जरा सोचिए. हिमालय की गोद में दूर-दूर तक फैली सफेद बर्फ, और उसके बीच एक साथ खड़ी पांच ऊंची चोटियां. सूरज की पहली किरण पड़ते ही ये पहाड़ सुनहरी रोशनी में चमक उठते हैं. उत्तराखंड के कुमाऊं इलाके में मौजूद पंचाचूली पर्वत का नजारा कुछ ऐसा ही है. कुदरत की ये करिश्माई जगह इन दिनों ट्रेकिंग लवर्स के बीच तेजी से पॉपुलर हो रही है.
पंचाचूली दरअसल पांच हिमालयी चोटियों का समूह है. इस पांचों चोटियों को पंचाचूली-1 से लेकर पंचाचूली-5 तक अलग-अलग नाम दिए गए हैं. इनकी ऊंचाई लगभग 6,334 मीटर से लेकर 6,904 मीटर तक है. ये पहाड़ कुमाऊं क्षेत्र के पूर्वी हिस्से में दारमा घाटी के पास दुग्तू गांव के आसपास स्थित हैं. अगर इनका सबसे शानदार दृश्य देखना हो तो मुनसियारी हिल स्टेशन सबसे बेहतरीन जगह मानी जाती है. समुद्र तल से करीब 2,200 मीटर की ऊंचाई पर बसा मुनसियारी इन पांचों चोटियों को देखने के लिए जैसे एक परफेक्ट व्यू पॉइंट बन जाता है. यहां से सनराइज देखना कई लोगों के लिए बेहद खास अनुभव बन जाता है.
पंचाचूली नाम कैसे पड़ा- (Panchchuli Peaks Parvat Name)
इन पहाड़ों के नाम के पीछे एक रोचक पौराणिक कथा भी सुनाई जाती है. कहा जाता है कि महाभारत काल में जब पांचों पांडव अपनी अंतिम यात्रा पर स्वर्ग की ओर जा रहे थे, तब उन्होंने इसी इलाके में अपना आखिरी भोजन पकाया था. माना जाता है कि उन्होंने पांच अलग-अलग चूल्हों पर खाना बनाया था. उसी वजह से इन पहाड़ों को पंचाचूली कहा जाने लगा. कुछ स्थानीय लोग इन पांच चोटियों को पांचों पांडव भाइयों का प्रतीक भी मानते हैं.
मौसम की चुनौतियां-
हालांकि पंचाचूली की खूबसूरती जितनी आकर्षक है, उतनी ही चुनौती यहां का मौसम भी देता है. इतनी ऊंचाई पर मौसम अचानक बदल सकता है. तेज हवाएं, बर्फीले तूफान और आसपास फैले विशाल ग्लेशियर इस इलाके को रोमांचक बना देते हैं. यही कारण है कि यह जगह खास तौर पर अनुभवी ट्रेकर्स और पर्वतारोहियों को अपनी ओर खींचती है. जो लोग पहली बार ट्रेकिंग करना चाहते हैं, उनके लिए सलाह दी जाती है कि पहले आसान ट्रेक से शुरुआत करें.
पंचाचूली के आसपास कई ऐसे ट्रेक हैं जो प्रकृति के शानदार नजारे दिखाते हैं. यहां के कुछ लोकप्रिय ट्रेक इस तरह हैं:
खालिया टॉप ट्रेक-
सबसे पॉपुलर और आसान (2-3 दिन). अल्पाइन मीडोज से गुजरते हुए पंचाचूली और नंदा देवी का 360° व्यू. वाइल्डफ्लावर्स और बर्डवॉचिंग का बोनस.
मिलम ग्लेशियर ट्रेक-
पुराने व्यापार रास्तों से होकर जाता है. लंबा (10-12 दिन), लेकिन जंगल, गांव और विशाल ग्लेशियर का कमाल का मिक्स. हिस्ट्री और एडवेंचर दोनों का अनुभव.
रालम ग्लेशियर ट्रेक-
कम भीड़, ज्यादा शांति. ऑफबीट, सेरेन और नेचर से भरपूर. अगर आप भीड़ से दूर सुकून चाहते हैं, तो यह ट्रेक शानदार विकल्प माना जाता है.
कब जाना चाहिए-
अगर आप पंचाचूली जाने का प्लान बना रहे हैं तो मार्च से जून और सितंबर से नवंबर के बीच का समय सबसे अच्छा माना जाता है. इन महीनों में आसमान साफ रहता है और पहाड़ों के नजारे भी साफ दिखाई देते हैं. गर्मियों में यहां वाइल्डफ्लावर्स खिलते हैं, जबकि बारिश के बाद का मौसम साफ हवा और सुनहरी रोशनी के लिए जाना जाता है. मानसून और कड़ाके की सर्दियों के दौरान यहां जाना मुश्किल हो सकता है, इसलिए इन महीनों में यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है. तो अगर पहाड़ आपको बुला रहे हैं और आप हिमालय को करीब से महसूस करना चाहते हैं, तो पंचाचूली को अपनी अगली ट्रिप की लिस्ट में जरूर शामिल कर सकते हैं. यहां की ट्रेकिंग सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि ऐसा अनुभव बन सकती है जिसे लोग लंबे समय तक याद रखते हैं.
ये भी पढ़ें- AIIMS ट्रेंड डॉक्टर ने बताया 30 की उम्र के बाद पेट बाहर क्यों निकलने लगता है?
एनेस्थीसिया कैसे सुन्न कर देता है शरीर? क्यों लोग डरते हैं इससे, जानिए इससे जुड़े मिथ्स और फैक्ट्स...