स्कूल से आने के बाद बच्चे से जरूर पूछें ये सवाल, पीडियाट्रिशियन ने बताया हर माता-पिता को पता होनी चाहिए ये बात

Parenting Tips: पीडियाट्रिशियन मिशेल शाह बताती हैं, हर पैरेंट्स जानना चाहते हैं कि बच्चा स्कूल में क्या सीख रहा है, टीचर कैसे पढ़ा रहे हैं और स्कूल का माहौल कैसा है. लेकिन सवाल पूछने का तरीका अगर थोड़ा बदल दिया जाए, तो बच्चे ज्यादा खुलकर बात कर पाते हैं.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
स्कूल से आने के बाद बच्चे से क्या पूछें?

Parenting Tips: स्कूल से घर आने के बाद माता-पिता का बच्चों से बातचीत करना बहुत जरूरी होता है. लेकिन इस दौरान ज्यादातर माता-पिता अपने बच्चे से एक ही सवाल पूछते हैं-  'आज स्कूल में क्या सीखा?'. इसी विषय पर पीडियाट्रिशियन मिशेल शाह ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक वीडियो शेयर किया है. इस वीडियो में डॉक्टर बताती हैं, बिना सोचे समझे रोज यह एक सवाल पूछना ठीक नहीं है इससे बच्चों पर दबाव पड़ सकता है. 

बच्चे को प्ले स्कूल में कब भेजना चाहिए? पीडियाट्रिशियन ने बताया बच्चे को स्कूल भेजने की सही उम्र क्या है

मिशेल शाह कहती हैं, जब बच्चे स्कूल से निकलते हैं तो वे थके हुए होते हैं. उस समय उनसे यह उम्मीद करना कि वे तुरंत बता दें कि उन्होंने क्या-क्या सीखा, उन्हें 'रिजल्ट-ओरिएंटेड' बना सकता है. यानी बच्चा यह सोचने लगता है कि उससे हमेशा कोई ठोस जवाब या नतीजा मांगा जा रहा है. कई बार बच्चे ने बहुत कुछ महसूस किया होता है, सीखा भी होता है, लेकिन वह शब्दों में बता नहीं पाता है. ऐसे में वह चुप हो सकता है या झुंझलाहट महसूस कर सकता है.

मिशेल शाह का कहना है कि माता-पिता का इरादा गलत नहीं होता. हर पैरेंट्स जानना चाहते हैं कि बच्चा स्कूल में क्या सीख रहा है, टीचर कैसे पढ़ा रहे हैं और स्कूल का माहौल कैसा है. लेकिन सवाल पूछने का तरीका अगर थोड़ा बदल दिया जाए, तो बच्चे ज्यादा खुलकर बात कर पाते हैं.

Advertisement

स्कूल से आने के बाद बच्चे से क्या पूछें?

पीडियाट्रिशियन सलाह देती हैं कि बच्चों से ऐसे सवाल पूछें, जो उनके प्रोसेस पर फोकस करें, न कि सिर्फ नतीजे पर. जैसे-

सवाल नंबर 1- आज स्कूल में तुम्हें कोई मुश्किल तो नहीं आई?

सवाल नंबर 2- आज तुमने अपने दोस्तों के साथ क्या खेला?

सवाल नंबर 3- क्या आज टीचर की कोई बात समझने में परेशानी हुई?

सवाल नंबर 4- आज स्कूल में कोई मजेदार चीज हुई?

इन सवालों से बच्चे यह महसूस करते हैं कि उनके अनुभव, भावनाएं और कोशिशें भी मायने रखती हैं. उन्हें यह डर नहीं रहता कि सही या गलत जवाब देना है. वे धीरे-धीरे खुलकर बताने लगते हैं कि उनका दिन कैसा रहा.

Advertisement

इस तरह की बातचीत से बच्चों में यह समझ विकसित होती है कि जिंदगी सिर्फ लक्ष्य तक पहुंचने का नाम नहीं है, बल्कि उस रास्ते की भी उतनी ही अहमियत होती है. जब हम अपने शब्दों में यह बदलाव लाते हैं, तो बच्चे आत्मविश्वासी बनते हैं और अपनी भावनाएं बेहतर तरीके से व्यक्त करना सीखते हैं.

ऐसे में माता-पिता के लिए यह जरूरी है कि वे बच्चों के साथ रोज थोड़ी देर सुकून से बात करें. सही सवाल बच्चों के मन का दरवाजा खोल सकते हैं. 

अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.

Advertisement


 

Featured Video Of The Day
Trump-Ghalibaf Secret Deal? Trump का 'Iran Secret Plan': क्या गालिबाफ बनेंगे ईरान के नए राष्ट्रपति?
Topics mentioned in this article