Intermittent Fasting vs Vrat: क्या नवरात्रि व्रत ‘Intermittent Fasting’ का बाप है? जानें क्या कहता है आयुर्वेद और साइंस

Intermittent Fasting vs Vrat: IF में खाने का समय सीमित होता है, जैसे 16:8 पैटर्न. इससे शरीर में इंसुलिन लेवल कम होता है और शरीर जमा किए गए फैट (stored fat) को एनर्जी के रूप में इस्तेमाल करने लगता है.

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Fasting or intermittent fasting, which one is better

Intermittent Fasting vs Vrat: नवरात्रि के दौरान व्रत रखने की परंपरा भारत में सदियों पुरानी है. वहीं दूसरी तरफ, हाल के वर्षों में “Intermittent Fasting” यानी तय समय के भीतर खाना और बाकी समय उपवास रखना, वेट लॉस और मेटाबोलिक हेल्थ के लिए एक ट्रेंड बन चुका है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पारंपरिक व्रत, खासकर नवरात्रि का व्रत, आज के Intermittent Fasting से ज्यादा एडवांस या असरदार है? या दोनों अलग-अलग कॉन्सेप्ट हैं? आयुर्वेद और मॉडर्न साइंस दोनों इस पर क्या कहते हैं, इसे समझना जरूरी है.

क्या है  Intermittent Fasting? | What is Intermittent Fasting?

सबसे पहले Intermittent Fasting (IF) को समझें. IF में खाने का समय सीमित होता है, जैसे 16:8 पैटर्न. इससे शरीर में इंसुलिन लेवल कम होता है और शरीर जमा किए गए फैट (stored fat) को एनर्जी के रूप में इस्तेमाल करने लगता है. IF मेटाबोलिक हेल्थ, वेट मैनेजमेंट और इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार ला सकता है.

अब बात नवरात्रि व्रत की. आयुर्वेद के अनुसार, उपवास सिर्फ खाना छोड़ना नहीं, बल्कि शरीर और मन को “डिटॉक्स” करने की प्रक्रिया है. समय-समय पर उपवास रखने से पाचन तंत्र को आराम मिलता है, “अग्नि” (डाइजेस्टिव फायर) संतुलित होती है और शरीर में जमा विषाक्त पदार्थ (toxins) कम होते हैं.

हालांकि, साइंस “डिटॉक्स” शब्द को उसी तरह नहीं मानता जैसा आयुर्वेद में बताया गया है. मानव शरीर में पहले से ही लिवर और किडनी जैसे अंग टॉक्सिन्स को साफ करने का काम करते हैं. लेकिन यह भी माना जाता है कि समय-सीमित भोजन (जैसे fasting) से डाइजेशन को ब्रेक मिल सकता है और मेटाबॉलिक प्रोसेस बेहतर हो सकती है.

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Intermittent Fasting या व्रत कौन सा बेहतर | Intermittent Fasting or Traditional Fasting: Which is Better?

दोनों की तुलना करें तो Intermittent Fasting एक structured eating pattern है, जबकि नवरात्रि व्रत पूरे शरीर और मन से जुड़ा (holistic) होता है, जिसमें खान-पान के साथ-साथ मन पर नियंत्रण, सत्विक आहार और धार्मिक आस्था भी शामिल होती है. कई लोग व्रत में फल, साबूदाना, सिंघाड़ा आदि खाते हैं, जिससे कैलोरी पूरी तरह बंद नहीं होता, बल्कि पैटर्न बदलता है.

यही कारण है कि दोनों को एक जैसा कहना पूरी तरह सही नहीं होगा. IF जहां मुख्य रूप से वेट लॉस और मेटाबॉलिज्म पर फोकस करता है, वहीं व्रत का मकसद शारीरिक के साथ मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन भी होता है.

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कुल मिलाकर, यह कहना कि “नवरात्रि व्रत Intermittent Fasting का बाप है” एक दिलचस्प तुलना जरूर है, लेकिन वैज्ञानिक तौर पर दोनों अलग-अलग बातें हैं. हां, इतना जरूर है कि दोनों में एक बात कॉमन है, और वो है खाने के पैटर्न को सीमित करना. तो Intermittent Fasting हो या फिर व्रत सही तरीके से किया जाए तो फायदा मिल सकता है.

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