्रद्धा और सौंदर्य का प्रतीक बना दिया.
विजय ने हाथ से बुनी हुई पारंपरिक धोती और लाल अंगवस्त्रम पहना, जिस पर मंदिर और प्रकृति से जुड़े प्रतीक उकेरे गए थे. उन्होंने सोने के आभूषण भी पहने, जो उनकी शाही छवि को और उभार रहे थे.
बाहुबली वाली शाही झलक
उनकी भव्यता ने कई लोगों को बाहुबली: द बिगिनिंग और बाहुबली 2 की याद दिला दी. जैसे प्रभास ने फिल्म में शाही अंदाज अपनाया था, वैसे ही विजय घोड़े पर सवार होकर पहुंचे, एक विजेता की तरह. लेकिन, यह सिर्फ फिल्मी प्रभाव नहीं था. यह दक्षिण भारतीय संस्कृति की वह विरासत है, जहां शाहीपन और अध्यात्म साथ चलते हैं.
स्वर्ग में बनी जोड़ी, धरती पर महाकाव्य
रश्मिका और विजय की शादी सिर्फ एक सेलिब्रिटी इवेंट नहीं थी. यह दो संस्कृतियों, दो परंपराओं और दो आत्माओं का मिलन था. उन्होंने साबित किया कि सच्चा प्यार शोर नहीं करता वह अपनी गहराई से पहचान बनाता है. उनकी शादी की तस्वीरें बताती हैं कि जब प्रेम में आस्था और परंपरा का रंग घुल जाए, तो वह किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं होता.